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कैनाल में नहीं है पानी
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no water in canal
- फोटो : KAUSHAMBI
फतेहपुर जिले के किशुनपुर से निकले पंप कैनाल पर दबंग किसानों ने कब्जा कर रखा है। किसानों ने जगह-जगह या तो नहर में बांध बना दिया या फिर उसे काट दिया। इसकी वजह से किशुनपुर पंप कैनाल से जुड़ी 28 माइनर व छह रजबहों में पानी नहीं पहुंच पा रहा है। ऐसे में धान का कटोरा कहे जाने वाले पश्चिमशरीरा इलाके के किसान परेशान हैं। किसानों के सामने फसल बचाने के लिए सिर्फ निजी नलकूप का सहारा बचा है।
किशुनपुर पंप कैनाल से निकली नहर जिले के 76.8 किलोमीटर के दायरे में फैली है। मुख्य नहर से 28 माइनर (छोटी नहर) व छह रजबहेे निकले हैं। इन सबके जरिए जिले की तकरीबन 16,200 हेक्टेयर क्षेत्रफल में सिंचाई की जाती है। माइनर व रजबहों के क्षेत्रफल को जोड़कर देखा जाए तो 264 किलो मीटर के दायरे में पानी जाना चाहिए। पर, जिले की सीमा में ही प्रवेश करने के बाद असरदार किसान बड़ी नहर के पानी पर कब्जा कर लेते हैं। अजरौली, लौगांवा, डकशरीरा, कोरीपुर और अंदावा गांव के समीप बड़ी नहर को जगह-जगह से काट दिया गया है। इसकी वजह से छोटी माइनर में पानी नहीं पहुंच पाता। अगर पानी है भी तो वह दो से तीन फिट है। जिसकी वजह से किसानों के खेत में लगी बांबी से पानी नाली के जरिए खेत में नहीं पहुंचता है।
नहर के समीप जिन किसानों का खेत है वह तो पनचक्की लगाकर खेत की सिंचाई कर लेते हैं, लेकिन जिनका खेत नहर से दूर है, उन्हें मजबूरी में निजी सबमर्सिबल का सहारा लेना पड़ता है। सबसे खराब स्थिति पश्चिमशरीरा इलाके की है। इस क्षेत्र को धान का कटोरा कहा गया है। नहरी क्षेत्र से घिरा होने के कारण यहां के किसान तीन फसल आसानी से ले लेते हैं। लेकिन इन दिनों क्षेत्र के माइनर चांदेराई, अमीना, गोराजू व बेरौंचा आदि में पानी नहीं है। इसकी वजह से यहां के किसान धान की फसल बचाने के लिए परेशान है। बरसात भी अपेक्षाकृत काफी कम हुई है।
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किशुनपुर पंप कैनाल से निकली नहर जिले के 76.8 किलोमीटर के दायरे में फैली है। मुख्य नहर से 28 माइनर (छोटी नहर) व छह रजबहेे निकले हैं। इन सबके जरिए जिले की तकरीबन 16,200 हेक्टेयर क्षेत्रफल में सिंचाई की जाती है। माइनर व रजबहों के क्षेत्रफल को जोड़कर देखा जाए तो 264 किलो मीटर के दायरे में पानी जाना चाहिए। पर, जिले की सीमा में ही प्रवेश करने के बाद असरदार किसान बड़ी नहर के पानी पर कब्जा कर लेते हैं। अजरौली, लौगांवा, डकशरीरा, कोरीपुर और अंदावा गांव के समीप बड़ी नहर को जगह-जगह से काट दिया गया है। इसकी वजह से छोटी माइनर में पानी नहीं पहुंच पाता। अगर पानी है भी तो वह दो से तीन फिट है। जिसकी वजह से किसानों के खेत में लगी बांबी से पानी नाली के जरिए खेत में नहीं पहुंचता है।
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नहर के समीप जिन किसानों का खेत है वह तो पनचक्की लगाकर खेत की सिंचाई कर लेते हैं, लेकिन जिनका खेत नहर से दूर है, उन्हें मजबूरी में निजी सबमर्सिबल का सहारा लेना पड़ता है। सबसे खराब स्थिति पश्चिमशरीरा इलाके की है। इस क्षेत्र को धान का कटोरा कहा गया है। नहरी क्षेत्र से घिरा होने के कारण यहां के किसान तीन फसल आसानी से ले लेते हैं। लेकिन इन दिनों क्षेत्र के माइनर चांदेराई, अमीना, गोराजू व बेरौंचा आदि में पानी नहीं है। इसकी वजह से यहां के किसान धान की फसल बचाने के लिए परेशान है। बरसात भी अपेक्षाकृत काफी कम हुई है।
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