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Kaushambi News: वर्टिकल इंटीग्रेशन पर हुआ सेमिनार, कनिष्ठ दुबे अव्वल
Sat, 17 May 2025 12:59 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Sat, 17 May 2025 12:59 AM IST
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मंझनपुर। मेडिकल कॉलेज में नई शिक्षण पद्धति पर सेमिनार का आयोजन हुआ। इसमें एनाटॉमी विभाग की महत्वपूर्ण शैक्षणिक पहल में एमबीबीएस के छात्रों का प्री-क्लीनिकल से क्लीनिकल विषयों पर चर्चा हुई।
कादीपुर स्थित स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में शुक्रवार को एनाटॉमी विभाग की तरफ से वर्टिकल इंटीग्रेशन पर आधारित सेमिनार का का शुभारंभ प्राचार्य डॉ. हरिओम कुमार सिंह ने किया। इसमें एमबीबीएस प्रथम वर्ष के छात्रों ने प्रतिभाग किया। सेमिनार नेशनल मेडिकल कमीशन की कम्पिटेंसी बेस्ड मेडिकल एजुकेशन के तहत हुआ है। इसमें सहयोग के लिए नाक, कान और गला (ईएनटी) विभाग को शामिल किया। इस दौरान प्री-क्लीनिकल से क्लीनिकल विषय पर हुई प्रतियोगिता में कनिष्ठ दुबे ने पहला स्थान प्राप्त किया। इस मौके पर एनाटॉमी विभाग के डॉ. राकेश कुमार शुक्ला, एमबीबीएस के मरियम खान, मो. आकिब आलम, मो. सैफुल, ओजस, हिमांशी, छितिज और मो. अरबाज ने भाग लिया।
यह प्रणाली प्री-क्लीनिकल, पैरा-क्लीनिकल और क्लीनिकल विषयों को जोड़ती है। इससे छात्र किसी संरचना या रोग को मूल वैज्ञानिक समझ से लेकर चिकित्सकीय दृष्टिकोण तक समझ पाते हैं। यह पद्धति प्रथम वर्ष से ही छात्रों में क्लीनिकल एप्रोच विकसित करती है। - डॉ. हरिओम कुमार सिंह, प्राचार्य
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कादीपुर स्थित स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में शुक्रवार को एनाटॉमी विभाग की तरफ से वर्टिकल इंटीग्रेशन पर आधारित सेमिनार का का शुभारंभ प्राचार्य डॉ. हरिओम कुमार सिंह ने किया। इसमें एमबीबीएस प्रथम वर्ष के छात्रों ने प्रतिभाग किया। सेमिनार नेशनल मेडिकल कमीशन की कम्पिटेंसी बेस्ड मेडिकल एजुकेशन के तहत हुआ है। इसमें सहयोग के लिए नाक, कान और गला (ईएनटी) विभाग को शामिल किया। इस दौरान प्री-क्लीनिकल से क्लीनिकल विषय पर हुई प्रतियोगिता में कनिष्ठ दुबे ने पहला स्थान प्राप्त किया। इस मौके पर एनाटॉमी विभाग के डॉ. राकेश कुमार शुक्ला, एमबीबीएस के मरियम खान, मो. आकिब आलम, मो. सैफुल, ओजस, हिमांशी, छितिज और मो. अरबाज ने भाग लिया।
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यह प्रणाली प्री-क्लीनिकल, पैरा-क्लीनिकल और क्लीनिकल विषयों को जोड़ती है। इससे छात्र किसी संरचना या रोग को मूल वैज्ञानिक समझ से लेकर चिकित्सकीय दृष्टिकोण तक समझ पाते हैं। यह पद्धति प्रथम वर्ष से ही छात्रों में क्लीनिकल एप्रोच विकसित करती है। - डॉ. हरिओम कुमार सिंह, प्राचार्य
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