फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kaushambi News ›   no good arrangment in hospital

संसाधन अपार, व्यवस्था लाचार, मरीजों की भरमार

Fri, 12 Apr 2019 12:27 AM IST
shailendra Kumar अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी Published by: shailendra Kumar Updated Fri, 12 Apr 2019 12:27 AM IST
विज्ञापन
no good arrangment in hospital
hospital
एक रुपया का पर्चा और जांच, दवा सब मुफ्त। यह दावा 18 करोड़ की आबादी वाले कौशाम्बी जिला के संयुक्त जिला चिकित्सालय का है। सरकार ने अपने दावे के मुताबिक यहां संसाधनों की भरमार कर दी। सीटी स्कैन और डायलिसिस जैसी महंगी यूनिट तो लगी लेकिन स्टाफ की कमी के कारण उसका सही तरीके से संचालन नहीं हो पा रहा है। नतीजतन जिले भर के मरीज यहां सस्ता और सुलभ इलाज की आस लगाकर तो आते हैं लेकिन हाथ सिर्फ मायूसी लग रही है। ये हाल कौशाम्बी जिले के एक मात्र ऐसे आधुनिक अस्पताल का है जहां पर अमीर और गरीब सभी वर्ग के मरीज इलाज कराने के लिए आते हैं। अस्पताल की सेवाएं वेटिंलेटर (आउट सोर्सिंग) के जरिए सही तरीके से संचालन का दावा किया जा रहा है। एक तरह से देखा जाए तो स्वास्थ्य सेवाएं यहां बेपटरी हैं। पर, अफसोस लोकसभा चुनाव में इतनी बड़ी समस्या को हल कराने के लिए कोई राजनैतिक दल इसे मुद्दा नहीं बना रहा है। पेश है आदर्श श्रीवास्तव की रिपोर्ट----
विज्ञापन


पुरुष चिकित्सक से इलाज कराने को मजबूर हैं महिला मरीज
मंझनपुर। जिला अस्पताल में महिला चिकित्सक के पांच पद हैं। इसके सापेक्ष यहां दो चिकित्सकों की तैनाती है। जिसमें एक चिकित्सक डॉ. अखिलेश है। ऐसे में यहां इलाज के लिए आने वाली महिलाओं को न चाहते हुए भी पुरुष चिकित्सक से इलाज कराना पड़ता है। डॉ. अखिलेश ही यहां प्रसव के लिए भर्ती होने वाली महिलाओं का ऑपरेशन तक करते हैं। एक महिला चिकित्सक डॉ. रेखा हैं। उनके पास पुलिस मेडिकोलीगल के काफी मामले रहते हैं। इसलिए वह बहुत कम ही महिलाओं का इलाज कर पाती हैं।
विज्ञापन



मंझनपुर। जिला अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट के दो पद हैं। यहां पर एक्स-रे, डिजिटल एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड की सुविधा है। इसके बाद भी यहां पर एक मात्र रेडियोलॉजिस्ट डॉ. सौभाग्य प्रकाश की तैनाती है। पड़ोसी जनपद फतेहपुर और चित्रकूट जिले में एक भी रेडियोलॉजिस्ट नहीं होने की वजह से वहां के मरीज भी यहां आते हैं। सबसे ज्यादा फजीहत पुलिस मेडिकोलीगल के मामले में होती है। घायलों को मेडिकल के लिए कई दिनों तक इंतजार करना पड़ता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

   
आर्थिक और शैक्षिक नजरिए से पिछड़े कौशाम्बी जिले में आयुष्मान भारत योजना के तहत एक लाख से ज्यादा परिवारों को गोल्डेन कार्ड की सुविधा मिली है। गरीब लोग जिला अस्पताल कार्ड लेकर इलाज के लिए आते तो हैं लेकिन सुविधा के नाम पर आम मरीजों की तरफ ही एक रुपये में मुफ्त जांच व दवा मिल रही है। इसके चलते कार्ड धारक परिवार योजना से जुड़े निजी अस्पताल में चले जाते हैं। जिला अस्पताल के आंकडों की मानें तो आयुष्मान योजना से जुड़े लाभार्थियों की संख्या महीने में सौ के करीब होती है। बाकी की सेवाएं मुफ्त हैं जरुरत पर जन औषधि केंद्र से दवा व ईसीजी की जांच भी मुफ्त में करा दी जाती है।


जिला अस्पताल में स्टाफ की खासी कमी है। यहां की स्वास्थ्य सेवाओं की गाड़ी संविदा और आउट सोर्सिग कर्मियों के भरोसे खींची जा रही है। डिजिटल एक्स-रे, सीटी स्कैन जैसी महत्वपूर्ण सेवाओं के संचालन का जिम्मा आउट सोर्सिंग कर्मचारियों के भरोसे है।

 जिला अस्पताल परिसर में ही महिला अस्पताल का भवन बनकर काफी समय से तैयार है। सौ बेड वाले इस अस्पताल में जच्चा-बच्चा की स्वास्थ्य सेवाओं की सारी सुविधाओं का ख्याल रखा गया है। पिछले दिनों इस अस्पताल के संचालन के लिए 25 स्टाफ नर्सो की तैनाती भी की गई है। यहां 18 महिला चिकित्सकों को तैनात किया जाना है। अभी तक शासन से एक भी महिला चिकित्सक की तैनाती नहीं हो सकी है।  जिला अस्पताल में काम करने वाले ज्यादातर चिकित्सकों ने प्रयागराज में निवास बना रखा है। आठ बजे की ओपीडी का भले ही वक्त हो, लेकिन चिकित्सक दस के पहले नहीं आ पाते हैं। इसके अलावा चिकित्सकों का बहाना अक्सर प्रयागराज का जाम व गाड़ी का बिगड़ जाना होता है। इसकी वजह से यहां मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

 कौशाम्बी जिले  की सीमा से सटा फतेहपुर का धाता और चित्रकूट जिले का राजापुर इलाका आता है। इन स्थानों के मरीजों को मंझनपुर के जिला अस्पताल आने के लिए जहां 15 से 25 किलोमीटर की दूरी तय करनी होती है वहीं खुद के जिले के जिला अस्पताल में जाने के लिए 40 से 50 किलोमीटर का सफर करना पड़ता है। ऐसे में कौशाम्बी के जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या ज्यादा हो जाती है। रोजाना यहां औसत नौ सौ से एक हजार के बीच नए मरीजों की संख्या होती है। जबकि पांच सौ ऐसे मरीज परामर्श के लिए आते हैं जो पहले इलाज करा चुके होते हैं।  

 जिला अस्पताल में फिजीशियन के तीन पोस्ट हैं। इसमें से एक फिजिशियन डॉ. सुरभि को डायलिसिस करने के लिए लगाया गया है। सीएमएस का कहना है कि डॉ. सुरभि को डायलिसिस करने की ट्रेनिंग के लिए भेजा गया था। उन्हीं से मरीजों का डायलिसिस कराया जा रहा है।


जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. दीपक सेठ का कहना है कि यहां सर्जन के दो, अस्थि रोग के तीन, दांत और आंख के एक-एक चिकित्सक की तैनाती है। मरीज ज्यादा होने  की वजह से दिक्कत होती है। इसके अलावा स्टाफ के अवकाश पर जाने से ही समस्या आ जाती है। चिकित्सकों की कमी के लिए शासन को पत्र भेजा गया है। महिला के पांच चिकित्सकों के सापेक्ष महज दो डॉक्टर पोस्ट हैं। रेडियोलॉजिस्ट के पास तीन जिले का काम है। हर जगह स्टाफ की कमी है, जिसकी भरपाई संविदा व आउट सोर्सिंग कर्मियों से की जा रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed