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नम आंखों से दफन हुए ताजिए
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Mon, 02 Oct 2017 01:37 AM IST
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kaushambi
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दसवीं मुहर्रम का जुलूस रविवार को संपन्न हुआ। लोगों ने अकीदत के साथ नम आंखों से कर्बला में ताजिए के फूल दफन किए। करारी, भरवारी, महगांव, दारानगर, मुस्तफाबाद आदि गांवों में जुलूस निकाला गया। इस दौरान लोगों ने मातम कर इमाम हुसैन को याद किया।
करारी में दसवीं मुहर्रम का जुलूस अकीदत और एहतराम के साथ निकाला गया। सुबह होते ही अजादार इमाम बारगाहों में इकट्ठा होकर इमाम हुसैन का मातम कर शहादत पर आंसू बहा रहे थे। दोपहर दो बजे पहला ताजिया सद्र इमाम बारगाह से उठा। दूसरा ताजिया हुसैनिया शरीफाबाद से और तीसरा ताजिया अंसारगंज इमाम चौक से उठा। नवजवान मातम करते हुए कर्बला के मंजर को याद कर रो रहे थे। अलविदा या हुसैन, अलविदा या हुसैन की सदाओं ने माहौल को गमगीन बना दिया था। ताजिया कदीमी रास्तों से होते हुए कर्बला की तरफ चला।
जहां हमूद अहमद, जावेद रिजवी, मोहम्मद मेंहदी, जव्वाद हैदर, नैयर रिजवी, मकसूद अब्बास आदि ने मर्सिया पढ़ा- आज शब्बीर पा क्या आलमे तन्हाई है, जुल्म की चांद पा जहरा के घटा छाई है। मर्सिया पढ़ते अजादार कर्बला पहुंचे जहां आखिरी नौहा-शब्बीर बहुत ही प्यासे थे, एक बूंद नहीं पाया पानी। इस नौहे पर अजादारों ने मातम कर आंसू बहाए। इसके बाद अकीदतमंदों ने नम आंखों से ताजिया दफन किया। इसी तरह गढ़ी, मूरतगंज, कशिया पूर्व, दारानगर, मंझनपुर आदि जगहों पर अकीदत के साथ ताजिया दफन किया गया। इस दौरान कई जगहों पर छिटपुट घटनाएं हुईं। अधिकारियाें ने मौके पर पहुंचकर मामला शांत कराया और ताजिया को कर्बला तक पहुंचवाया।
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करारी में दसवीं मुहर्रम का जुलूस अकीदत और एहतराम के साथ निकाला गया। सुबह होते ही अजादार इमाम बारगाहों में इकट्ठा होकर इमाम हुसैन का मातम कर शहादत पर आंसू बहा रहे थे। दोपहर दो बजे पहला ताजिया सद्र इमाम बारगाह से उठा। दूसरा ताजिया हुसैनिया शरीफाबाद से और तीसरा ताजिया अंसारगंज इमाम चौक से उठा। नवजवान मातम करते हुए कर्बला के मंजर को याद कर रो रहे थे। अलविदा या हुसैन, अलविदा या हुसैन की सदाओं ने माहौल को गमगीन बना दिया था। ताजिया कदीमी रास्तों से होते हुए कर्बला की तरफ चला।
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जहां हमूद अहमद, जावेद रिजवी, मोहम्मद मेंहदी, जव्वाद हैदर, नैयर रिजवी, मकसूद अब्बास आदि ने मर्सिया पढ़ा- आज शब्बीर पा क्या आलमे तन्हाई है, जुल्म की चांद पा जहरा के घटा छाई है। मर्सिया पढ़ते अजादार कर्बला पहुंचे जहां आखिरी नौहा-शब्बीर बहुत ही प्यासे थे, एक बूंद नहीं पाया पानी। इस नौहे पर अजादारों ने मातम कर आंसू बहाए। इसके बाद अकीदतमंदों ने नम आंखों से ताजिया दफन किया। इसी तरह गढ़ी, मूरतगंज, कशिया पूर्व, दारानगर, मंझनपुर आदि जगहों पर अकीदत के साथ ताजिया दफन किया गया। इस दौरान कई जगहों पर छिटपुट घटनाएं हुईं। अधिकारियाें ने मौके पर पहुंचकर मामला शांत कराया और ताजिया को कर्बला तक पहुंचवाया।
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