फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kaushambi News ›   Kaushambi was blunt bronze glow

कुंद पड़ी कौशाम्बी के पीतल की चमक

Fri, 06 Feb 2015 12:37 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला कौशाम्बी
ब्यूरो/अमर उजाला कौशाम्बी Updated Fri, 06 Feb 2015 12:37 AM IST
विज्ञापन
Kaushambi was blunt bronze glow
मंझनपुर/शमसाबाद। सदियों से पिछड़ेपन का दंश झेल रहे कौशाम्बी की सूरत अलग जिला बनने के बाद भी नहीं बदली है। जबकि इसे जिला बनाए 18 साल बीत चुका है। विकास के नाम पर सिर्फ जिला मुख्यालय में सरकारी बिल्डिंगें खड़ी कर दी गई हैं। अब भी जिले की सड़कें बदहाल हैं। यातायात के साधनों की किल्लत हैं। बिजली-पानी का टोटा गांव-गांव बना हुआ है। इन सबके बीच इन 18 सालों में ऐसा कुछ नहीं किया गया, जिससे जिले को नया विकास मिले। बेरोजगारी दूर की जा सके।
विज्ञापन


बता दें कि गंगा-यमुना नदियों के बीच बसी कौशाम्बी उद्योग सिफर जिला है। अलग जनपद बनने के 18 साल बाद भी इस दिशा में कोई प्रयास नहीं किया जा सका है। अनदेखी के कारण ही कभी पूरे देश में पीतल नगरी के रूप में विख्यात शमसाबाद में अपनी पहचान खो चुका है। खुद गांव के बड़े बुजुर्ग बताते हैं कि सिराथू तहसील के शमसाबाद में वर्ष 1996 (जनपद बनने से एक वर्ष पूर्व) तक 265 बर्तन बनाने के कारखाने थे। पर, आज की तारीख में सिर्फ नौ कारखाने बचे हैं।
विज्ञापन


गांव में अब भी बर्तन बनाने का काम करने वाले रामराज, रामसरन, कल्लू, सूरजबली आदि बताते हैं कि यहां कोई सुविधा ही नहीं है। बिजली, पानी, सड़क, आवागमन के साधनों की किल्लत है। बिजली आने-जाने का समय ही नहीं है। इससे दिन-दिनभर बर्तन बनाने का काम ठप रहता है। इससे आजिज आकर यहां के सैकड़ों कारीगर मिर्जापुर, कानपुर, मुरादाबाद, बिलासपुर, दुर्ग, जबलपुर, कटनी आदि शहरों में जाकर बस गए।
विज्ञापन
विज्ञापन


पीतल नगरी के रूप में विख्यात शमसाबाद में कभी घर-घर बर्तन बनाने का काम होता था। लोग बताते हैं कि यहां करीब 250 से 300 कारखाने पीतल और मिश्रित धातु के बर्तन बनाने के थे। जहां आसपास के गांव मलाक पिंजरी, बारा तफारीक, अल्पी का पुरा, मधवामई, बिजलीपुर, लच्छीपुर, रूप नारायणपुर, रामपुर धमांवा, तेरहरा, मलाक सद्दी, करनपुर, सौरईखुर्द आदि गांवों के हजारों युवक-युवतियों काम करके अपनी जीविका चलाते थे। पर, बिजली, पानी, परिवहन जैसी सुविधाएं नहीं मिलने से एक-एक करके कारखाने बंद होते चले गए। इससे इन गांवों के युवकों को नौकरी के लिए दूसरे शहरों को जाना पड़ा।

शमसाबाद में घर-घर पीतल के बर्तन बनाने का उद्योग बरसों फलता-फूलता रहा। इसे देखते हुए वर्ष 1992 में जिला उद्योग की ओर से कारखाना स्थापित करने के लिए भवन का निर्माण भी कराया गया था। पर, बिल्डिंग निर्माण के आगे कुछ नहीं किया गया। जिसकी वजह से यहां के कारोबारी दूसरे शहरों में जाकर बसने को मजबूर रहे। जब शमसाबाद में पीतल उद्योग दम तोड़ने लगा, तो जिला उद्योग की यह वीरान पड़ी बिल्डिंग पर पुलिसवालों का कब्जा हो गया। आज इस भवन में पुलिस चौकी खुली हुई है।


पीतल नगरी के रूप में विख्यात शसमाबाद को विकास कराया जाएगा। कोशिश होगी कि यहां बर्तन बनाने के छोटे-छोटे कारखाने फिर से स्थापित किए जाएं। इशके लिए केंद्र सरकार को लिखा-पढ़ी करके यहां के व्यापारियों को बर्तन बनाने का काम शुरू कराने के लिए मदद भी मुहैया कराई जाएगी।
विनोद सोनकर सांसद कौशाम्बी
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed