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विषधरों ने छोड़ा बिल, दहशत में लोग

Thu, 12 Sep 2019 12:54 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Thu, 12 Sep 2019 12:54 AM IST
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Poisoners left the bill, people in panic
विषधरों ने छोड़ा बिल, दहशत में लोग
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40 दिन के भीतर सर्पदंश से जा चुकी है 25 लोगों की जान
पर्याप्त बारिश न होने से जमीन से नमी गायब होने से बाहर भाग रहे हैं विषधर
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। सावधान! दोआबा में विषधरों ने बिल छोड़ दिया है। पर्याप्त बारिश न होने के कारण जमीन में नमी नहीं है। लिहाजा विषधर बिलों से निकलकर लोगों को डस ले रहे हैं। जिले में 40 दिन के भीतर करीब 25 लोगों की जान ले चुके हैं। इससे लोगों में दहशत है। लोग अपना हर कदम फूंक-फूंककर रखने को मजबूर हैं।
कौशाम्बी जिले में इस दफा औसत से काफी कम बरसात हुई है। इसी का नतीजा है कि सितंबर में मई-जून सरीखी गर्मी का एहसास हो रहा है। जानकारों का कहना है कि जमीन में भी नमी नहीं रह गई है। लिहाजा बिलों में रहने वाले सर्प बाहर भाग रहे हैं। खेत-खलिहानों के साथ वह लोगों के घरों में भी प्रवेश कर रहे हैं। जरा सी लापरवाही पर डसकर जान ले लेते हैं। जनपद में करीब सवा महीने से विषधरों की दहशत सिर चढ़कर बोल रही है। हालत यह है कि लोग सुबह-शाम खेतों की ओर जाने से बचने लगे हैं। जाते भी हैं तो रोशनी का पूरा बंदोबस्त रखते हैं। जिनके घर कच्चे हैं, वह पूरा प्रयास करते हैं कि कहीं भी अंधेरा नहीं रहने पाए। 40 दिन के भीतर लगभग 25 लोगों की मौत ने पीड़ित परिवारों में कोहराम मचाकर रख दिया है। परिवार के सदस्यों के आंसू नहीं थम रहे हैं।
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दहशत में चली जाती है अधिकतर की जान
मंझनपुर। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. दीपक सेठ का कहना है कि सांप बिना वजह किसी को नहीं डसते हैं। पैर पड़ने अथवा दबने पर ही वह डसता है। कई बार सांप की फुफकार से ही दहशत में लोगों को दिल का दौरा पड़ जाता है और जान चली जाती है। करीब 40 फीसदी मामलों में यही होता है।
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मिलती है आर्थिक मदद
मंझनपुर। अपर जिलाधिकारी मनोज ने बताया कि सर्पदंश से मौत को सरकार ने प्राकृतिक आपदा मान लिया है। ऐसे मामलों में पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता दी जाती है। शर्त यह है कि मृतक किसान होना चाहिए और उसके नाम जमीन होनी चाहिए। मौत के बाद चार लाख तक का मुआवजा दिए जाने का नियम है। मुआवजे की राशि कंडीशन के हिसाब से बढ़-घट भी सकती है। इसके लिए पोस्टमार्टम कराना जरूरी है।
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