{"_id":"6a496b837beff85925071420","slug":"mini-secretariat-ineffective-government-system-crumbling-due-to-neglect-kaushambi-news-c-261-1-pr11004-144163-2026-07-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kaushambi News: मिनी सचिवालय बेअसर, बदहाली में दम तोड़ रही सरकारी व्यवस्था","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kaushambi News: मिनी सचिवालय बेअसर, बदहाली में दम तोड़ रही सरकारी व्यवस्था
विज्ञापन
बंद पड़ा मूरतगंज के भीखमपुर गांव का पंचायत भवन। संवाद
मंझनपुर। ग्रामीणों को गांव में ही राजस्व, पंचायत और सरकारी योजनाओं से जुड़ी सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाए गए ग्राम सचिवालय जिले में अपनी उपयोगिता खोते जा रहे हैं। जिले की 451 ग्राम पंचायतों में बने सचिवालय की पड़ताल में सामने आया कि अधिकांश भवन या तो बंद पड़े हैं या फिर उनमें नियमित रूप से पंचायत सचिव और लेखपाल नहीं बैठते। कई सचिवालय पर कब्जा है, सरकारी सामान प्रधानों के घरों में रखा हुआ है, जबकि कुछ भवन भूसा-चारा रखने और मवेशी बांधने के काम आ रहे हैं। शासन ने पंचायत सचिव और लेखपाल की तय दिनों पर संयुक्त उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं, ताकि ग्रामीणों को आय, जाति, निवास, खतौनी, वरासत, पेंशन, किसान सम्मान निधि और अन्य योजनाओं के लिए तहसील व ब्लॉक के चक्कर न लगाने पड़े लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। अधिकांश ग्राम सचिवालयों में या तो ताला लटका मिला या फिर एक ही कर्मचारी मौजूद मिला। इसका खामियाजा सीधे ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है।
जिले में 451 ग्राम पंचायतों के लिए 260 से अधिक पंचायत सचिव तैनात हैं, जबकि करीब 170 लेखपाल पूरे जिले का राजस्व कार्य संभाल रहे हैं। एक लेखपाल के जिम्मे औसतन दो से तीन ग्राम पंचायतें हैं। राजस्व न्यायालय, सीमांकन, वरासत, नामांतरण और फील्ड कार्यों के चलते उनका नियमित रूप से ग्राम सचिवालय में बैठना संभव नहीं हो पाता। वहीं पंचायत सचिव भी ब्लॉक स्तर की बैठकों और अन्य प्रशासनिक कार्यों में व्यस्त रहते हैं। ऐसे में ग्राम सचिवालयों की अवधारणा कागजों तक सिमटकर रह गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि आय, जाति, निवास प्रमाणपत्र, खतौनी, वरासत, किसान सम्मान निधि, पेंशन, आवास योजना और जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र जैसे छोटे-छोटे कार्यों के लिए भी उन्हें बार-बार तहसील और ब्लॉक कार्यालय जाना पड़ता है। इससे समय और धन दोनों की बर्बादी होती है।
विज्ञापन
सरसंवा ब्लॉक में सरकारी सामान पर कब्जा, सचिवालय बने गोदाम
सरसंवा ब्लॉक के रायपुर, भगवतपुर, बरूआ, सेंगरहा, कोरीपुर समेत कई गांवों में ग्राम सचिवालयों की स्थिति और भी चिंताजनक है। यहां कंप्यूटर, लैपटॉप, मेज, कुर्सी और अलमारी जैसे सरकारी संसाधन सचिवालयों के बजाय प्रधानों के निजी घरों में रखे मिले। कई सचिवालय भवनों में भूसा, चारा और कंडा भरा हुआ है, जबकि कुछ स्थानों पर मवेशी बांधे जा रहे हैं। रायपुर के पंचायत सहायक विजय कुमार ने बताया कि उन्हें पांच माह से मानदेय तक नहीं मिला है। ग्रामीणों ने सचिवालयों से सरकारी सामान वापस लाकर नियमित संचालन शुरू कराने और जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
सिराथू और मूरतगंज में भी बदहाल तस्वीर
सिराथू ब्लॉक के नारा, खनवारी, मोहद्दीनपुर बेला, बारातफरीक, मलाक पिंजिरी, मलाक रेजमा और रामपुर माडूकी समेत कई ग्राम पंचायतों में बने मिनी सचिवालय बदहाल पड़े हैं। नारा में सचिवालय भवन में मवेशी बांधे जा रहे हैं, जबकि खनवारी में बने सचिवालय पर वर्षों से एक परिवार का कब्जा है।
मूरतगंज विकास खंड के नसीरपुर और भिखनापुर में भी पंचायत भवन सुबह कुछ देर खुलने के बाद पूरे दिन बंद रहता है। ग्रामीणों का कहना है कि इससे उन्हें छोटे-छोटे कार्यों के लिए भी भटकना पड़ता है।
जिला पंचायत राज अधिकारी अनिल कुमार कहना है कि शासन के निर्देशानुसार समय-समय पर ग्राम सचिवालयों का निरीक्षण कराया जाता है। जहां भी लापरवाही मिलेगी, संबंधित कर्मचारियों और जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
कागजों पर वन स्टॉप सेंटर, हकीकत में बंद दरवाजेग्राम सचिवालयों की स्थापना इस उद्देश्य से की गई थी कि ग्रामीणों को पंचायत, राजस्व और विकास विभाग की सेवाएं एक ही स्थान पर मिल सकें। ऑनलाइन आवेदन, प्रमाणपत्रों का सत्यापन, पेंशन, आवास, किसान सम्मान निधि और मनरेगा जैसी योजनाओं का लाभ गांव में ही उपलब्ध हो, लेकिन नियमित संचालन नहीं होने से यह व्यवस्था अपेक्षित परिणाम नहीं दे पा रही है।
-- -
विज्ञापन
जिले में 451 ग्राम पंचायतों के लिए 260 से अधिक पंचायत सचिव तैनात हैं, जबकि करीब 170 लेखपाल पूरे जिले का राजस्व कार्य संभाल रहे हैं। एक लेखपाल के जिम्मे औसतन दो से तीन ग्राम पंचायतें हैं। राजस्व न्यायालय, सीमांकन, वरासत, नामांतरण और फील्ड कार्यों के चलते उनका नियमित रूप से ग्राम सचिवालय में बैठना संभव नहीं हो पाता। वहीं पंचायत सचिव भी ब्लॉक स्तर की बैठकों और अन्य प्रशासनिक कार्यों में व्यस्त रहते हैं। ऐसे में ग्राम सचिवालयों की अवधारणा कागजों तक सिमटकर रह गई है।
विज्ञापन
ग्रामीणों का कहना है कि आय, जाति, निवास प्रमाणपत्र, खतौनी, वरासत, किसान सम्मान निधि, पेंशन, आवास योजना और जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र जैसे छोटे-छोटे कार्यों के लिए भी उन्हें बार-बार तहसील और ब्लॉक कार्यालय जाना पड़ता है। इससे समय और धन दोनों की बर्बादी होती है।
विज्ञापन
सरसंवा ब्लॉक में सरकारी सामान पर कब्जा, सचिवालय बने गोदाम
सरसंवा ब्लॉक के रायपुर, भगवतपुर, बरूआ, सेंगरहा, कोरीपुर समेत कई गांवों में ग्राम सचिवालयों की स्थिति और भी चिंताजनक है। यहां कंप्यूटर, लैपटॉप, मेज, कुर्सी और अलमारी जैसे सरकारी संसाधन सचिवालयों के बजाय प्रधानों के निजी घरों में रखे मिले। कई सचिवालय भवनों में भूसा, चारा और कंडा भरा हुआ है, जबकि कुछ स्थानों पर मवेशी बांधे जा रहे हैं। रायपुर के पंचायत सहायक विजय कुमार ने बताया कि उन्हें पांच माह से मानदेय तक नहीं मिला है। ग्रामीणों ने सचिवालयों से सरकारी सामान वापस लाकर नियमित संचालन शुरू कराने और जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
सिराथू और मूरतगंज में भी बदहाल तस्वीर
सिराथू ब्लॉक के नारा, खनवारी, मोहद्दीनपुर बेला, बारातफरीक, मलाक पिंजिरी, मलाक रेजमा और रामपुर माडूकी समेत कई ग्राम पंचायतों में बने मिनी सचिवालय बदहाल पड़े हैं। नारा में सचिवालय भवन में मवेशी बांधे जा रहे हैं, जबकि खनवारी में बने सचिवालय पर वर्षों से एक परिवार का कब्जा है।
मूरतगंज विकास खंड के नसीरपुर और भिखनापुर में भी पंचायत भवन सुबह कुछ देर खुलने के बाद पूरे दिन बंद रहता है। ग्रामीणों का कहना है कि इससे उन्हें छोटे-छोटे कार्यों के लिए भी भटकना पड़ता है।
जिला पंचायत राज अधिकारी अनिल कुमार कहना है कि शासन के निर्देशानुसार समय-समय पर ग्राम सचिवालयों का निरीक्षण कराया जाता है। जहां भी लापरवाही मिलेगी, संबंधित कर्मचारियों और जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
कागजों पर वन स्टॉप सेंटर, हकीकत में बंद दरवाजेग्राम सचिवालयों की स्थापना इस उद्देश्य से की गई थी कि ग्रामीणों को पंचायत, राजस्व और विकास विभाग की सेवाएं एक ही स्थान पर मिल सकें। ऑनलाइन आवेदन, प्रमाणपत्रों का सत्यापन, पेंशन, आवास, किसान सम्मान निधि और मनरेगा जैसी योजनाओं का लाभ गांव में ही उपलब्ध हो, लेकिन नियमित संचालन नहीं होने से यह व्यवस्था अपेक्षित परिणाम नहीं दे पा रही है।

बंद पड़ा मूरतगंज के भीखमपुर गांव का पंचायत भवन। संवाद

बंद पड़ा मूरतगंज के भीखमपुर गांव का पंचायत भवन। संवाद

बंद पड़ा मूरतगंज के भीखमपुर गांव का पंचायत भवन। संवाद

बंद पड़ा मूरतगंज के भीखमपुर गांव का पंचायत भवन। संवाद