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सिल्ट सफाई पर लाखों खर्च, फिर भी नहीं साफ हुई नहरें

Mon, 13 Jun 2022 01:15 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 13 Jun 2022 01:15 AM IST
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Lakhs spent on silt cleaning, yet the canals were not cleaned
जलकुंभी से पटी नहर की बेरौचा माइनर - फोटो : KAUSHAMBI
कौशाम्बी ब्लॉक क्षेत्र में सिंचाई का एक मात्र साधन नहरों का हाल-बदहाल है। चंद माह पहले ही सिल्ट सफाई के नाम पर लाखों का बजट उड़ा दिया गया, फिर भी क्षेत्र की नहरें जलकुंभी से पटी हैं। इसे लेकर किसानों में आक्रोश है।
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किसानों की आय दोगुनी करने के लिए केंद्र से लेकर प्रदेश सरकार तक एड़ी चोटी का जोर लगा रही है, लेकिन अफसरों की मनमानी शासन के किए कराए पर पानी फिर रहा है।
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चंद माह पहले लाखों खर्च कर जिले में नहरों की सिल्ट सफाई कराने का दावा किया गया। इसके बाद भी अधिकांश नहरें गंदगी से पटी हैं। कौशाम्बी ब्लॉक क्षेत्र के यमुना की तराई में बसे गांवों में फसलों की सिंचाई का एकमात्र साधन नहर होने के कारण किसान परेशान हैं, क्योंकि यहां जोगापुर पंप कैनाल की बेरौंचा माइनर झाड़ी और जलकुंभी से पटी पड़ी है।
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क्षेत्र के सुरेश चंद्र, जितेंद्र सिंह, पिंटू त्रिपाठी, राजेंद्र प्रसाद, धर्मेंद्र कुमार आदि किसानों का कहना है कि कई सालों से बिजिया चौराहा से दिया तक बेरौंचा माइनर में सिल्ट सफाई का कार्य नहीं हुआ है। पिछले साल भी सिल्ट सफाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की गई थी। इस बारे में कई बार अधिकारियों से शिकायत की गई लेकिन ठेकेदार पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
इस माइनर से बेहन पुरवा, जोगापुर, हिसामबाद, मैंनहाई, चांदकन, गुरौली,गोपसहसा,गौरये, मुड़िया डोली, बेरोंचा, जुगराजपुर, कैलाशपुर, महिला समेत दो दर्जन से ज्यादा गांवों में फसलों की सिंचाई होती है। लेकिन जलकुंभी और झाड़ी के कारण नहर में टेल तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है। किसान इन दिनों धान की नर्सरी करने के लिए परेशान हैं। ऐसे में निजी नलकूपों से किसान मनमाने दाम पर सिंचाई करने को मजबूर हो रहे हैं। इसे लेकर किसानों में आक्रोश है।

बेरौंचा माइनर में सिल्ट सफाई का काम रबी की फसल के समय कराया गया था। अब अगले साल फिर उसी समय सफाई कराई जाएगी। साल में एक बार ही नहर की सफाई कराने का प्राविधान है। जगदीश लाल-एक्सईएन, सिंचाई खंड कौशाम्बी
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