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छोटे दरोगा फिर करेंगे मुंशीगिरी
मनोज दूबे/अमर उजाला कौशाम्बी
Updated Tue, 07 Apr 2015 12:05 AM IST
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मंझनपुर। सिपाही से प्रमोशन पाकर सीधे सहायक उपनिरीक्षक बने कौशाम्बी के 159 पुलिसकर्मी अब फिर से मुंशीगीरी करेंगे। हेडकांस्टेबल का प्रमोशन पाकर प्रशिक्षण को भेजे गए सिपाहियों को इस दौरान सीधे एएसआई बना दिया गया था। पर, सीधे पदोन्नति का विरोध होने और कार्यों की समीक्षा में खरा नहीं उतरने पर शासन ने सभी प्रोन्नत प्राप्त सहायक उपनिरीक्षकों को उनके मूलपद पर वापस कर दिया है। शासन के इस फरमान से महकमे में हड़कंप मचा हुआ है।
पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नत बोर्ड ने सन 1981 बैच तक के सिपाहियों को मुख्य आरक्षी बनाने के लिए छह महीने पहले जिलों से सूची मांगी थी। तब करीब 20 हजार पुलिस कर्मियों की सूची पुलिस भर्ती बोर्ड को भेजी गई थी। इनमें कौशाम्बी जिले के भी 159 सिपाही शामिल थे। दो महीने मुख्य आरक्षी का प्रशिक्षण के बाद शासन ने मुख्य आरक्षी प्रोन्नत वेतनमान के तहत इन सिपाहियों को सहायक उपनिरीक्षक पद पर समायोजित करने का फरमान जारी कर दिया। हालांकि इसका कोई लिखित शासनादेश जारी नहीं किया गया था।
उधर, दो महीने का अतिरिक्त प्रशिक्षण के बाद सिपाही मुख्य आरक्षी के बदले सीधे दारोगा बाबू बनकर लौटे, तो इसका वरिष्ठ मुख्य आरक्षियों ने विरोध किया। विरोध होने पर शासन ने प्रमोशन पाए सिपाहियों के कार्यों की समीक्षा की। समीक्षा में खरे नहीं उतरने पर शासन के निर्देश पर पुलिस महानिदेशक ने प्रोन्नत सहायक उपनिरीक्षकों को उनके मूलपद पर भेजने का फरमान पुलिस अधीक्षक को जारी कर दिया। पुलिस अधीक्षक रतनकांत पांडेय ने बताया कि किसी पद पर पदोन्नति करने पर कार्यों की समीक्षा की जाती है। शासन और पुलिस भर्ती बोर्ड की शर्तो को पूरा नहीं करने पर प्रोन्नत सहायक उपनिरीक्षकों को उनके मूल पद पर भेज दिया गया है। दो साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद इन्हें पुन: प्रमोशन दे दिया जाएगा।
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पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नत बोर्ड से प्रशिक्षण प्राप्त कर दरोगा बने जिले के 159 पुलिसकर्मियों के मंसूबे पर पानी फिर गया है। एक स्टार और पुलिस फीता के बाद अचानक मूलपद पर भेजे जाने का फरमान आते ही सहायक उपनिरीक्षकों के होश उड़ गए। इन सिपाहियों में नाराजगी है कि यदि ऐसा ही करना था तो उन्हें पदोन्नति क्यों दी गई।
सिपाही बनने के बाद पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नत बोर्ड में एक रैंक तीन प्रमोशन का प्राविधान है। इसके तहत सिपाही के बाद पहला प्रमोशन हेड कांस्टेबल, दूसरा दरोगा और तीसरा इंस्पेक्टर का होता है। पदोन्नति से पहले सर्विस के दौरान किए गए कार्यों की समीक्षा भी की जाती है।
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पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नत बोर्ड ने सन 1981 बैच तक के सिपाहियों को मुख्य आरक्षी बनाने के लिए छह महीने पहले जिलों से सूची मांगी थी। तब करीब 20 हजार पुलिस कर्मियों की सूची पुलिस भर्ती बोर्ड को भेजी गई थी। इनमें कौशाम्बी जिले के भी 159 सिपाही शामिल थे। दो महीने मुख्य आरक्षी का प्रशिक्षण के बाद शासन ने मुख्य आरक्षी प्रोन्नत वेतनमान के तहत इन सिपाहियों को सहायक उपनिरीक्षक पद पर समायोजित करने का फरमान जारी कर दिया। हालांकि इसका कोई लिखित शासनादेश जारी नहीं किया गया था।
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उधर, दो महीने का अतिरिक्त प्रशिक्षण के बाद सिपाही मुख्य आरक्षी के बदले सीधे दारोगा बाबू बनकर लौटे, तो इसका वरिष्ठ मुख्य आरक्षियों ने विरोध किया। विरोध होने पर शासन ने प्रमोशन पाए सिपाहियों के कार्यों की समीक्षा की। समीक्षा में खरे नहीं उतरने पर शासन के निर्देश पर पुलिस महानिदेशक ने प्रोन्नत सहायक उपनिरीक्षकों को उनके मूलपद पर भेजने का फरमान पुलिस अधीक्षक को जारी कर दिया। पुलिस अधीक्षक रतनकांत पांडेय ने बताया कि किसी पद पर पदोन्नति करने पर कार्यों की समीक्षा की जाती है। शासन और पुलिस भर्ती बोर्ड की शर्तो को पूरा नहीं करने पर प्रोन्नत सहायक उपनिरीक्षकों को उनके मूल पद पर भेज दिया गया है। दो साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद इन्हें पुन: प्रमोशन दे दिया जाएगा।
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पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नत बोर्ड से प्रशिक्षण प्राप्त कर दरोगा बने जिले के 159 पुलिसकर्मियों के मंसूबे पर पानी फिर गया है। एक स्टार और पुलिस फीता के बाद अचानक मूलपद पर भेजे जाने का फरमान आते ही सहायक उपनिरीक्षकों के होश उड़ गए। इन सिपाहियों में नाराजगी है कि यदि ऐसा ही करना था तो उन्हें पदोन्नति क्यों दी गई।
सिपाही बनने के बाद पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नत बोर्ड में एक रैंक तीन प्रमोशन का प्राविधान है। इसके तहत सिपाही के बाद पहला प्रमोशन हेड कांस्टेबल, दूसरा दरोगा और तीसरा इंस्पेक्टर का होता है। पदोन्नति से पहले सर्विस के दौरान किए गए कार्यों की समीक्षा भी की जाती है।