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गंदगी से बजबजा रहे गांव, अफसर कागज पर संचारी रोग की कर रहे रोकथाम
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people are in problem from garbage
- फोटो : KAUSHAMBI
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गंदगी से बजबजा रहे गांव, कैसे होगा संचारी रोग की रोकथाम
जिले भर की ग्राम पंचायतों में 838 सफाई कर्मियों की है तैनाती
राज्य वित्त के पैसे से अब गांवों की सफाई कराने की तैयारी
मंझनपुर। संचारी रोग नियंत्रण पखवाड़े के तीसरे चरण में गांवों को साफ-सुथरा बनाने की पहल पर ग्रहण लगता दिख रहा है। कर्मचारियों की कमी के कारण गांव में साफ-सफाई तो दूर बजबजाती नालियों और बरसात के जल निकासी का भी संकट है। हल्की बरसात में ही गांव की गलियां पानी से लबालब हो जाती हैं। ऐसे हालात में अब पंचायती राज विभाग राज्य वित्त के पैसे से गांवों को साफ-सुथरा कराने की योजना बना रहा है।
कौशाम्बी में 18 लाख की आबादी को संक्रामक रोगों से बचाव के लिए शासन के निर्देश पर संचारी रोग पखवाड़ा चलाया जा रहा है। जिले में चलाए जा रहे अभियान का सितंबर में तीसरा चरण है। अभियान की कागजों में शुरुआत हो चुकी है लेकिन गांवों से गंदगी हटने का नाम नहीं ले रही है। इसके पीछे सफाई कर्मियों की संख्या में कमी को जिम्मेदार माना जा रहा है। सरकारी आंकड़ों में 709 राजस्व गांवों के सापेक्ष जिले में 838 सफाई कर्मियों को तैनाती दी गई है। एक राजस्व गांव में कम से कम एक सफाई कर्मी को तैनात किया गया है। जिले की चरवा, पश्चिमशरीरा, पिंडरा जैसी ग्राम सभा में सफाई कर्मियों की तैनाती का यही मानक रखा गया है। जबकि यह ग्राम सभाएं टाउन एरिया के बराबर की आबादी वाली है। इसके कारण संचारी रोग नियंत्रण अभियान कागज से निकल कर जमीन पर आता नहीं दिख रहा। कौशाम्बी विकास खंड की म्योहर सबसे बड़ी ग्राम सभा है। यहां सफाई कर्मी नहीं होने के कारण नालियों का पानी सड़क पर फैल रहा है। लोगों को गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है। इसी विकास खंड के बारा जाने वाले मुख्य मार्ग पर बरसात का पानी भरा हुआ है। कामोवेश यहीं हाल जिले की ज्यादातर ग्राम सभाओं का है। ऐसे हालात में सरकार की मंशा फाइलों से उतरकर जमीन पर आती नहीं दिख रही है। नेवादा विकास खंड के अमिरसा में हल्की सी बरसात होने पर सड़क पानी से लबालब हो जाती है।
गांव में बीमारी फैलने की आशंका
मंझनपुर। कीचड़ और जल भराव के कारण गांवों में बीमारी फैलने की आशंका है। रात को पानी में पनपने वाले मच्छर लोगों की नींद हराम कर रहे हैं। वायरल फीवर सहित तमाम बीमारियां ग्रामीणों को अपनी जद में लिए हुए हैं।
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जिले भर की ग्राम पंचायतों में 838 सफाई कर्मियों की है तैनाती
राज्य वित्त के पैसे से अब गांवों की सफाई कराने की तैयारी
मंझनपुर। संचारी रोग नियंत्रण पखवाड़े के तीसरे चरण में गांवों को साफ-सुथरा बनाने की पहल पर ग्रहण लगता दिख रहा है। कर्मचारियों की कमी के कारण गांव में साफ-सफाई तो दूर बजबजाती नालियों और बरसात के जल निकासी का भी संकट है। हल्की बरसात में ही गांव की गलियां पानी से लबालब हो जाती हैं। ऐसे हालात में अब पंचायती राज विभाग राज्य वित्त के पैसे से गांवों को साफ-सुथरा कराने की योजना बना रहा है।
कौशाम्बी में 18 लाख की आबादी को संक्रामक रोगों से बचाव के लिए शासन के निर्देश पर संचारी रोग पखवाड़ा चलाया जा रहा है। जिले में चलाए जा रहे अभियान का सितंबर में तीसरा चरण है। अभियान की कागजों में शुरुआत हो चुकी है लेकिन गांवों से गंदगी हटने का नाम नहीं ले रही है। इसके पीछे सफाई कर्मियों की संख्या में कमी को जिम्मेदार माना जा रहा है। सरकारी आंकड़ों में 709 राजस्व गांवों के सापेक्ष जिले में 838 सफाई कर्मियों को तैनाती दी गई है। एक राजस्व गांव में कम से कम एक सफाई कर्मी को तैनात किया गया है। जिले की चरवा, पश्चिमशरीरा, पिंडरा जैसी ग्राम सभा में सफाई कर्मियों की तैनाती का यही मानक रखा गया है। जबकि यह ग्राम सभाएं टाउन एरिया के बराबर की आबादी वाली है। इसके कारण संचारी रोग नियंत्रण अभियान कागज से निकल कर जमीन पर आता नहीं दिख रहा। कौशाम्बी विकास खंड की म्योहर सबसे बड़ी ग्राम सभा है। यहां सफाई कर्मी नहीं होने के कारण नालियों का पानी सड़क पर फैल रहा है। लोगों को गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है। इसी विकास खंड के बारा जाने वाले मुख्य मार्ग पर बरसात का पानी भरा हुआ है। कामोवेश यहीं हाल जिले की ज्यादातर ग्राम सभाओं का है। ऐसे हालात में सरकार की मंशा फाइलों से उतरकर जमीन पर आती नहीं दिख रही है। नेवादा विकास खंड के अमिरसा में हल्की सी बरसात होने पर सड़क पानी से लबालब हो जाती है।
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गांव में बीमारी फैलने की आशंका
मंझनपुर। कीचड़ और जल भराव के कारण गांवों में बीमारी फैलने की आशंका है। रात को पानी में पनपने वाले मच्छर लोगों की नींद हराम कर रहे हैं। वायरल फीवर सहित तमाम बीमारियां ग्रामीणों को अपनी जद में लिए हुए हैं।
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