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Court : नाबालिग से दुष्कर्म और हत्या के सजायाफ्ता को सशर्त जमानत कौशाम्बी की सत्र अदालत ने सुनाई थी आजीवन कार

Fri, 10 Nov 2023 04:37 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, कौशांबी
अमर उजाला नेटवर्क, कौशांबी Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 10 Nov 2023 04:37 PM IST
सार

यह आदेश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति एसएएच रिजवी की खंडपीठ ने अपीलार्थी मुन्ना उर्फ अरविंद और जगदीश की ओर से निचली अदालत द्वारा सुनाई गई सश्रम आजीवन कारावास की सजा को चुनौती देने वाली अपील पर सुनवाई करते हुए दिया है।

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Kaushambi sessions court had given conditional bail to the person convicted of rape and murder
अदालत। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म और हत्या के सजायाफ्ता दो बंदियों की सशर्त जमानत मंजूर कर ली है। अभियुक्त को रिहाई के बाद छह माह में एक लाख आठ हजार रुपये लगे अर्थदंड में से 25 हजार जमा करने होंगे। शेष राशि पर रोक लगा दी है।

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यह आदेश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति एसएएच रिजवी की खंडपीठ ने अपीलार्थी मुन्ना उर्फ अरविंद और जगदीश की ओर से निचली अदालत द्वारा सुनाई गई सश्रम आजीवन कारावास की सजा को चुनौती देने वाली अपील पर सुनवाई करते हुए दिया है।
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मामला कौशाम्बी जिले के थाना पिपरी का है। वर्ष 2018 में छह वर्षीय बच्ची के पिता ने गुमशुदगी दर्ज कराई कि उसकी बेटी खेलते समय गुम हो गई है। दूसरे दिन बच्ची की लाश नर्सरी में बरामद हुई तो पिता ने गांव के ही मुन्ना उर्फ अरविंद और जगदीश के विरुद्ध बच्ची के अपहरण, रेप और हत्या के आरोप में मुकदमा दर्ज करवाया।
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याची के अधिवक्ता सुनील चौधरी ने दलील दी कि अभियुक्तों को राजनीतिक रंजिश के कारण झूठा फंसाया गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक बच्ची को जंगली जानवरों ने खाया था और प्राइवेट पार्ट पर जो मानव वीर्य मिला, डीएनए टेस्ट में वह आरोपियों से मैच नही हुआ है। याचीगण का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। परिस्थितिजन्य साक्ष्य के आधार पर सजा सुनाई गई है। आरेाप पूर्णत: साबित नहीं हैं। कोर्ट ने अभियुक्तों की जमानत सशर्त मंजूर करते हुए 6 सप्ताह में 25 हजार रुपये अर्थदंड जमा करने का आदेश दिया है। जबकि जुर्माने की शेष राशि पर रोक लगा दी है।


 
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