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कूड़े के ढेर में पड़े हैं शादी अनुदान के आवेदन
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Mon, 27 Mar 2017 12:17 AM IST
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कौशाम्बी
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गरीब तबके के लोग बेटियों की शादी के लिए सरकार से अनुदान लेते हैं। सरकार की ओर से 20 हजार रुपये की राशि दी जाती है। कौशाम्बी ब्लॉक के 4208 लोगों ने शादी अनुदान के लिए आवेदन किया था। इनमें से 1934 आवेदन पत्र ब्लॉक के ही कूड़ेदान में पड़े हैं, बाकी तहसीलों में धूल फांक रहे हैं। जांच रिपोर्ट न लगने से समाज कल्याण विभाग की ओर से आवेदकों को अनुदान राशि नहीं मिल रही है।
वर्ष 2016-17 में समाज कल्याण विभाग की ओर से शादी अनुदान के लिए मिलने वाली 20 हजार की रकम के लिए कौशाम्बी ब्लॉक क्षेत्र के लोगों ने बड़ी संख्या में आवेदन किया था। पिछले साल कुल 4208 आवेदन गरीब तबके के लोगों ने अपने बेटियों की शादी के लिए किया। इसके लिए सारी औपचारिकताएं भी पूरी कीं। इसके बाद आवेदन पत्रों को ब्लॉक कार्यालय में जमा किया गया। एडीओ (समाज कल्याण) ने आवेदन पत्रों को ले तो लिया, लेकिन इन पर कार्रवाई करने के बजाय उनको रद्दी की टोकरी में डाल दिया। ब्लॉक कार्यालय में अभी भी 1934 आवेदन पत्र लंबित पड़े हैं, जबकि इन आवेदन पत्रों को जांच के लिए तहसील कार्यालय भेजा जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा अधिकारी ने नहीं किया।
इससे लोगों को लाभ नहीं मिला। यही हाल तहसील का भी है। तहसील भेजे गए आवेदन पत्रों को जांच के लिए हलका लेखपालों को नहीं दिया गया। इससे इस पर रिपोर्ट नहीं लग सकी, तहसील में भेजे गए आवेदन पत्र अभी भी लंबित पड़े हैं। गढ़वा के बच्चा केवट, आंबा कुआं के शीतला प्रसाद, मोहिउद्दीनपुर कोरांव के रामपलट, लोध पुरवा के हरिश्चंद्र, बिरौली के रामआसरे केवट व रामबाबू शादी अनुदान के लिए लगातार ब्लॉक का चक्कर काट रहे हैं। शनिवार को भी यह लोग आए थे, लेकिन ब्लॉक के कर्मचारियों ने यह कहकर वापस कर दिया कि अभी जांच रिपोर्ट नहीं आई है। इससे यह लोग निराश है। हकीकत छिपाकर ग्रामीणों को परेशान किया जा रहा है।
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कइयों की हो चुकी शादी
गरीब तबके के लोगों को शादी अनुदान से राहत मिलने की उम्मीद थी, लेकिन उनका सपना तब टूट गया, जब समाज कल्याण विभाग ने यह कहकर वापस कर दिया कि उनके अभिलेख ही नहीं आए हैं। आवेदन करने वालों में से कइयों की शादी हो चुकी है। एक महीने के भीतर पूरी प्रक्रिया हो जानी चाहिए, लेकिन लोग छह महीने से चक्कर काट रहे हैं। कौशाम्बी ब्लॉक के क्षेत्र के दर्जनों गांवों की बेटियों की शादी हो गई, लेकिन उनके परिजनों को सरकार से मिलने वाली रकम नहीं मिली।
एक आवेदन पर होता है तीन सौ रुपये खर्च
कौशाम्बी ब्लॉक के 4208 लोगों ने शादी अनुदान के लिए आवेदन किया है। एक आवेदन में लगभग तीन सौ रुपये का खर्च आता है। इसके बाद ब्लाक, तहसील व समाज कल्याण विभाग के चक्कर काटने में जो रुपये खर्च होता है, उसकी कोई गिनती नहीं होती है। अधिकारी व कर्मचारी गरीबों को दौड़ाते रहते हैं और वह अपनी मेहनत की कमाई अनुदान के चक्कर में गंवाते रहते हैं।
लंबित आवेदन पत्रों को जल्द ही तहसील भेजवाया जाएगा। तहसील के बाद यह आवेदन पत्र समाज कल्याण विभाग जाएंगे। जल्द ही होने वाली बैठक में वह इसकी समीक्षा भी करेंगे कि आखिर किन परिस्थितियों में इतनी बड़ी संख्या में आवेदन पत्र लंबित हैं।
अखिलेश तिवारी, बीडीओ (कौशाम्बी)
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वर्ष 2016-17 में समाज कल्याण विभाग की ओर से शादी अनुदान के लिए मिलने वाली 20 हजार की रकम के लिए कौशाम्बी ब्लॉक क्षेत्र के लोगों ने बड़ी संख्या में आवेदन किया था। पिछले साल कुल 4208 आवेदन गरीब तबके के लोगों ने अपने बेटियों की शादी के लिए किया। इसके लिए सारी औपचारिकताएं भी पूरी कीं। इसके बाद आवेदन पत्रों को ब्लॉक कार्यालय में जमा किया गया। एडीओ (समाज कल्याण) ने आवेदन पत्रों को ले तो लिया, लेकिन इन पर कार्रवाई करने के बजाय उनको रद्दी की टोकरी में डाल दिया। ब्लॉक कार्यालय में अभी भी 1934 आवेदन पत्र लंबित पड़े हैं, जबकि इन आवेदन पत्रों को जांच के लिए तहसील कार्यालय भेजा जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा अधिकारी ने नहीं किया।
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इससे लोगों को लाभ नहीं मिला। यही हाल तहसील का भी है। तहसील भेजे गए आवेदन पत्रों को जांच के लिए हलका लेखपालों को नहीं दिया गया। इससे इस पर रिपोर्ट नहीं लग सकी, तहसील में भेजे गए आवेदन पत्र अभी भी लंबित पड़े हैं। गढ़वा के बच्चा केवट, आंबा कुआं के शीतला प्रसाद, मोहिउद्दीनपुर कोरांव के रामपलट, लोध पुरवा के हरिश्चंद्र, बिरौली के रामआसरे केवट व रामबाबू शादी अनुदान के लिए लगातार ब्लॉक का चक्कर काट रहे हैं। शनिवार को भी यह लोग आए थे, लेकिन ब्लॉक के कर्मचारियों ने यह कहकर वापस कर दिया कि अभी जांच रिपोर्ट नहीं आई है। इससे यह लोग निराश है। हकीकत छिपाकर ग्रामीणों को परेशान किया जा रहा है।
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कइयों की हो चुकी शादी
गरीब तबके के लोगों को शादी अनुदान से राहत मिलने की उम्मीद थी, लेकिन उनका सपना तब टूट गया, जब समाज कल्याण विभाग ने यह कहकर वापस कर दिया कि उनके अभिलेख ही नहीं आए हैं। आवेदन करने वालों में से कइयों की शादी हो चुकी है। एक महीने के भीतर पूरी प्रक्रिया हो जानी चाहिए, लेकिन लोग छह महीने से चक्कर काट रहे हैं। कौशाम्बी ब्लॉक के क्षेत्र के दर्जनों गांवों की बेटियों की शादी हो गई, लेकिन उनके परिजनों को सरकार से मिलने वाली रकम नहीं मिली।
एक आवेदन पर होता है तीन सौ रुपये खर्च
कौशाम्बी ब्लॉक के 4208 लोगों ने शादी अनुदान के लिए आवेदन किया है। एक आवेदन में लगभग तीन सौ रुपये का खर्च आता है। इसके बाद ब्लाक, तहसील व समाज कल्याण विभाग के चक्कर काटने में जो रुपये खर्च होता है, उसकी कोई गिनती नहीं होती है। अधिकारी व कर्मचारी गरीबों को दौड़ाते रहते हैं और वह अपनी मेहनत की कमाई अनुदान के चक्कर में गंवाते रहते हैं।
लंबित आवेदन पत्रों को जल्द ही तहसील भेजवाया जाएगा। तहसील के बाद यह आवेदन पत्र समाज कल्याण विभाग जाएंगे। जल्द ही होने वाली बैठक में वह इसकी समीक्षा भी करेंगे कि आखिर किन परिस्थितियों में इतनी बड़ी संख्या में आवेदन पत्र लंबित हैं।
अखिलेश तिवारी, बीडीओ (कौशाम्बी)