{"_id":"691f798b20cdf74353073a8e","slug":"plenty-of-mismanagement-in-pandit-deendayal-ashram-paddhati-girls-school-kaushambi-news-c-261-1-kmb1028-132623-2025-11-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kaushambi News: आश्रम पद्धति के विद्यालय में परिसर की सफाई न होने से छात्राओं को हो रही है जंगल में होने की अनुभूति","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kaushambi News: आश्रम पद्धति के विद्यालय में परिसर की सफाई न होने से छात्राओं को हो रही है जंगल में होने की अनुभूति
विज्ञापन
हॉस्टल के सीढ़ी की छत में लगे मधुमक्खी के छत्ते। संवाद
- फोटो : reasi news
मंझनपुर। भरसवां स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय आश्रम पद्धति बालिका विद्यालय में कक्षा 6 से 12 तक की पढ़ाई होती है, लेकिन यहां की बदहाल व्यवस्थाएं बालिकाओं की शिक्षा, सेहत के साथ ही सुरक्षा पर सवाल खड़ा कर रही है। ठंड का मौसम शुरू हो चुका है। लेकिन, बचाव के लिए कोई उचित इंतजाम नहीं है। छात्राओं को टूटी खिड़कियों, पतले कंबलों और बिना व्यवस्था वाले हॉस्टल में रात गुजारनी पड़ रही है।
आश्रम पद्धति विद्यालय भरसवां की संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने बृहस्पतिवार को पड़ताल की। यहां हालात बेहद चिंताजनक मिले। हॉस्टल परिसर के चारों ओर जगह-जगह पानी भराव था। नालियां चोक होने के कारण गंदगी और बदबू का ढेर जमा हो गया है। सीवर टैंक का ढक्कन टूटा मिला। सीवर ओवरफ्लो हो रहा है। हॉस्टल के आसपास की खाली जमीनों में झाड़ियां इस कदर उगी हैं कि आश्रम पद्धति के विद्यालय में परिसर की सफाई न होने से छात्राओं को जंगल में होने की अनुभूति हो रही है।
दूसरी मंजिल तक जाने वाली सीढ़ियों पर मधुमक्खियों के छत्ते लगे हैं। कमरों की सभी खिड़कियों के पल्ले गायब हैं, जिससे ठंडी हवा सीधे अंदर प्रवेश करती है। अलमारियों और कमरों के दरवाजे टूटे होने से चूहे, कुत्ते और बिल्लियां तक कमरे में घुस आते हैं। 14 बालिकाओं के लिए केवल आठ बेड उपलब्ध हैं। दिए गए कंबल इतने पतले हैं कि दो छात्राएं मिलकर कंबल ओढ़ने को मजबूर हैं।
विज्ञापन
भोजन की स्थिति भी खराब है। छात्राओं का आरोप है कि हर दिन आलू-बैंगन की सब्जी दी जाती है। हरी सब्जियां मिलती ही नहीं है। हर मौसम में फल के नाम पर केवल केले दिए जा रहे हैं। इससे ठंड में कई छात्राओं की तबीयत बिगड़ रही है।
-- --
शिक्षकों की है कमी
-- - विद्यालय में शिक्षकों की कमी है। इसका असर पढ़ाई पर भी देखा जा सकता है। हिंदी, भौतिक विज्ञान, व्यायाम शिक्षक, संगीत शिक्षक, क्लर्क और वार्डेन तक नहीं हैं। छात्राओं का कहना है कि भौतिक विज्ञान, अंग्रेजी और अन्य विषयों की कक्षाएं नियमित नहीं होतीं। सितंबर में आए विज्ञान के शिक्षक पाठ्यक्रम पूरा नहीं करा पा रहे। कक्षा 10 की छात्राओं के मुताबिक विज्ञान और गणित की एक भी किताब अभी तक वितरित नहीं हुई है, जबकि संख्या 70 है। कक्षा आठ की छात्रा ने बताया कि मेस का खाना अच्छा न होने से पेट दर्द, मुंह के छाले जैसी समस्याएं बनी रहती हैं। बीमार होने पर विद्यालय में इलाज की कोई व्यवस्था नहीं है। अभिभावकों के बयान के मुताबिक रात 11 बजे तक फोन कर बच्चों को ले जाने के लिए कहा जाता है। कक्षा सात की छात्राओं ने बताया कि हॉस्टल में इन्वर्टर नहीं है। लाइट कटते ही पूरा परिसर अंधेरे में डूब जाता है, जिससे डर लगता है और वह टॉर्च घर से लाती हैं।
-- -- -- -- -
-- विद्यालय को आवश्यक धनराशि प्राप्त हो चुकी है। जल्द ही दरवाजे, टाइल्स, खिड़कियां, अलमारियां और इंवर्टर की व्यवस्था कराई जाएगी। भोजन संबंधी शिकायतों की जानकारी नहीं है। इसकी जांच कराई जाएगी। शिक्षकों की कमी भी शीघ्र पूरी की जाएगी।- दिलीप कुमार, समाज कल्याण अधिकारी
विज्ञापन
आश्रम पद्धति विद्यालय भरसवां की संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने बृहस्पतिवार को पड़ताल की। यहां हालात बेहद चिंताजनक मिले। हॉस्टल परिसर के चारों ओर जगह-जगह पानी भराव था। नालियां चोक होने के कारण गंदगी और बदबू का ढेर जमा हो गया है। सीवर टैंक का ढक्कन टूटा मिला। सीवर ओवरफ्लो हो रहा है। हॉस्टल के आसपास की खाली जमीनों में झाड़ियां इस कदर उगी हैं कि आश्रम पद्धति के विद्यालय में परिसर की सफाई न होने से छात्राओं को जंगल में होने की अनुभूति हो रही है।
विज्ञापन
दूसरी मंजिल तक जाने वाली सीढ़ियों पर मधुमक्खियों के छत्ते लगे हैं। कमरों की सभी खिड़कियों के पल्ले गायब हैं, जिससे ठंडी हवा सीधे अंदर प्रवेश करती है। अलमारियों और कमरों के दरवाजे टूटे होने से चूहे, कुत्ते और बिल्लियां तक कमरे में घुस आते हैं। 14 बालिकाओं के लिए केवल आठ बेड उपलब्ध हैं। दिए गए कंबल इतने पतले हैं कि दो छात्राएं मिलकर कंबल ओढ़ने को मजबूर हैं।
विज्ञापन
भोजन की स्थिति भी खराब है। छात्राओं का आरोप है कि हर दिन आलू-बैंगन की सब्जी दी जाती है। हरी सब्जियां मिलती ही नहीं है। हर मौसम में फल के नाम पर केवल केले दिए जा रहे हैं। इससे ठंड में कई छात्राओं की तबीयत बिगड़ रही है।
शिक्षकों की है कमी

हॉस्टल के सीढ़ी की छत में लगे मधुमक्खी के छत्ते। संवाद- फोटो : reasi news

हॉस्टल के सीढ़ी की छत में लगे मधुमक्खी के छत्ते। संवाद- फोटो : reasi news