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Kaushambi News: गोशालाओं में चारे की आपूर्ति में गड़बड़झाला
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मंझनपुर स्थित गोशाला में डंप पुआल।
- फोटो : KAUSHAMBI
मंझनपुर। बेसहारा मवेशियों को संरक्षित करने के लिए जिले में संचालित गोशालाओं को चारे की आपूर्ति में खेल हो रहा है। तीन कार्यदायी संस्थाओं के पास इन गोशालाओं में भूसे की आपूर्ति का ठेका है। इन्हें करीब 1070 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से भूसे का भुगतान किया जाता है, लेकिन भूसे का दाम लेकर ठेकेदार 250-300 रुपये प्रति क्विंटल के पुआल की आपूर्ति कर रहे हैं।
जिले भर में संचालित 158 गोशालाओं में 13423 बेसहारा मवेशियों को संरक्षित किया गया है। शासन की ओर से इन गोशालाओं में चारे की आपूर्ति की व्यवस्था ठेके पर दी गई है। कार्यदायी संस्था आदर्श इंटर प्राइजेज के पास मंझनपुर तहसील, प्रकाश इंटर प्राइजेज के पास सिराथू और सहयोगी इंटर प्राइजेज पर चायल तहसील की गोशालाओं में भूसा पहुंचाने का जिम्मा है। इन्हें प्रति क्विंटल 1070 रुपये के हिसाब से भूसे के भुगतान का प्रावधान है।
जनपद में इस समय भूसे का रेट 1600 से 1700 रुपये प्रति क्विंटल है। एक तो दाम अधिक ऊपर से जनपद में भूसे की किल्लत। इसका फायदा उठाकर ठेकेदार चारे की आपूर्ति में गोलमाल कर रहे हैं। गोशालाओं में पुआल पहुंचाकर, भूसे का दाम लिया जा रहा है। यही नहीं कई जगह वजन बढ़ाने के लिए भूसे की झाल में पत्थर के टुकड़े भरने की बात भी सामने आई है। चारे की आपूर्ति के नाम पर सरकार को चूना लगाने का यह काम कई महीनों से चल रहा है। मंझनपुर, नेवादा, कौशाम्बी, कड़ा, चायल, सिराथू लगभग सभी ब्लॉकों की गोशालाओं का यही हाल है।
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वहीं उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. यशपाल का कहना है कि पुआल की अपेक्षा भूसा मवेशियों की सेहत के लिए ज्यादा फायदेमंद है। इसके कोई नुकसान नहीं है। पुआल से पेट तो भर जाता है, लेकिन पशुओं की सेहत को कोई लाभ नहीं होता। ज्यादा पुआल खिलाने से मवेशियों का पेट भी खराब हो सकता है।
गोशालाओं पर एक नजर
गो आश्रय स्थल- 79
वृहद गो संरक्षण केंद्र- 04
अस्थायी गोशाला- 79
कान्हा गोशाला- 03
कांजी हाउस- 02
कुल संरक्षित मवेशी- 13423
खाद्य सामग्री के दाम
भूसे का बाजार भाव- 1600 से 1700 रुपये प्रति क्विंटल
पुआल का बाजार भाव- 250 से 300 रुपये प्रति क्विंटल
भुगतान के लिए निर्धारित भूसे का रेट- 1070 प्रति क्विंटल
कार्यदायी संस्थाएं- तीन
मंझनपुर स्थित गोशाला में संरक्षित बेसहारा मवेशियों को खिलाने के लिए पुआल की आपूर्ति ठेकेदार द्वारा की गई है। कार्यदायी संस्था भूसा दे ही नहीं पा रही है। रही बात भुगतान की तो जब पैरा दिया है तो भूसे का भुगतान नहीं होगा।-सुनील कुमार मिश्र, ईओ, मंझनपुर
------
भूसे की आपूर्ति में कार्यदायी संस्था मनमानी कर रही है। जब भी मांग भेजो, ठेकेदार पुआल की आपूर्ति करने की बात करता है। इस बार भी गोशाला में पुआल देने की बात कही जा रही थी, लेकिन मना कर दिया, तब 25 क्विंटल भूसा मिला।- बृजलाल, प्रधान प्रतिनिधि, हासिमपुर किनार, नेवादा
------
गांव की अस्थायी गोशाला में 180 गोवंश हैं। कार्यदायी संस्था इनके लिए भूसा नहीं दे रही है। दो महीने पहले भूसा आया था। भूसे की झालों को खोलकर देखा गया तो उसमें तमाम पत्थर के टुकड़े भी थे। ताकि वजन बढ़ सके। इसलिए भूसा वापस कर दिया गया।-पुत्तन सरोज, ग्राम प्रधान, रक्सराई, कौशाम्बी
सरकारी गोशालाओं में मवेशियों को केवल भूसा ही खिलाया जाना है। इसी की आपूर्ति के लिए कार्यदायी संस्थाओं को ठेका दिया गया है। पुआल की आपूर्ति कतई नहीं होने दी जाएगी। यहद ऐसा है तो यह गलत है। इसे रोका जाएगा।-डॉ. एके सागर, सीवीओ
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जिले भर में संचालित 158 गोशालाओं में 13423 बेसहारा मवेशियों को संरक्षित किया गया है। शासन की ओर से इन गोशालाओं में चारे की आपूर्ति की व्यवस्था ठेके पर दी गई है। कार्यदायी संस्था आदर्श इंटर प्राइजेज के पास मंझनपुर तहसील, प्रकाश इंटर प्राइजेज के पास सिराथू और सहयोगी इंटर प्राइजेज पर चायल तहसील की गोशालाओं में भूसा पहुंचाने का जिम्मा है। इन्हें प्रति क्विंटल 1070 रुपये के हिसाब से भूसे के भुगतान का प्रावधान है।
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जनपद में इस समय भूसे का रेट 1600 से 1700 रुपये प्रति क्विंटल है। एक तो दाम अधिक ऊपर से जनपद में भूसे की किल्लत। इसका फायदा उठाकर ठेकेदार चारे की आपूर्ति में गोलमाल कर रहे हैं। गोशालाओं में पुआल पहुंचाकर, भूसे का दाम लिया जा रहा है। यही नहीं कई जगह वजन बढ़ाने के लिए भूसे की झाल में पत्थर के टुकड़े भरने की बात भी सामने आई है। चारे की आपूर्ति के नाम पर सरकार को चूना लगाने का यह काम कई महीनों से चल रहा है। मंझनपुर, नेवादा, कौशाम्बी, कड़ा, चायल, सिराथू लगभग सभी ब्लॉकों की गोशालाओं का यही हाल है।
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वहीं उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. यशपाल का कहना है कि पुआल की अपेक्षा भूसा मवेशियों की सेहत के लिए ज्यादा फायदेमंद है। इसके कोई नुकसान नहीं है। पुआल से पेट तो भर जाता है, लेकिन पशुओं की सेहत को कोई लाभ नहीं होता। ज्यादा पुआल खिलाने से मवेशियों का पेट भी खराब हो सकता है।
गोशालाओं पर एक नजर
गो आश्रय स्थल- 79
वृहद गो संरक्षण केंद्र- 04
अस्थायी गोशाला- 79
कान्हा गोशाला- 03
कांजी हाउस- 02
कुल संरक्षित मवेशी- 13423
खाद्य सामग्री के दाम
भूसे का बाजार भाव- 1600 से 1700 रुपये प्रति क्विंटल
पुआल का बाजार भाव- 250 से 300 रुपये प्रति क्विंटल
भुगतान के लिए निर्धारित भूसे का रेट- 1070 प्रति क्विंटल
कार्यदायी संस्थाएं- तीन
मंझनपुर स्थित गोशाला में संरक्षित बेसहारा मवेशियों को खिलाने के लिए पुआल की आपूर्ति ठेकेदार द्वारा की गई है। कार्यदायी संस्था भूसा दे ही नहीं पा रही है। रही बात भुगतान की तो जब पैरा दिया है तो भूसे का भुगतान नहीं होगा।-सुनील कुमार मिश्र, ईओ, मंझनपुर
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भूसे की आपूर्ति में कार्यदायी संस्था मनमानी कर रही है। जब भी मांग भेजो, ठेकेदार पुआल की आपूर्ति करने की बात करता है। इस बार भी गोशाला में पुआल देने की बात कही जा रही थी, लेकिन मना कर दिया, तब 25 क्विंटल भूसा मिला।- बृजलाल, प्रधान प्रतिनिधि, हासिमपुर किनार, नेवादा
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गांव की अस्थायी गोशाला में 180 गोवंश हैं। कार्यदायी संस्था इनके लिए भूसा नहीं दे रही है। दो महीने पहले भूसा आया था। भूसे की झालों को खोलकर देखा गया तो उसमें तमाम पत्थर के टुकड़े भी थे। ताकि वजन बढ़ सके। इसलिए भूसा वापस कर दिया गया।-पुत्तन सरोज, ग्राम प्रधान, रक्सराई, कौशाम्बी
सरकारी गोशालाओं में मवेशियों को केवल भूसा ही खिलाया जाना है। इसी की आपूर्ति के लिए कार्यदायी संस्थाओं को ठेका दिया गया है। पुआल की आपूर्ति कतई नहीं होने दी जाएगी। यहद ऐसा है तो यह गलत है। इसे रोका जाएगा।-डॉ. एके सागर, सीवीओ