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मनरेगा : उमरावां गांव में पौने छह लाख का गबन, वसूली का आदेश

Mon, 18 Nov 2024 02:03 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी Updated Mon, 18 Nov 2024 02:03 AM IST
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MNREGA: Embezzlement of Rs. 6.25 lakh in Umravaan village, order for recovery
22 मई के अंक में प्रका​शित खबर।
मनरेगा योजना में ब्लॉक कर्मचारियों की मिलीभगत से उमरावां गांव में लाखों के गबन किया गया है। लोकपाल की जांच में यह हकीकत सामने आई है। इसके बाद उन्होंने प्रधान, सचिव को सीधे दोषी मानते हुए पांच लाख 69 हजार 244 लाख के फर्जीवाड़े की पुष्टि करते हुए रिकवरी का आदेश दिया है।
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यह कार्रवाई अमर उजाला में 22 मई के अंक में प्रकाशित खेत में नहीं चला फावड़ा, कागज में हो गए समतल, खबर का स्वत: संज्ञान लेकर की गई जांच के बाद हुई है। जांच अधिकारियों ने भी अमर उजाला की खबर पर सत्यता की मुहर लगाई है।
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लोकपाल जांच की रिपोर्ट के मुताबिक उमरावां गांव के प्रधान व सचिव ने मनरेगा योजना में मिलकर जमकर भ्रष्टाचार किया है। गांव में समतलीकरण के नाम पर मनमाने तरीके से फर्जी फोटो का प्रयोग कर भुगतान निकाला गया है। जिम्मेदारों ने इसे अनदेखा किया और मस्टररोल जारी कर दिया।
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इसके बाद सचिव व प्रधान ने पांच लाख 69 हजार 244 लाख रुपये फर्जीवाड़ा करते हुए निकाल लिया। गांव के अतुल कुमार तिवारी ने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री पोर्टल पर करते हुए कार्रवाई की मांग की।
अमर उजाला ने इस खबर को 22 मई के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया था। खबर प्रकाशित होने के बाद लोकपाल मनरेगा ने इसे स्वत: संज्ञान लिया। मामले की पड़ताल की तो हकीकत चौकाने वाली रही। पाया गया कि जिन लोगों ने कभी फावड़ा नहीं उठाया, उनके नाम पर और फर्जी फोटो लगाकर खेत समतलीकरण का काम दिखाकर भुगतान निकाला गया।
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जिनके नाम निकला भुगतान, उन्होंने दिया शपथपत्र
- लोकपाल मनरेगा विजय कुमार ने बताया कि गांव के ज्ञान सिंह के नाम पर 71.5 हजार रुपये, नकुल के नाम पर 30 हजार, गजाधर के नाम पर 37 हजार का भुगतान हुआ है। इन्होंने शपथपत्र देकर कहा है कि मनरेगा योजना में काम नहीं किया। इनकी फर्जी फोटो लगाकर भुगतान निकाला गया है। वहीं शिवगोविंद व बुधई के खेत के समतलीकरण के नाम पर 56.8 हजार, ननकी के खेत के नाम पर 44.8 हजार रुपये, नारायण व बच्चा के खेत के नाम पर 30.8 हजार रुपये और हरीनाथ, चंदी देवी व रूद्र प्रसाद के खेत के समतलीकरण के नाम पर 56.8 हजार रुपये फर्जी फोटो लगाकर निकाला गया है।

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अमर उजाला की खबर का संज्ञान लेकर गांव में जांच की गई तो मनरेगा योजना में फर्जीवाड़ा मिला। फर्जी फोटो और ऐसे लोगों के नाम पर भुगतान निकाला गया। जिन्होंने काम ही नहीं किया। इसकी रिपोर्ट डीएम को देते हुए प्रधान व सचिव से रिकवरी के लिए कहा गया है। साथ ही इस प्रकरण में पूरे ब्लॉक के कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध है। इसकी जांच के लिए भी कहा गया है। - विजय कुमार, लोकपाल
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