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कौशाम्बी : सात घंटे जीवनदायिनी एंबुलेंस में तड़पे जहर के शिकार मां-बेटे

Thu, 05 Aug 2021 12:57 AM IST
इलाहाबाद ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, कौशाम्बी
अमर उजाला नेटवर्क, कौशाम्बी Published by: इलाहाबाद ब्यूरो Updated Thu, 05 Aug 2021 12:57 AM IST
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Mother and son tormented in a life-giving ambulance for seven hours
Mother and son tormented in a life-giving ambulance for seven hours - फोटो : KAUSHAMBI
जीवनदायिनी एंबुलेंस कर्मियों की हड़ताल समाप्त होने के बाद अप्रशिक्षित स्टाफ की तैनात जानलेवा बन रही है। बुधवार को भी एंबुलेंस देरे से पहुंचने के कारण एंबुलेंस में सात घंटे तक तड़पकर मां बेटे की मौत हो गई। सरायअकिल के चक पिनहा गांव में मंगलवार रात जहरीला खाना खाने से बीमार हुए मां-बेटे को सरकारी एंबुलेंस सेवा ने जिला अस्पताल पहुंचाने में करीब सात घंटे का वक्त लगा दिया।
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हालत यह रही कि रात 11 बजे से एंबुलेंस में सवार मां-बेटे बुधवार सुबह 6.37 बजे जिला अस्पताल पहुंचे। इस दौरान सभी की सांसें थम चुकी थी।
चक पिनहा गांव निवासी सामूहिक जहरखुरानी का शिकार कंधई लाल के पड़ोसी नन्हई और सुनीता पत्नी पटवारी बताती हैं कि रात करीब 11 बजे कंधई ने बाहर निकल कर बताया कि उसकी मां शिवकली को उल्टी-दस्त हो रही है। इस पर सभी लोग भाग कर गांव के एक चिकित्सक के पास गए।

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चिकित्सक आया और बताया कि एंबुलेंस से इन्हें अस्पताल ले जाओ। इसके बाद यूपी 112 व 108 एंबुलेंस सेवा को फोन किया गया। एंबुलेंस पहुंचती, इससे पहले शिवकली की मौत हो चुकी थी। करीब दो घंटे बाद एंबुलेंस पहुंची। इस दौरान ग्राम प्रधान महफूज पहुंचे और सभी बीमारों को एंबुलेंस से इलाज के लिए सीएचसी सरायअकिल पहुंचाया गया। यहां चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के बाद सभी की हालत नाजुक बताते हुए जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया।

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भोर करीब तीन बजे एंबुलेंस कंधई लाल, सीमा, डीएम और सरिता को लेकर जिला अस्पताल रवाना हुई। इस बीच करारी के पास एंबुलेंस खराब हो गई। इस पर साथ रहे मोहल्ले के लोग परेशान हो उठे। उन्होंने निजी अस्पतालों में इलाज कराना चाहा, लेकिन किसी ने बीमार लोगों को भर्ती नहीं किया।


वहां से फिर 108 सेवा को फोन किया गया। इसके करीब एक घंटा बाद जिला अस्पताल से फिर दूसरी एंबुलेंस पहुंची। एंबुलेंस सभी मरीजों को इलाज के लिए भोर 6.37 बजे जिला अस्पताल आई। यहां इमरजेंसी मेडिकल अफसर रहे डॉ. पंकज तिवारी ने सीमा और उसके बेटे डीएम को मृत घोषित कर दिया। कंधई और उसके भयाहू की हालत नाजुक होने पर प्रयागराज रेफर किया गया है।


एंबुलेंसकर्मियों की हड़ताल का दिखा असर
जीवनदायिनी एंबुलेंस सेवा प्रयागराज मंडल के अध्यक्ष रमेश कुमार का कहना है कि जब तक उनकी मांग पूरी नहीं होती वह हड़ताल पर ही रहेगी। जिले में 108 एंबुलेंस 22, 102 एंबुलेंस 28 और एएलएक्स थ्री हैं। रोजाना 102 एंबुलेंस से करीब तीन सौ मरीज, 108 से 80 से सौ मरीज और एएलएक्स से पांच मरीजों को इलाज के लिए सुरक्षित सरकारी अस्पताल लाया जाता था। अब सेवा प्रदाता कंपनी ने कर्मचारियों की मांग की अनदेखी की है, इस वजह से 23 जुलाई से सभी हड़ताल पर हैं। हालांकि, सरकार ने एंबुलेंस कर्मियों से चाबी लेकर अप्रशिक्षित लोगों को तैनाती दे दी है। इसी कारण परेशानी हो रही है।


बयान से बचते रहे अफसर
करीब सात घंटे तक कभी एंबुलेंस का इंतजार तो कभी एंबुलेंस में भटकने के बाद लापरवाही की जिम्मेदारी लेने से स्वास्थ्य विभाग के अफसर बचते रहे। जबकि, सीएम योगी का सख्त फरमान है कि अगर एंबुलेंस की दिक्कत से किसी की मौत हुई तो कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की जाए। जिले में तीन मौतों के सवाल पर जब सीएमओ कौशाम्बी डॉ. केसी राय से बात करने का प्रयास किया तो उन्होंने अपने अर्दली को फोन थमा दिया। अर्दली ने बताया कि साहब मीटिंग में है। डिप्टी सीएमओ डॉ. हिंदमणि प्रकाश से बात की जा सकती है। जब डिप्टी सीएमओ से बात क गई तो उनका कहना था कि एंबुलेंस सेवा के नोडल अफसर वह नहीं है। फिलहाल किसी मौत के बारे में भी उन्हें जानकारी नहीं है।


जेठानी-देवरानी की खटपट पर देवर चला गया था परेदस
मंगलवार रात एक ही परिवार के मां बेटे समेत तीन लोगों की मौत और दो की हालत गंभीर होने के मामले में अब तक सिर्फ घरेलू कलह की बात सामने आई है। बताया जा रहा है कि एक साल पहले जब कंधई के भाई किशुन की शादी सरिता से हुई तभी से कलह होने लगी। आए दिन की किचकिच से परेशान होकर किशुन महाराष्ट्र के कल्यान शहर कमाने चला गया और इन दिनों वहीं पर है।


चकपिनहा निवासी कंधई और किशुन दो भाई हैं। दोनों भाई संयुक्त परिवार में रहते थे। 32 वर्षीय कंधई लाल की अपने छोटे भाई किशुन से अच्छी बनती थी। कंधई की शादी सीमा से हुई थी। शादी के बाद उसके तीन बच्चे डीएम, मोहिनी और मोहित हुए। कंधई और किशुन के साथ ही उनकी मां शिवकली भी रहती थी। किशुन की पिछले साल ही कंधई ने शादी सरिता से कराई थी।


सरिता के घर आने के बाद कुछ दिनों तक तो ठीक रहा, लेकिन बाद में कंधई की पत्नी सीमा और किशुन की पत्नी सरिता के बीच किसी न किसी बात को लेकर आए दिन खटपट होती थी। वजह यह भी रही कि कंधई ही परिवार का खर्च चलाता था। देवरानी-जेठानी के झगड़े पर विराम लगे, इसी वजह से किशुन कल्यान (महाराष्ट्र) कमाने चला गया। ग्रामीणों की चर्चाओं के अनुसार जाएं तो शिवकली, कंधई, सीमा, डीएम की हालत ज्यादा खराब थी, जबकि सरिता एकदम सामान्य थी। हालांकि, उसका कहना था कि उसने भी रोटी खाई थी।


भूखे पेट सो गए थे मोहिनी, मोहित, बची जान
मंझनपुर। प्रयागराज के अस्पताल में भर्ती कंधई लाल के दो बच्चों मोहित और मोहिनी का भूख से समझौता करना अच्छा साबित हुआ। दोनों बच्चे बिना खाना खाए सोए थे। इस वजह से दोनों की जान बच गई। हालांकि बच्चों को जब उनकी मां सीमा की मौत की जानकारी हुई तो उनके आंसू नहीं थम रहे थे। सीमा के मायके पक्ष से आए लोग बच्चों को दिलासा दे रहे थे, लेकिन इस कोशिश में वह भी अपने आंसू नहीं रोक पा रहे थे।


आटा, रोटी के सहारे जहर की होगी जांच : एसपी
एसपी राधेध्याम विश्कर्मा ने बताया कि गांव के प्रधान के बयान व अन्य लोगों से पता चला है कि घटना फूड प्वाइजनिंग की है। घटनास्थल पर मिली रोटी व आटे को जांच के लिए भेजा जा रहा है। मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।

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