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धान का घटा दायरा, दलहन-तिलहन व मोटे अनाज की खेती में बढ़ी दिलचस्पी

Sat, 25 Jun 2022 12:27 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 25 Jun 2022 12:27 AM IST
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Reduced coverage of paddy, increased interest in the cultivation of pulses-oilseeds and coarse cereals
इस बार खरीफ सीजन में धान का दायरा घट गया है। किसानों की दिलचस्पी दलहन-तिलहन के साथ मोटे अनाज तरफ बढ़ी है। जिले में 19,344 हेक्टेयर में ज्वार, बाजारा व मक्के की खेती होगी। जबकि 11,097 हेक्टेयर क्षेत्रफल में अरहर, उर्द व मूंग की खेती की जाएगी। विभाग का कहना है कि मोटे अनाज पौष्टिक तत्वों से भरपूर होते हैं। भोजन की गुणवत्ता प्रभावित होने के कारण मोटे अनाज की मांग दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। वहीं सिंचाई के साधनों की समस्या को देखते हुए धान की खेती से किसानों की दिलचस्पी कम हो रही है।
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जिले में खरीफ के सीजन में धान व मोटे अजान की खेती प्रमुखता से होती है। कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल जिले में 72,157 हेक्टेयर में खरीफ की खेती की गई थी। इसमें 44,936 हेक्टेयर धान की रोपाई शामिल थी, लेकिन इस बार खरीफ का रकबा बढ़ाकर 76,780 हेक्टेयर कर दिया गया है। इसमें धान का रकबा 527 हेक्टेयर घटाकर 44,409 हेक्टेयर कर दिया गया है। इसके पीछे सिंचाई आदि साधनों की किल्लत प्रमुख वजह मानी जा रही है।
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खरीफ के सीजन में किसानों का रुझान दलहन-तिलहन व मोटे अनाज की तरफ है। दलहन में उरद 1267 हेक्टेयर, मूंग 44 और अरहर की खेती 9,786 हेक्टेयर में होगी। इसी तरह मोटे अनाज की खेती का दायरा 19,344 हेक्टेयर बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।
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जिसमें 8,455 हेक्टेयर में ज्वार, 10,770 में बाजरा तथा 119 हेक्टेयर में मक्के की रोपाई शामिल की गई है। इस बार तिल की खेती भी 1930 हेक्टेयर में होगी, जो पिछले साल के मुकाबले 467 हेक्टेयर अधिक होगी। जिला कृषि अधिकारी मनोज कुमार गौतम ने बताया कि इस बार धान की खेती का रकबा घटेगा। किसानों की दिलचस्पी मोटे अनाज व दलहन-तिलहन की तरफ बढ़ा है।
मक्के की खेती में बीज पर 100 प्रतिशत की सब्सिडी
जिले में मक्के की खेती ज्यादा नहीं होती है। किसान बमुश्किल सौ हेक्टेयर के आसपास ही मक्के की रोपाई करते हैं। इस बार 14 हेक्टेयर की मामूली बढ़ोतरी कर 119 हेक्टेयर क्षेत्रफल में मक्के की रोपाई का लक्ष्य तय किया गया है। मक्के के प्रति किसानों का रुझान बढ़े इसके लिए किसानों मक्के के बीज पर 100 प्रतिशत की सब्सिडी दी जा रही है।

मोटा अनाज पोषक तत्वों से भरपूर
ज्वार, बाजरा और मक्का जैसे मोटे अनाज पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। संयुक्त जिला चिकित्सालय के फिजीशियन डॉ. अरविंद कनौजिया के मुताबिक भोजन की गुणवत्ता प्रभावित होने के कारण मोटे अनाज की मांग बढ़ रही है। इन दिनों बाजार में मोटे अनाज सुपर फूड के रूप में पहचाने जाते हैं। ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और शुगर का नेबल संतुलित बनाए रखने के लिए मोटा अनाज काफी फायदेमंद होता है।
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