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गांवों को ओडीएफ बनाने के लिए उतरेंगी 36 टीमें
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Mon, 01 Aug 2016 12:36 AM IST
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दोआबा की 450 ग्राम सभाओं को पूर्ण रूप से ओडीएफ करने के लिए आज से 180 मास्टर ट्रेनरों की 36 टीमें गांव में उतरेंगी। यह टीमें दो अक्टूबर तक एक-एक गांव को पूर्ण ओडीएफ बनाने का काम करेंगी। यह संकल्प रविवार को सीएलटीएस के 120 मास्टर ट्रेनरों के प्रशिक्षण समापन के मौके पर डीएम अखंड प्रताप सिंह ने दिलाया।
498 ग्राम सभाओं वाले दोआबा को ओडीएफ यानि खुले में शौच से मुक्त बनाने के लिए अभी तक 60 मास्टर ट्रेनरों की टीम काम कर रही थी। मास्टर ट्रेनरों की संख्या कम होने के कारण अब तक महज 48 गांव ही ओडीएफ घोषित सके। नवागत डीपीआरओ ने कमल किशोर ने कार्यभार संभाला तो ओडीएफ में लगे कर्मचारियों की संख्या पर्याप्त नहीं मिली। उन्होंने डीएम से वार्ता कर 120 नए मास्टर ट्रेनरों का प्रशिक्षण 27 जुलाई से शुरू कराया। पांच दिवसीय प्रशिक्षण रविवार को पूरा हो गया।
समापन के मौके पर पहुंचे डीएम अखंड प्रताप सिंह ने नव प्रशिक्षित और पुराने मास्टर ट्रेनरों को 36 टीमों में विभाजित किया और संकल्प दिलाया कि हर हाल में दो अक्टूबर 2016 तक दोआबा पूर्ण ओडीएफ हो जाना चाहिए। इसके लिए उन्होंने 450 गांवों की कार्ययोजना तैयार कराकर तिथिवार गांवों में रहने और ओडीएफ का बिगुल बजाने का फरमान जारी किया। इतना ही नहीं उन्होंने सफल क्रियान्वयन के लिए स्वास्थ्य विभाग में तैनात आशा, एएनएम, बाल विकास विभाग की आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों, बेसिक शिक्षा विभाग के सहायक अध्यापकों, पंचायत राज विभाग के सफाई कर्मी, ग्राम पंचायत सचिवों और प्रांतीय रक्षक दल के जवानों का सात सदस्यीय ग्रुप तैयार कराया है।
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इस मौके पर डीपीआरओ कमल किशोर ने कहा कि टीम के मास्टर ट्रेनरों को गांवों में रहकर अभियान को न केवल सफल बनाना है बल्कि लोगों के दिलो दिमाग में इस पहल को इतना भर देना है कि वह खुले में शौच की बात सपने में भी न सोच सकें। समापन के मौके पर मुख्य विकास अधिकारी डीके सिंह, उपनिदेशक पंचायत बीबी सिंह, जिला युवा कल्याण अधिकारी समेत कई बीडीओ और अन्य कर्मचारी मौजूद रहे।
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498 ग्राम सभाओं वाले दोआबा को ओडीएफ यानि खुले में शौच से मुक्त बनाने के लिए अभी तक 60 मास्टर ट्रेनरों की टीम काम कर रही थी। मास्टर ट्रेनरों की संख्या कम होने के कारण अब तक महज 48 गांव ही ओडीएफ घोषित सके। नवागत डीपीआरओ ने कमल किशोर ने कार्यभार संभाला तो ओडीएफ में लगे कर्मचारियों की संख्या पर्याप्त नहीं मिली। उन्होंने डीएम से वार्ता कर 120 नए मास्टर ट्रेनरों का प्रशिक्षण 27 जुलाई से शुरू कराया। पांच दिवसीय प्रशिक्षण रविवार को पूरा हो गया।
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समापन के मौके पर पहुंचे डीएम अखंड प्रताप सिंह ने नव प्रशिक्षित और पुराने मास्टर ट्रेनरों को 36 टीमों में विभाजित किया और संकल्प दिलाया कि हर हाल में दो अक्टूबर 2016 तक दोआबा पूर्ण ओडीएफ हो जाना चाहिए। इसके लिए उन्होंने 450 गांवों की कार्ययोजना तैयार कराकर तिथिवार गांवों में रहने और ओडीएफ का बिगुल बजाने का फरमान जारी किया। इतना ही नहीं उन्होंने सफल क्रियान्वयन के लिए स्वास्थ्य विभाग में तैनात आशा, एएनएम, बाल विकास विभाग की आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों, बेसिक शिक्षा विभाग के सहायक अध्यापकों, पंचायत राज विभाग के सफाई कर्मी, ग्राम पंचायत सचिवों और प्रांतीय रक्षक दल के जवानों का सात सदस्यीय ग्रुप तैयार कराया है।
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इस मौके पर डीपीआरओ कमल किशोर ने कहा कि टीम के मास्टर ट्रेनरों को गांवों में रहकर अभियान को न केवल सफल बनाना है बल्कि लोगों के दिलो दिमाग में इस पहल को इतना भर देना है कि वह खुले में शौच की बात सपने में भी न सोच सकें। समापन के मौके पर मुख्य विकास अधिकारी डीके सिंह, उपनिदेशक पंचायत बीबी सिंह, जिला युवा कल्याण अधिकारी समेत कई बीडीओ और अन्य कर्मचारी मौजूद रहे।