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Kaushambi News: आसमान से राहत बरसी, जमीन पर फैली मुश्किल
Wed, 18 Sep 2024 06:22 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Wed, 18 Sep 2024 06:22 AM IST
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विसर्जन के इंतजार में गणपति बप्पा: मेडिकल कॉलेज प्रशासन की ओर से कादीपुर स्थित कॉलेज परिसर में
मंगलवार को पहले पहर बारिश शुरू हुई तो शाम तक कम-ज्यादा होती ही रही। तेज हवा भी चलती रही। इससे छह डिग्री दिन का तापमान कम हो गया। उमस से राहत लोगों को राहत मिली। माहौल खुशनुमा हो गया। लेकिन घर से निकलते जलभराव और कीचड़ ने आवागम में मुश्किल हुई। कई कच्चे मकान भी गिरे।
मौसम तो सोमवार की शाम से बदलने लगा था। आसमान में बादलों का आना-जाना शुरू हो गया था, लेकिन बारिश की एक बूंद भी नहीं टपकी। मंगलवार की सुबह करीब आठ बजे बारिश शुरू हो गई। सोमवार को जहां अधिकतम तापमान 33.1 और न्यूनतम 27.3 डिग्री था। वहीं मंगलवार को अधिकतम पारा 26.9 तो न्यूनतम दर्ज किया गया।
चमनगंज, समदा, आजाद नगर, गौसपुर टिकरी समेत अन्य इलाकों में लोगों को जलभराव व कीचड़ से जूझना पड़ा। कामकाजी लोगों और कोचिंग व लाइब्रेरी में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को ज्यादा दिक्कतें हुईं। समदा रोड निवासी अभिषेक मिश्र ने बताया कि एक कंपनी में इंटरव्यू देने के लिए सुबह नौ बजे प्रयागराज के लिए निकलना था। बड़ी मुश्किल हुई। भड़ेसर के रमेश ने बताया कि रोज मजदूरी करके घर चलता है। बारिश की वजह से काम पर नहीं जा सका।
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सिर्फ मंझनपुर ही नहीं, पश्चिमशरीरा, सरायअकिल, चायल, चरवा समेत लगभग हर जगह ऐसे ही हालात रहे। कई गलियां पानी से पूरी तरह लबालब दिखीं। आवागमन में लोगों को काफी दिक्कतें उठानी पड़ीं।
साइड स्टोरी
गिरी धान की फसल, बाजरा और तिल को भी नुकसान
- जिले के 2.25 लाख किसानों की परेशानी
फोटो- 06, 13 से 16 तक
संवाद न्यूज एजेंसी
मंझनपुर। बारिश के चली हवा ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दीं। जिले में लगभग 48 हजार हेक्टेयर में धान, 10 हजार हेक्टेयर में बाजरा और पांच हजार हेक्टेयर में तिल की खेती होती है। इस समय तीनों फसलें खेतों में खड़ी हैं। किसानों का कहना है कि यह बारिश नुकसानदेह है। जिले के लगभग सवा दो लाख किसानों की परेशानी बढ़ गई है।
इस समय धान की लगभग 70 फीसदी फसलों में बालियां आ गईं हैं। बारिश तो वरदान थी। तेज हवा के कारण फसल गिर गई है। उत्पादन घटना लगभग तय है।
- केशबाबू मिश्रा, गोटइया का पूरा, नेवादा
बाजरा और तिल दोनों ही फसलों में फूल और फलियां आने का समय है। बारिश के कारण फूल गिर गए हैं। ऐसे में उत्पादन घटेगा। रामचंद्र सिंह,
- खरसेन का पूरा, नेवादा
करीब पांच बीघे धान की फसल लगाई है। दोपहर बाद जब खेतों की तरफ गया तो देखा कि खड़ी फसल का बड़ा हिस्सा गिरा है।
सुरेश सिंह, टहेरा, सरसवां
दो दिन पहले ही खेत में यूरिया का छिड़काव किया था। बारिश से खेत पानी से लबालब हो गए। इससे यूरिया का असर खत्म हो जाएगा।
लवकुश पांडेय, भोला नाथ का पूरा, पूरबशरीरा
अलग से हाईलाइट करें
असर दिखा रहा है समुद्री तूफान
चायल। कृषि विज्ञान केंद्र के विज्ञानी डाॅ. मनोज कुमार सिंह ने बताया कि तेज हवा के साथ बारिश के पीछे समुद्री तूफान यागी का प्रभाव है। इस बारिश से धान की उसी फसल को नुकसान होगा, जिनमें बालियां आ गईं हैं। इनके गिरने से उत्पादन प्रभावित होगा। जिन खेतों में पौधे छोटे हैं, उन फसलों को फायदा होगा। उन्होंने बताया कि अगस्त तक बारिश औसत से 14 फीसदी कम थी। दलहनी फसलों के लिए कम पानी की आवश्यकता होती है। अधिक पानी से अरहर की 10 से 15 प्रतिशत फसलें खराब होने की संभावना है। इनमें उकठा रोग लगने की आशंका भी बढ़ जाएगी। खेतों में जलभराव से बाजरे एवं तिल की फसलें भी प्रभावित होंगी। किसानों को अपने खेतों से जल निकासी के उपाय करने की जरूरत है। संवाद
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मौसम तो सोमवार की शाम से बदलने लगा था। आसमान में बादलों का आना-जाना शुरू हो गया था, लेकिन बारिश की एक बूंद भी नहीं टपकी। मंगलवार की सुबह करीब आठ बजे बारिश शुरू हो गई। सोमवार को जहां अधिकतम तापमान 33.1 और न्यूनतम 27.3 डिग्री था। वहीं मंगलवार को अधिकतम पारा 26.9 तो न्यूनतम दर्ज किया गया।
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चमनगंज, समदा, आजाद नगर, गौसपुर टिकरी समेत अन्य इलाकों में लोगों को जलभराव व कीचड़ से जूझना पड़ा। कामकाजी लोगों और कोचिंग व लाइब्रेरी में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को ज्यादा दिक्कतें हुईं। समदा रोड निवासी अभिषेक मिश्र ने बताया कि एक कंपनी में इंटरव्यू देने के लिए सुबह नौ बजे प्रयागराज के लिए निकलना था। बड़ी मुश्किल हुई। भड़ेसर के रमेश ने बताया कि रोज मजदूरी करके घर चलता है। बारिश की वजह से काम पर नहीं जा सका।
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सिर्फ मंझनपुर ही नहीं, पश्चिमशरीरा, सरायअकिल, चायल, चरवा समेत लगभग हर जगह ऐसे ही हालात रहे। कई गलियां पानी से पूरी तरह लबालब दिखीं। आवागमन में लोगों को काफी दिक्कतें उठानी पड़ीं।
साइड स्टोरी
गिरी धान की फसल, बाजरा और तिल को भी नुकसान
- जिले के 2.25 लाख किसानों की परेशानी
फोटो- 06, 13 से 16 तक
संवाद न्यूज एजेंसी
मंझनपुर। बारिश के चली हवा ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दीं। जिले में लगभग 48 हजार हेक्टेयर में धान, 10 हजार हेक्टेयर में बाजरा और पांच हजार हेक्टेयर में तिल की खेती होती है। इस समय तीनों फसलें खेतों में खड़ी हैं। किसानों का कहना है कि यह बारिश नुकसानदेह है। जिले के लगभग सवा दो लाख किसानों की परेशानी बढ़ गई है।
इस समय धान की लगभग 70 फीसदी फसलों में बालियां आ गईं हैं। बारिश तो वरदान थी। तेज हवा के कारण फसल गिर गई है। उत्पादन घटना लगभग तय है।
- केशबाबू मिश्रा, गोटइया का पूरा, नेवादा
बाजरा और तिल दोनों ही फसलों में फूल और फलियां आने का समय है। बारिश के कारण फूल गिर गए हैं। ऐसे में उत्पादन घटेगा। रामचंद्र सिंह,
- खरसेन का पूरा, नेवादा
करीब पांच बीघे धान की फसल लगाई है। दोपहर बाद जब खेतों की तरफ गया तो देखा कि खड़ी फसल का बड़ा हिस्सा गिरा है।
सुरेश सिंह, टहेरा, सरसवां
दो दिन पहले ही खेत में यूरिया का छिड़काव किया था। बारिश से खेत पानी से लबालब हो गए। इससे यूरिया का असर खत्म हो जाएगा।
लवकुश पांडेय, भोला नाथ का पूरा, पूरबशरीरा
अलग से हाईलाइट करें
असर दिखा रहा है समुद्री तूफान
चायल। कृषि विज्ञान केंद्र के विज्ञानी डाॅ. मनोज कुमार सिंह ने बताया कि तेज हवा के साथ बारिश के पीछे समुद्री तूफान यागी का प्रभाव है। इस बारिश से धान की उसी फसल को नुकसान होगा, जिनमें बालियां आ गईं हैं। इनके गिरने से उत्पादन प्रभावित होगा। जिन खेतों में पौधे छोटे हैं, उन फसलों को फायदा होगा। उन्होंने बताया कि अगस्त तक बारिश औसत से 14 फीसदी कम थी। दलहनी फसलों के लिए कम पानी की आवश्यकता होती है। अधिक पानी से अरहर की 10 से 15 प्रतिशत फसलें खराब होने की संभावना है। इनमें उकठा रोग लगने की आशंका भी बढ़ जाएगी। खेतों में जलभराव से बाजरे एवं तिल की फसलें भी प्रभावित होंगी। किसानों को अपने खेतों से जल निकासी के उपाय करने की जरूरत है। संवाद

विसर्जन के इंतजार में गणपति बप्पा: मेडिकल कॉलेज प्रशासन की ओर से कादीपुर स्थित कॉलेज परिसर में