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दिहाड़ी के लिए भटक रहे 46 गांवों के मजदूर
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Sat, 13 Aug 2016 12:25 AM IST
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विकास खंड कौशाम्बी में 46 ग्राम सभाओं के मजदूरों की दिहाड़ी का भुगतान सालभर से नहीं हो रहा। इसे लेकर मजदूर दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। शिकायत के बावजूद ब्लॉक के जिम्मेदार मजदूरी भुगतान के लिए नहीं चेत रहे हैं। इसे लेकर मजदूरों और ग्राम प्रधानों में नाराजगी है।
विकास खंड कौशाम्बी में कुल 57 ग्राम सभाएं हैं। इनमें मोहिद्दीनपुर कोरांव, कोसम खिराज, कोसम इनाम, अवाना आलमपुर, बारा समेत कुल 46 ग्राम सभाओं के 78 मनरेगा मजदूरों की दिहाड़ी का भुगतान एक साल से नहीं हो सका है। वर्ष 2015-16 में मजदूरी करने के बाद जॉब कार्डधारक बकाए की रकम 12 लाख 46 हजार रुपया पाने के लिए पंचायत मित्र, ग्राम प्रधान, एपीओ और बीडीओ कार्यालय का चक्कर काट रहे हैं। भुगतान न होने से मजदूरों का बुरा हाल है।
अब उन्हें राह नहीं सूझ रही कि आखिर वह किसका दरवाजा खटखटाएं। उधर जिम्मेदार हैं कि पसीना बहाने वाले मजदूरों की दिहाड़ी को लेकर पूरी तरह से मौन हैं। ग्राम प्रधान मोहिद्दीनपुर रमेश गुप्ता, कायमपुर संजय पांडेय, कोसम इनाम शिवपूजन यादव, कोसम खिराज अशोक गौतम आदि का आरोप है कि मजदूरी भुगतान में सबसे बड़ा अड़ंगा एपीओ है। एपीओ की लापरवाही के चलते मस्टर रोल की फीडिंग नहीं हो सकी। इसके चलते मजदूरी का भुगतान नहीं हो पा रहा है। मामले में एपीओ पंकज कुमार का कहना है कि उन्हें पंचायतमित्रों ने जो मस्टर रोल उपलब्ध कराया था उसकी फीडिंग कर दी गई है। जिनका मस्टर रोल नहीं मिला वह कैसे फीड किया जा सकता है।
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मनरेगा से नाता तोड़ रहे जॉब कार्ड धारक
विकास खंड कौशाम्बी में तैनात एपीओ की मनमानी के चलते मजदूरों की मजदूरी का भुगतान रुका है। जिन मजदूरों को उनकी मेहनत का पैसा नहीं मिला उनका विश्वास मनरेगा से उठता जा रहा है। गांव-गांव उत्पन्न हो रही इस समस्या के चलते मनरेगा मजदूर अब धीरे-धीरे इससे नाता तोड़ने लगे हैं। गांव में मजदूरी करने की जगह वह नजदीकी कस्बा और शहर में काम करते देखे जा रहे हैं।
वर्ष 2015-16 के मजदूरों की मजदूरी नहीं मिली, इसकी जानकारी नहीं थी। मामले में एपीओ से बात की जाएगी। हर हाल में मजदूरों की मेहनत का पैसा उन्हें दिलाया जाएगा।
कमलेश कुमार, बीडीओ कौशाम्बी
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विकास खंड कौशाम्बी में कुल 57 ग्राम सभाएं हैं। इनमें मोहिद्दीनपुर कोरांव, कोसम खिराज, कोसम इनाम, अवाना आलमपुर, बारा समेत कुल 46 ग्राम सभाओं के 78 मनरेगा मजदूरों की दिहाड़ी का भुगतान एक साल से नहीं हो सका है। वर्ष 2015-16 में मजदूरी करने के बाद जॉब कार्डधारक बकाए की रकम 12 लाख 46 हजार रुपया पाने के लिए पंचायत मित्र, ग्राम प्रधान, एपीओ और बीडीओ कार्यालय का चक्कर काट रहे हैं। भुगतान न होने से मजदूरों का बुरा हाल है।
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अब उन्हें राह नहीं सूझ रही कि आखिर वह किसका दरवाजा खटखटाएं। उधर जिम्मेदार हैं कि पसीना बहाने वाले मजदूरों की दिहाड़ी को लेकर पूरी तरह से मौन हैं। ग्राम प्रधान मोहिद्दीनपुर रमेश गुप्ता, कायमपुर संजय पांडेय, कोसम इनाम शिवपूजन यादव, कोसम खिराज अशोक गौतम आदि का आरोप है कि मजदूरी भुगतान में सबसे बड़ा अड़ंगा एपीओ है। एपीओ की लापरवाही के चलते मस्टर रोल की फीडिंग नहीं हो सकी। इसके चलते मजदूरी का भुगतान नहीं हो पा रहा है। मामले में एपीओ पंकज कुमार का कहना है कि उन्हें पंचायतमित्रों ने जो मस्टर रोल उपलब्ध कराया था उसकी फीडिंग कर दी गई है। जिनका मस्टर रोल नहीं मिला वह कैसे फीड किया जा सकता है।
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मनरेगा से नाता तोड़ रहे जॉब कार्ड धारक
विकास खंड कौशाम्बी में तैनात एपीओ की मनमानी के चलते मजदूरों की मजदूरी का भुगतान रुका है। जिन मजदूरों को उनकी मेहनत का पैसा नहीं मिला उनका विश्वास मनरेगा से उठता जा रहा है। गांव-गांव उत्पन्न हो रही इस समस्या के चलते मनरेगा मजदूर अब धीरे-धीरे इससे नाता तोड़ने लगे हैं। गांव में मजदूरी करने की जगह वह नजदीकी कस्बा और शहर में काम करते देखे जा रहे हैं।
वर्ष 2015-16 के मजदूरों की मजदूरी नहीं मिली, इसकी जानकारी नहीं थी। मामले में एपीओ से बात की जाएगी। हर हाल में मजदूरों की मेहनत का पैसा उन्हें दिलाया जाएगा।
कमलेश कुमार, बीडीओ कौशाम्बी