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Kaushambi News: पोषण ट्रैकर एप में तकनीकी खामी से नहीं हो रहा सत्यापन
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आंगनबाड़ी केंद्रों पर टेक होम राशन (टीएचआर) वितरण का कार्य इन दिनों प्रभावित है। पोषण ट्रैकर एप के अपडेट होने के कारण लाभार्थियों का सत्यापन नहीं हो पा रहा है। जिससे आंगनबाड़ी कार्यकर्ता परेशान हैं। 12 मार्च को एप अपडेट होने के बाद यह समस्या और बढ़ गई है। लाभार्थियों का फेस रिकग्निशन सिस्टम (एफआरएस) से सत्यापन करने में दिक्कत आ रही है।
जिले में 1775 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। यहां से गर्भवती महिलाओं, बच्चों और किशोरियों को सूखा राशन (पुष्टाहार) दिया जाता है। यह पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन है और पोषण ट्रैकर एप के माध्यम से ही वितरण दर्ज किया जाता है। इसके लिए लाभार्थी को एप के कैमरे के सामने आकर सत्यापन कराना होता है, जिसके बाद ही वितरण की प्रक्रिया पूरी होती है।
विभाग ने 12 मार्च को एप को अपडेट किया गया है। पहले भी सत्यापन में समस्या आती थी, लेकिन अपडेट के बाद चेहरे का सत्यापन बिल्कुल नहीं हो पा रहा है। स्क्रीन पर ‘डाटा नॉट अवेलेबल फॉर फेस मैच’ दिखाई दे रहा। ऐसे में लाभार्थियों के पुष्टाहार की एप पर फीडिंग नहीं हो पा रही है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि लाभार्थियों का दबाव और विभागीय अधिकारियों की सख्ती के बीच वह असमंजस की स्थिति में हैं।
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पोषण ट्रैकर एप अपडेट किया गया है, जिसकी वजह से तकनीकी समस्या आ सकती है। इसकी जानकारी मुख्यालय को भेजी जाएगी। जल्द ही समस्या का समाधान कराया जाएगा। - रामेश्वर पाल, जिला कार्यक्रम अधिकारी।
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जिले में 1775 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। यहां से गर्भवती महिलाओं, बच्चों और किशोरियों को सूखा राशन (पुष्टाहार) दिया जाता है। यह पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन है और पोषण ट्रैकर एप के माध्यम से ही वितरण दर्ज किया जाता है। इसके लिए लाभार्थी को एप के कैमरे के सामने आकर सत्यापन कराना होता है, जिसके बाद ही वितरण की प्रक्रिया पूरी होती है।
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विभाग ने 12 मार्च को एप को अपडेट किया गया है। पहले भी सत्यापन में समस्या आती थी, लेकिन अपडेट के बाद चेहरे का सत्यापन बिल्कुल नहीं हो पा रहा है। स्क्रीन पर ‘डाटा नॉट अवेलेबल फॉर फेस मैच’ दिखाई दे रहा। ऐसे में लाभार्थियों के पुष्टाहार की एप पर फीडिंग नहीं हो पा रही है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि लाभार्थियों का दबाव और विभागीय अधिकारियों की सख्ती के बीच वह असमंजस की स्थिति में हैं।
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पोषण ट्रैकर एप अपडेट किया गया है, जिसकी वजह से तकनीकी समस्या आ सकती है। इसकी जानकारी मुख्यालय को भेजी जाएगी। जल्द ही समस्या का समाधान कराया जाएगा। - रामेश्वर पाल, जिला कार्यक्रम अधिकारी।