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गृहलक्ष्मियों को उम्मीद घटेगा रसोई घर का बोझ
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Wed, 01 Feb 2017 12:28 AM IST
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आम बजट खुशियां लेकर आएगा या झटके देगा? इसको लेकर घर-घर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। गृहलक्ष्मियों को बड़ी उम्मीद है तो किसानों की भी सरकार से बड़ी आस जूड़ी है। क्या-क्या सस्ता होगा और क्या महंगा होने वाला है? इसको लेकर अभी से जोड़तोड़ शुरू है। दाल की कीमतें घटेंगे या उछाल आएगा, इस पर भी बहस जारी है। कृषि क्षेत्र में सुधार के लिए सरकार क्या कदम उठाने वाली है, यह जानने की भी किसानों में बेताबी है।
केंद्र सरकार बुधवार को आम बजट पेश करने जा रही है। आम बजट के साथ ही रेल बजट भी पास होगा। इसमें किसके लिए क्या है? यह जानने की उत्सुक्ता लोगों की बढ़ गई है। सबकी अपनी-अपनी उम्मीदें हैं। मंझनपुर की आकांक्षा केशरवानी कहती हैं महंगाई ने रसोई घर का बजट बिगाड़ कर रखा है। नोटबंदी से सब्जियों के दाम गिरे जरूर हैं, लेकिन मसाला और दाल आदि महंगी हो गई है। आकांक्षा का मानना है कि उन्हें लगता है बजट पेश होने के बाद महंगी हुई दाल आदि की कीमतों में गिरावट आएगी। प्राची गुप्ता का कहना है कि सरकार ने छोटी-छोटी खरीदारी पर भी कड़े नियम लागू कर दिए हैं। इससे जरूरत का सामान खरीदने पर भी लोगों को सोचना पड़ रहा है। महंगाई कम नहीं हो रही और नियम कड़े होते जा रहे हैं। खरीदारी में तमाम तरह के प्रतिबंधों से ढील मिलनी चाहिए। आम बजट से ऐसी ही उन्हें उम्मीद है।
किसान संजय शुक्ला का कहना है कि कृषि कार्य के लिए कर्ज आदि लेने में तमाम पापड़ बेलने पड़ते हैं। इसके अलावा सरकार की ओर से जो सुविधाएं मिलती हैं अथवा यंत्र वगैरह आते हैं, उनके वितरण में धांधली होती है। वाजिब लाभ पात्र को नहीं मिलता है। वह आशा करते हैं इसमें सुधार होगा। जरूरत को बिना किसी झंझट के लाभ मिले, ऐसा सरकार जरूर प्रयत्न करेगी। युवा किसान राजकुमार का कहना है कि नोटबंदी से किसान बर्बाद हो गया है। आलू में भारी घाटा हुआ है, सब्जियों के औने-पौने दाम मिल रहे हैं। बैंक से रुपया निकालने के लिए तमाम तरह के कानून बन गए हैं। कभी इसके पास जाओ तो कभी उसके पास। इन परिस्थितियों में सारा जोखिम किसान ही उठा रहा है। सरकार को चाहिए कि वह इन मामलों में किसानों को सहूलियत दे ताकि वह सुकून से अपना कृषि कार्य कर सकें।
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केंद्र सरकार बुधवार को आम बजट पेश करने जा रही है। आम बजट के साथ ही रेल बजट भी पास होगा। इसमें किसके लिए क्या है? यह जानने की उत्सुक्ता लोगों की बढ़ गई है। सबकी अपनी-अपनी उम्मीदें हैं। मंझनपुर की आकांक्षा केशरवानी कहती हैं महंगाई ने रसोई घर का बजट बिगाड़ कर रखा है। नोटबंदी से सब्जियों के दाम गिरे जरूर हैं, लेकिन मसाला और दाल आदि महंगी हो गई है। आकांक्षा का मानना है कि उन्हें लगता है बजट पेश होने के बाद महंगी हुई दाल आदि की कीमतों में गिरावट आएगी। प्राची गुप्ता का कहना है कि सरकार ने छोटी-छोटी खरीदारी पर भी कड़े नियम लागू कर दिए हैं। इससे जरूरत का सामान खरीदने पर भी लोगों को सोचना पड़ रहा है। महंगाई कम नहीं हो रही और नियम कड़े होते जा रहे हैं। खरीदारी में तमाम तरह के प्रतिबंधों से ढील मिलनी चाहिए। आम बजट से ऐसी ही उन्हें उम्मीद है।
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किसान संजय शुक्ला का कहना है कि कृषि कार्य के लिए कर्ज आदि लेने में तमाम पापड़ बेलने पड़ते हैं। इसके अलावा सरकार की ओर से जो सुविधाएं मिलती हैं अथवा यंत्र वगैरह आते हैं, उनके वितरण में धांधली होती है। वाजिब लाभ पात्र को नहीं मिलता है। वह आशा करते हैं इसमें सुधार होगा। जरूरत को बिना किसी झंझट के लाभ मिले, ऐसा सरकार जरूर प्रयत्न करेगी। युवा किसान राजकुमार का कहना है कि नोटबंदी से किसान बर्बाद हो गया है। आलू में भारी घाटा हुआ है, सब्जियों के औने-पौने दाम मिल रहे हैं। बैंक से रुपया निकालने के लिए तमाम तरह के कानून बन गए हैं। कभी इसके पास जाओ तो कभी उसके पास। इन परिस्थितियों में सारा जोखिम किसान ही उठा रहा है। सरकार को चाहिए कि वह इन मामलों में किसानों को सहूलियत दे ताकि वह सुकून से अपना कृषि कार्य कर सकें।
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