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केसीसी की तर्ज पर अब सहकारी समितियां भी जारी करेंगी रुपी कार्ड
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बैंकों की तर्ज पर अब सहकारी समितियां भी रुपे कार्ड जारी करेंगी। इस कार्ड के जरिए समिति का सदस्य एक हेक्टेयर जमीन समिति में बंधक रखकर 40 हजार तक का कर्ज ले सकता है। इसके लिए किसान को तीन प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देनी होगी। काश्तकार उर्वरक की खरीद के साथ ही पैसा भी बीज, जुताई या सिंचाई के लिए निकाल सकता है।
जिले में 64 सहकारी समितियों के माध्यम से उर्वरक का वितरण कराया जा रहा है। इन समितियों में 37 हजार सक्रिय सदस्य हैं। वर्ष 2015 में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के सरकार से बिजनेस बढ़ाने 22 समितियों को सरकार की तरफ से पांच-पांच लाख रुपया दिया गया। इस पैसे को इफको के खाते में दर्ज जमा कर समितियों ने कारोबार बढ़ाया। मौजूदा समय जिले में 33 समितियां गुड फॉर कैरी का खिताब हासिल कर चुकी हैं। यहां का लेनदेन काफी अच्छा है। एआर कोऑपरेटिव विनोद सिंह का कहना है कि पश्चिम के जिलों में रुपे कार्ड जारी होने लगे हैं। जल्द ही यह व्यवस्था जिले में भी लागू हो जाएगी। यह रुपे कार्ड एटीएम सरीखे होगा। काश्तकार चाहे तो एटीएम बूथ से भी जमा निकासी कर सकता है। इससे जहां समितियों की आय बढ़ेगी वहीं काश्तकारों को भी काफी लाभ पहुंचेगा।
एआर कोऑपरेटिव विनोद सिंह का कहना है कि रुपे कार्ड सिर्फ समिति के पंजीकृत सदस्यों को ही जारी किया जाएगा। हालांकि इसमें वार्षिक ब्याज करीब सात प्रतिशत के करीब है लेकिन काश्तकार से सिर्फ तीन प्रतिशत ब्याज ही ली जाएगी। बाकी का पैसा केंद्र व राज्य सरकार की तरफ से अंशदान होगा।
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रुपे कार्ड बनवाने की प्रक्रिया बहुत ही आसान है। इसके लिए काश्तकार को सिर्फ खतौनी और आधार मुख्य तौर पर लाना होगा। इसके अलावा आसान की प्रक्रिया को अपनाना होगा। इसके बाद काश्तकार रुपे कार्ड के जरिए किसान क्रेडिट कार्ड की तर्ज पर समितियों से लेनदेन कर सकता है।
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जिले में 64 सहकारी समितियों के माध्यम से उर्वरक का वितरण कराया जा रहा है। इन समितियों में 37 हजार सक्रिय सदस्य हैं। वर्ष 2015 में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के सरकार से बिजनेस बढ़ाने 22 समितियों को सरकार की तरफ से पांच-पांच लाख रुपया दिया गया। इस पैसे को इफको के खाते में दर्ज जमा कर समितियों ने कारोबार बढ़ाया। मौजूदा समय जिले में 33 समितियां गुड फॉर कैरी का खिताब हासिल कर चुकी हैं। यहां का लेनदेन काफी अच्छा है। एआर कोऑपरेटिव विनोद सिंह का कहना है कि पश्चिम के जिलों में रुपे कार्ड जारी होने लगे हैं। जल्द ही यह व्यवस्था जिले में भी लागू हो जाएगी। यह रुपे कार्ड एटीएम सरीखे होगा। काश्तकार चाहे तो एटीएम बूथ से भी जमा निकासी कर सकता है। इससे जहां समितियों की आय बढ़ेगी वहीं काश्तकारों को भी काफी लाभ पहुंचेगा।
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एआर कोऑपरेटिव विनोद सिंह का कहना है कि रुपे कार्ड सिर्फ समिति के पंजीकृत सदस्यों को ही जारी किया जाएगा। हालांकि इसमें वार्षिक ब्याज करीब सात प्रतिशत के करीब है लेकिन काश्तकार से सिर्फ तीन प्रतिशत ब्याज ही ली जाएगी। बाकी का पैसा केंद्र व राज्य सरकार की तरफ से अंशदान होगा।
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रुपे कार्ड बनवाने की प्रक्रिया बहुत ही आसान है। इसके लिए काश्तकार को सिर्फ खतौनी और आधार मुख्य तौर पर लाना होगा। इसके अलावा आसान की प्रक्रिया को अपनाना होगा। इसके बाद काश्तकार रुपे कार्ड के जरिए किसान क्रेडिट कार्ड की तर्ज पर समितियों से लेनदेन कर सकता है।