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Kaushambi News: दोआबा में पकड़ी गई अफीम की खेती, तीन गिरफ्तार
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छह बिस्वा खेत में हो रही थी प्रतिबंधित पदार्थ की खेती
एनसीबी का दावा, प्रोसेसिंग के बाद 10 करोड़ की बनती हेरोइन
संवाद न्यूज एजेंसी
मंझनपुर। कौशाम्बी पुलिस ने शुक्रवार को एक बड़ी कामयाबी हासिल की। पुलिस ने छह बिस्वा खेत में अफीम की पैदावार पकड़ी। अफीम की खेती करने वाले तीन लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। मौके पर पहुंची लखनऊ की नारकोटिक्स विभाग की टीम ने बरामद अफीम को प्रोसेसिंग के बाद हेरोइन में तब्दील कर 10 करोड़ रुपये में बेचे जाने का अनुमान लगाया है।
एसपी बृजेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि महेवाघाट कोतवाली पुलिस बृहस्पतिवार शाम भगतपुरवा से रानीपुर की तरफ गश्त कर रही थी। इस दौरान रानीपुर गांव का दिनेश कुमार को पकड़ा गया। दिनेश के पास से साढ़े चार किलो अफीम के हरे फल (डोडा) बरामद हुए। दिनेश ने बताया कि वह सरसों के खेत में अफीम की खेती करता है। दिनेश के साथ पुलिस टीम मौके पर पहुंची तो छह बिस्वा खेत में अफीम की खेती मिली। फल पककर तैयार हो चुके थे। पूछताछ में दिनेश ने गांव के प्रदीप सिंह व अभिमन्यु सिंह का नाम कुबूला। बताया कि वह लोग भी अफीम की खेती करते हैं। पुलिस ने प्रकाश में आए प्रदीप व अभिमन्यु के खेत में दबिश दी तो वहां भी अफीम की फसल मिली। मामले की सूचना एनसीबी लखनऊ को दी गई। मौके पर पहुंचे एनसीबी के इंस्पेक्टर सुरेंद्र सिंह ने बताया कि खेत में मिली अफीम करीब 80 से 90 किलो थी। प्रोसेसिंग के बाद 10 से 12 किलो हेरोइन निकलती, जिसकी अनुमानित कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में 10 से 12 करोड़ होती। मामले में पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर चालान कर दिया।
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सवालों के घेरे में आई आबकारी टीम
मंझनपुर। जिले में अफीम की खेती हो रही थी और इसकी भनक आबकारी विभाग को नहीं थी? आबकारी विभाग के अफसर इस मामले में कुछ बोलने से कतराते रहे। जिला आबकारी अधिकारी राजेंद्र वर्मा से बात की गई तो उन्हें ऐसी किसी कार्रवाई से ही इनकार कर दिया। बाद में उन्होंने मंझनपुर सर्किल के इंस्पेक्टर से स्पष्टीकरण मांगा। इंस्पेक्टर ने कहा कि मामला संज्ञान में नहीं था। जानकारी होती तो उनके विभाग की टीम कार्रवाई करती।
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प्रशासन की टीम ने नष्ट कराई फसल
मंझनपुर। पुलिस ने अफीम की खेती पकड़ने के बाद मामले की जानकारी राजस्व विभाग को दी। सूचना पर तहसीलदार मंझनपुर भोपाल सिंह मौके पर पहुंचे। उन्होंने अपनी मौजूदगी में पुलिस व एनसीबी की टीम के साथ अफीम की खेती को नष्ट कराया।
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अफीम के फल से निकाली जाती है हेरोइन
मंझनपुर। पुलिस के हत्थे चढ़े अफीम की खेती करने वाले दिनेश कुमार ने बताया कि उन्हें पता चला था कि वाराणसी व गाजीपुर में प्रोसेसिंग के बाद हेरोइन निकाली जाती है। इसके लिए उसने अपने पड़ोसी दोस्त प्रदीप और अभिमन्यु के साथ मिलकर अफीम की खेती की। दिनेश ने बताया कि उसने अपने सरसों के खेत में चार बिस्वा में अफीम लगाई। प्रदीप व अभिमन्यु ने भी करीब दो बिस्वा खेत में अफीम लगाई थी। बृहस्पतिवार को वह अफीम का डोडा लेकर वाराणसी के लिए निकला था। दिनेश के मुताबिक कम लागत में मोटी कमाई के लालच उसने खुद के साथ ही गांव के अन्य लोगों लोगों को भी अवैध कारोबार में शामिल किया।
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एनसीबी का दावा, प्रोसेसिंग के बाद 10 करोड़ की बनती हेरोइन
संवाद न्यूज एजेंसी
मंझनपुर। कौशाम्बी पुलिस ने शुक्रवार को एक बड़ी कामयाबी हासिल की। पुलिस ने छह बिस्वा खेत में अफीम की पैदावार पकड़ी। अफीम की खेती करने वाले तीन लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। मौके पर पहुंची लखनऊ की नारकोटिक्स विभाग की टीम ने बरामद अफीम को प्रोसेसिंग के बाद हेरोइन में तब्दील कर 10 करोड़ रुपये में बेचे जाने का अनुमान लगाया है।
एसपी बृजेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि महेवाघाट कोतवाली पुलिस बृहस्पतिवार शाम भगतपुरवा से रानीपुर की तरफ गश्त कर रही थी। इस दौरान रानीपुर गांव का दिनेश कुमार को पकड़ा गया। दिनेश के पास से साढ़े चार किलो अफीम के हरे फल (डोडा) बरामद हुए। दिनेश ने बताया कि वह सरसों के खेत में अफीम की खेती करता है। दिनेश के साथ पुलिस टीम मौके पर पहुंची तो छह बिस्वा खेत में अफीम की खेती मिली। फल पककर तैयार हो चुके थे। पूछताछ में दिनेश ने गांव के प्रदीप सिंह व अभिमन्यु सिंह का नाम कुबूला। बताया कि वह लोग भी अफीम की खेती करते हैं। पुलिस ने प्रकाश में आए प्रदीप व अभिमन्यु के खेत में दबिश दी तो वहां भी अफीम की फसल मिली। मामले की सूचना एनसीबी लखनऊ को दी गई। मौके पर पहुंचे एनसीबी के इंस्पेक्टर सुरेंद्र सिंह ने बताया कि खेत में मिली अफीम करीब 80 से 90 किलो थी। प्रोसेसिंग के बाद 10 से 12 किलो हेरोइन निकलती, जिसकी अनुमानित कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में 10 से 12 करोड़ होती। मामले में पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर चालान कर दिया।
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सवालों के घेरे में आई आबकारी टीम
मंझनपुर। जिले में अफीम की खेती हो रही थी और इसकी भनक आबकारी विभाग को नहीं थी? आबकारी विभाग के अफसर इस मामले में कुछ बोलने से कतराते रहे। जिला आबकारी अधिकारी राजेंद्र वर्मा से बात की गई तो उन्हें ऐसी किसी कार्रवाई से ही इनकार कर दिया। बाद में उन्होंने मंझनपुर सर्किल के इंस्पेक्टर से स्पष्टीकरण मांगा। इंस्पेक्टर ने कहा कि मामला संज्ञान में नहीं था। जानकारी होती तो उनके विभाग की टीम कार्रवाई करती।
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प्रशासन की टीम ने नष्ट कराई फसल
मंझनपुर। पुलिस ने अफीम की खेती पकड़ने के बाद मामले की जानकारी राजस्व विभाग को दी। सूचना पर तहसीलदार मंझनपुर भोपाल सिंह मौके पर पहुंचे। उन्होंने अपनी मौजूदगी में पुलिस व एनसीबी की टीम के साथ अफीम की खेती को नष्ट कराया।
अफीम के फल से निकाली जाती है हेरोइन
मंझनपुर। पुलिस के हत्थे चढ़े अफीम की खेती करने वाले दिनेश कुमार ने बताया कि उन्हें पता चला था कि वाराणसी व गाजीपुर में प्रोसेसिंग के बाद हेरोइन निकाली जाती है। इसके लिए उसने अपने पड़ोसी दोस्त प्रदीप और अभिमन्यु के साथ मिलकर अफीम की खेती की। दिनेश ने बताया कि उसने अपने सरसों के खेत में चार बिस्वा में अफीम लगाई। प्रदीप व अभिमन्यु ने भी करीब दो बिस्वा खेत में अफीम लगाई थी। बृहस्पतिवार को वह अफीम का डोडा लेकर वाराणसी के लिए निकला था। दिनेश के मुताबिक कम लागत में मोटी कमाई के लालच उसने खुद के साथ ही गांव के अन्य लोगों लोगों को भी अवैध कारोबार में शामिल किया।