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Kaushambi News: कौशाम्बी में जरूरत से ज्यादा दुग्ध , फिर भी उत्पादों में मिलावटखोरी
Mon, 18 Mar 2024 03:39 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Mon, 18 Mar 2024 03:39 AM IST
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मंझनपुर क्षेत्र स्थित एक डेयरी। संवाद
जिले में दूध की कम नहीं है। बल्कि, जितनी जरूरत है, उससे अधिक उत्पादन यहां के पशुपालक कर रहे हैं। बावजूद इसके शुद्ध दुग्ध उत्पादों का मिलना मुश्किल हो रहा है। कारण, जिले का करीब 70 फीसदी दूध बड़े-बड़े शहरों में चला जाता है। स्थानीय स्तर पर इसकी कमी को मिलावट करके पूरी की जा रही है।
जिले में पशुपालकों ने करीब 3,02,000 दुधारू पशु पाल रखे हैं। इनसे प्रतिदिन करीब छह लाख लीटर दुग्ध का उत्पादन होता है। इसमें से करीब चार लाख लीटर दूध जिले में संचालित चार मिल्क चीलिंग सेंटर प्रतिदिन खरीद लेते हैं। फिर इसे टैंकरों के माध्यम से प्रयागराज, कानपुर, लखनऊ, ग्वालियर समेत अन्य बड़े शहरों की नामी-गिरामी कंपनियों में पैकिंग के लिए भेज दिया जाता है। शेष बचा करीब दो लाख लीटर दूध ही जनपद वासियों के हिस्से आता है।
मंझनपुर, सिराथू और चायल तीनों तहसील क्षेत्रों में लगभग 180 निजी डेयरी व फुटकर विक्रेताओं के माध्यम से यह दूध लोगों के घर-घर पहुंचता है। चिकित्सकों का कहना है कि एक व्यक्ति को प्रतिदिन करीब 250 ग्राम दूध की आवश्यकता होती है। इस हिसाब से देखा जाए तो 19 लाख की आबादी वाले इस जनपद में प्रतिदिन करीब 4,75,000 लीटर दूध की खपत प्रतिदिन है। जबकि, उत्पादन इससे अधिक हो रहा है।
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गांव-गांव में बन रहा खोवा, कानपुर से भी होती आपूर्ति
मनौरी में चरवा रोड पर जिले की सबसे बड़ी खोवा मंडी है, जहां प्रतिदिन सैकड़ों व्यापारी आते हैं। इसके अलावा गांवों में भी लोग खाेवा बनाने लगे हैं। सरायअकिल, तिल्हापुर, नेवादा, चायल, जैतपुर पूरे हजारी समेत अन्य गई गांवों में बड़े पैमाने पर यह काम हो रहा है। तमाम व्यापारी कानपुर से भी खोवा मंगाते हैं। जिसमें मिलावट की आशंका ज्यादा रहती है। खोवा में सबसे ज्यादा शकरकंद और मैदा मिलाया जाता है। यह खोवा दो दिन में खराब भी हो जाता है।
18 से 24 मार्च तक होगी छापामारी
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन के आयुक्त की ओर से होली को देखते हुए एफएसडीए की टीम को अलर्ट कर दिया गया है। सहायक आयुक्त खाद्य शशिशेखर ने बताया कि 15 से 17 मार्च तक निरीक्षण कर मिलावटखोरी के बारे में जानकारी जुटाई जाएगी। इसके बाद 18 से लेकर 24 मार्च तक छापा मारा जाएगा। मिलावट करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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जिले में पशुपालकों ने करीब 3,02,000 दुधारू पशु पाल रखे हैं। इनसे प्रतिदिन करीब छह लाख लीटर दुग्ध का उत्पादन होता है। इसमें से करीब चार लाख लीटर दूध जिले में संचालित चार मिल्क चीलिंग सेंटर प्रतिदिन खरीद लेते हैं। फिर इसे टैंकरों के माध्यम से प्रयागराज, कानपुर, लखनऊ, ग्वालियर समेत अन्य बड़े शहरों की नामी-गिरामी कंपनियों में पैकिंग के लिए भेज दिया जाता है। शेष बचा करीब दो लाख लीटर दूध ही जनपद वासियों के हिस्से आता है।
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मंझनपुर, सिराथू और चायल तीनों तहसील क्षेत्रों में लगभग 180 निजी डेयरी व फुटकर विक्रेताओं के माध्यम से यह दूध लोगों के घर-घर पहुंचता है। चिकित्सकों का कहना है कि एक व्यक्ति को प्रतिदिन करीब 250 ग्राम दूध की आवश्यकता होती है। इस हिसाब से देखा जाए तो 19 लाख की आबादी वाले इस जनपद में प्रतिदिन करीब 4,75,000 लीटर दूध की खपत प्रतिदिन है। जबकि, उत्पादन इससे अधिक हो रहा है।
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गांव-गांव में बन रहा खोवा, कानपुर से भी होती आपूर्ति
मनौरी में चरवा रोड पर जिले की सबसे बड़ी खोवा मंडी है, जहां प्रतिदिन सैकड़ों व्यापारी आते हैं। इसके अलावा गांवों में भी लोग खाेवा बनाने लगे हैं। सरायअकिल, तिल्हापुर, नेवादा, चायल, जैतपुर पूरे हजारी समेत अन्य गई गांवों में बड़े पैमाने पर यह काम हो रहा है। तमाम व्यापारी कानपुर से भी खोवा मंगाते हैं। जिसमें मिलावट की आशंका ज्यादा रहती है। खोवा में सबसे ज्यादा शकरकंद और मैदा मिलाया जाता है। यह खोवा दो दिन में खराब भी हो जाता है।
18 से 24 मार्च तक होगी छापामारी
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन के आयुक्त की ओर से होली को देखते हुए एफएसडीए की टीम को अलर्ट कर दिया गया है। सहायक आयुक्त खाद्य शशिशेखर ने बताया कि 15 से 17 मार्च तक निरीक्षण कर मिलावटखोरी के बारे में जानकारी जुटाई जाएगी। इसके बाद 18 से लेकर 24 मार्च तक छापा मारा जाएगा। मिलावट करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।