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दो माह से गैरेज में खड़ा है शव वाहन
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Sat, 20 May 2017 01:23 AM IST
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जिला अस्पताल में खड़ी लाश गाड़ी।
- फोटो : amar ujala
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जिला अस्पताल को दो माह पहले शासन ने शव वाहन उपलब्ध कराया था। इस वाहन का इस्तेमाल अस्पताल प्रशासन नहीं कर रहा है। इससे मृतकों के परिजनों को तमाम दिक्कतों का सामना करना पड़ता है और मजबूरन उन्हें निजी एंबुलेंस से शव ले जाना पड़ता है। इसके लिए उन्हें काफी रुपये खर्च करने पड़ते हैं।
जिला अस्पताल को मिला शव वाहन गैरेज में खड़ा है। जब से यह वाहन आया है इसे बाहर नहीं निकाला गया। लोगों का कहना है कि इसे जान बूझकर गैरेज में खड़ा किया गया है। इसका लाभ निजी एंबुलेंस वाले उठा रहे हैं। किसी की मौत होने पर वे एंबुलेंस से शव घर अथवा पोस्टमार्टम हाउस लेकर लाते हैं। एंबुलेंस वाले मुंहमांगी रकम लेते हैं। यही कारण है कि अस्पताल में दो से तीन निजी एंबुलेंस दिन भर खड़ी रहती हैं जबकि निजी एंबुलेंस अस्पताल परिसर के भीतर प्रतिबंधित है।
शव वाहन अब तक किसी को नहीं मुहैया कराया गया। इससे मृतकों के परिजनों को तमाम दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। सीएमएस डॉ. दीपक सेठ का कहना है कि शव वाहन आ गया था लेकिन चालक उपलब्ध नहीं था। अब चालक मिल गया है। शव वाहन का इस्तेमाल किया जाएगा।
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जिला अस्पताल को मिला शव वाहन गैरेज में खड़ा है। जब से यह वाहन आया है इसे बाहर नहीं निकाला गया। लोगों का कहना है कि इसे जान बूझकर गैरेज में खड़ा किया गया है। इसका लाभ निजी एंबुलेंस वाले उठा रहे हैं। किसी की मौत होने पर वे एंबुलेंस से शव घर अथवा पोस्टमार्टम हाउस लेकर लाते हैं। एंबुलेंस वाले मुंहमांगी रकम लेते हैं। यही कारण है कि अस्पताल में दो से तीन निजी एंबुलेंस दिन भर खड़ी रहती हैं जबकि निजी एंबुलेंस अस्पताल परिसर के भीतर प्रतिबंधित है।
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शव वाहन अब तक किसी को नहीं मुहैया कराया गया। इससे मृतकों के परिजनों को तमाम दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। सीएमएस डॉ. दीपक सेठ का कहना है कि शव वाहन आ गया था लेकिन चालक उपलब्ध नहीं था। अब चालक मिल गया है। शव वाहन का इस्तेमाल किया जाएगा।
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