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Kaushambi News: कारागार में पक्षियों की आजादी के रक्षक बने बंदी
Tue, 15 Jul 2025 12:59 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Tue, 15 Jul 2025 12:59 AM IST
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कारागार परिसर में मौजूद बतख। स्रोत : जेल प्रशासन
वो पक्षी जो जेल में रहकर भी आजादी के गीत गाते हैं और कैदी उनकी आजादी के साथ उनका भी खयाल रखते हैं...। इन दिनों 50 से अधिक पक्षी शाम होते ही कारागार परिसर में बने दड़बे में खुद आ जाते हैं। पक्षियों की सेवा कर रहे इन बंदियों पर ये लाइनें सटीक बैठती हैं। जेल प्रशासन दाना-पानी के साथ इनके इलाज की भी व्यवस्था करता है।
जिला कारागार परिसर में ईंट-पत्थर कार्टून से निर्मित करीब आठ दड़बे बनाए गए हैं। जिनमें तोता, बुलबुल और गौरैया सहित अन्य पक्षी रहते हैं। सुबह-शाम इनके दाने की भी व्यवस्था की जाती है। सुबह दाना चुगने के बाद यह पक्षी उड़ान भर लेते हैं और शाम ढलने के पहले अपने दड़बे में वापस आ जाते हैं।
इन पक्षियों के अलावा परिसर में 15 बतख का पालन भी किया गया है। जेल अस्पताल के चिकित्सक जख्मी पक्षियों की मरहम पट्टी करते हैं। जेल अधीक्षक अजितेश कुमार ने निरुद्ध बंदी संतोष पाल और राजेश सरोज को इनकी देखरेख की जिम्मेदारी सौंपी है। जेल अधिकारी कहते हैं बेजुबान पक्षियों की सेवा कर रहे इन बंदियों को मानों प्रायश्चित करने का भी मौका मिल गया है।
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गौरैया की मौत से मिला सबक
जेल परिसर में सालभर पहले नेवले के हमले में एक गौरैया की मौत हो गई थी। तभी से पक्षियों की सुरक्षा को लेकर कारागार परिसर में दड़बे बनवाए गए। साथ ही रोज सुबह दाना-पानी की व्यवस्था की जाने लगी। दड़बे में मौजूद पक्षियों के अलावा हर दिन सैकड़ों की संख्या में अन्य पक्षी भी दाना चुगने आते हैं।- अजितेश कुमार, जेल अधीक्षक
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जिला कारागार परिसर में ईंट-पत्थर कार्टून से निर्मित करीब आठ दड़बे बनाए गए हैं। जिनमें तोता, बुलबुल और गौरैया सहित अन्य पक्षी रहते हैं। सुबह-शाम इनके दाने की भी व्यवस्था की जाती है। सुबह दाना चुगने के बाद यह पक्षी उड़ान भर लेते हैं और शाम ढलने के पहले अपने दड़बे में वापस आ जाते हैं।
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इन पक्षियों के अलावा परिसर में 15 बतख का पालन भी किया गया है। जेल अस्पताल के चिकित्सक जख्मी पक्षियों की मरहम पट्टी करते हैं। जेल अधीक्षक अजितेश कुमार ने निरुद्ध बंदी संतोष पाल और राजेश सरोज को इनकी देखरेख की जिम्मेदारी सौंपी है। जेल अधिकारी कहते हैं बेजुबान पक्षियों की सेवा कर रहे इन बंदियों को मानों प्रायश्चित करने का भी मौका मिल गया है।
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गौरैया की मौत से मिला सबक
जेल परिसर में सालभर पहले नेवले के हमले में एक गौरैया की मौत हो गई थी। तभी से पक्षियों की सुरक्षा को लेकर कारागार परिसर में दड़बे बनवाए गए। साथ ही रोज सुबह दाना-पानी की व्यवस्था की जाने लगी। दड़बे में मौजूद पक्षियों के अलावा हर दिन सैकड़ों की संख्या में अन्य पक्षी भी दाना चुगने आते हैं।- अजितेश कुमार, जेल अधीक्षक

कारागार परिसर में मौजूद बतख। स्रोत : जेल प्रशासन

कारागार परिसर में मौजूद बतख। स्रोत : जेल प्रशासन