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Kaushambi News: समय से पहले आम के बाैर, बढ़ते तापमान ने बढ़ाई बागवानों की चिंता
Sat, 15 Feb 2025 11:01 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Sat, 15 Feb 2025 11:01 PM IST
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इस साल जनवरी के अंतिम सप्ताह से ही तापमान चढ़ने लगा है। ऐसे में आम के पेड़ पर 15 दिन पहले ही बौर आ गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे बौर पर फंगस लग सकता है। इसी तरह तापमान बढ़ता रहा तो आम का साइज छोटा रह जाएगा और उत्पादन भी घट सकता है।
जनपद के तकरीबन 500 हेक्टेयर क्षेत्रफल में आम की बागवानी की गई है। अकेले 70 फीसदी बागवानी कड़ा और सिराथू ब्लॉक क्षेत्र में होती है। यहां चौसा, दशहरा और लंगड़ा आम की बागवानी ज्यादा है।
इस बार मौसम में उतार-चढ़ाव ने आम उत्पादकों की चिंता बढ़ा दी है। आमतौर पर आम के बौर फरवरी के आखिरी सप्ताह तक आते हैं, लेकिन इस बार करीब 15 दिन पहले ही आ गए। विशेषज्ञों के मुताबिक बढ़ते तापमान से बौर भी कमजोर रह जाएगा और उत्पादन घट सकता है।
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कड़ा के बागवान मेराज खान, सम्मे मियां व राहुल सोनकर बताते हैं कि इस बार गर्मी की वजह से पखवाड़े भर पहले ही आम के पेड़ पर बौर आने लगे। गर्मी की वजह से बौर झुलस कर झड़ सकते हैं, दूसरी बार बौर वैसा नहीं आता। इसका सीधा असर आम की पैदावार पर पड़ेगा। उत्पादन कम होने से आम महंगा भी रहेगा।
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समझिए तापमान का उतार-चढ़ाव (डिग्री सेल्सियस)
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वर्ष अधिकतम न्यूनतम
फरवरी- 2022 24.0 12.0
फरवरी- 2023 24.5 10.6
फरवरी- 2024 24.3 16.0
फरवरी- 2025 29.0 14.0
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वर्जन-- -- -
इस बार गर्मी की वजह से बाैर थोड़ा पहले आ रहा है। इस पर चिंता से अधिक निगरानी की जरूरत है। बाैर में फंगस का अंदेशा रहेगा, ऐसे में दवा का छिड़काव जरूरी है। यदि गर्मी इसी तरह से बढ़ेगी और जब बाैर से फल बनेगा, तब गर्मी नुकसानदेह होगी।
सुरेंद्र राम भाष्कर, डीएचओ
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जिस तरह से तापमान बढ़ा है, उससे थोड़ा पहले बौर आ गए। इससे बौर कमजोर होगा। लेकिन, बारिश हुई तो फसल पर खास असर नहीं पड़ेगा।
- डॉ. जितेंद्र प्रताप सिंह, उद्यान वैज्ञानिक
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जनपद के तकरीबन 500 हेक्टेयर क्षेत्रफल में आम की बागवानी की गई है। अकेले 70 फीसदी बागवानी कड़ा और सिराथू ब्लॉक क्षेत्र में होती है। यहां चौसा, दशहरा और लंगड़ा आम की बागवानी ज्यादा है।
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इस बार मौसम में उतार-चढ़ाव ने आम उत्पादकों की चिंता बढ़ा दी है। आमतौर पर आम के बौर फरवरी के आखिरी सप्ताह तक आते हैं, लेकिन इस बार करीब 15 दिन पहले ही आ गए। विशेषज्ञों के मुताबिक बढ़ते तापमान से बौर भी कमजोर रह जाएगा और उत्पादन घट सकता है।
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कड़ा के बागवान मेराज खान, सम्मे मियां व राहुल सोनकर बताते हैं कि इस बार गर्मी की वजह से पखवाड़े भर पहले ही आम के पेड़ पर बौर आने लगे। गर्मी की वजह से बौर झुलस कर झड़ सकते हैं, दूसरी बार बौर वैसा नहीं आता। इसका सीधा असर आम की पैदावार पर पड़ेगा। उत्पादन कम होने से आम महंगा भी रहेगा।
समझिए तापमान का उतार-चढ़ाव (डिग्री सेल्सियस)
वर्ष अधिकतम न्यूनतम
फरवरी- 2022 24.0 12.0
फरवरी- 2023 24.5 10.6
फरवरी- 2024 24.3 16.0
फरवरी- 2025 29.0 14.0
वर्जन
इस बार गर्मी की वजह से बाैर थोड़ा पहले आ रहा है। इस पर चिंता से अधिक निगरानी की जरूरत है। बाैर में फंगस का अंदेशा रहेगा, ऐसे में दवा का छिड़काव जरूरी है। यदि गर्मी इसी तरह से बढ़ेगी और जब बाैर से फल बनेगा, तब गर्मी नुकसानदेह होगी।
सुरेंद्र राम भाष्कर, डीएचओ
जिस तरह से तापमान बढ़ा है, उससे थोड़ा पहले बौर आ गए। इससे बौर कमजोर होगा। लेकिन, बारिश हुई तो फसल पर खास असर नहीं पड़ेगा।
- डॉ. जितेंद्र प्रताप सिंह, उद्यान वैज्ञानिक