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अतिक्रमण को लेकर फिर गंभीर हुआ राजस्व परिषद
अमर उजाला ब्यूरो, काैश्ाांबी
Updated Mon, 01 Jun 2015 11:51 PM IST
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तालाब, पोखरों जैसे सार्वजनिक स्थलों पर अतिक्रमण की समस्या को लेकर राजस्व परिषद एक बार फिर गंभीर हो गया है। परिषद के अध्यक्ष ने डीएम को पत्र भेजकर एक से 15 जून तक जिले भर में विशेष अभियान चलाकर अतिक्रमण हटवाने का निर्देश दिया है। जिला प्रशासन ने भी इसकी तैयारी भी शुरू कर दी है। इसे लेकर अतिक्रमणकारियों के होश उड़े हैं। बतादें कि जिले में तालाबों, पोखरों, चारागाहों और कब्रिस्तानों समेत अन्य सार्वजनिक जमीनें सुरक्षित नहीं हैं। स्थानीय भू-माफिया इन जमीनों पर लगातार कब्जा करते जा रहे हैं। इसे देखते हुए दो दिन पहले राजस्व परिषद के अध्यक्ष एके गुप्ता ने डीएम को पत्र भेजा है। इसमें उन्होंने एक से 15 जून तक अतिक्रमण के खिलाफ विशेष अभियान चलाकर सार्वजनिक जमीनों को अतिक्रमण मुक्त कराने का बात कही है।
राजस्व परिषद के अध्यक्ष का पत्र मिलते ही जिला प्रशासन ने सार्वजनिक जमीनों को चिन्हित करना शुरू कर दिया है। तीनों तहसीलों के उप जिलाधिकारियों ने लेखपालों और राजस्व निरीक्षकों को युद्धस्तर पर इस काम में लगा दिया है। माना जा रहा है कि एक ही दो दिन के भीतर अतिक्रमण हटाओ अभियान की शुरूआत कर दी जाएगी। इसे लेकर अतिक्रमणकारियों के होश उड़े हैं। भू माफियाओं ने राजस्व अधिकारियों से साठगांठ करनी शुरू कर दी है। गौरतलब है कि इससे पहले भी जिले में कई बार अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया गया लेकिन अफसरों की लापरवाही के चलते अभियान सिर्फ खानापूर्ति तक ही सिमटकर रह जाता है। एक-दो स्थानों से अतिक्रमण हटवाकर अफसर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर लेते हैं। देखना होगा कि इस बार अतिक्रमण हटाओ अभियान को अफसर कितनी गंभीरता से लेते हैं।
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राजस्व परिषद के अध्यक्ष का पत्र मिलते ही जिला प्रशासन ने सार्वजनिक जमीनों को चिन्हित करना शुरू कर दिया है। तीनों तहसीलों के उप जिलाधिकारियों ने लेखपालों और राजस्व निरीक्षकों को युद्धस्तर पर इस काम में लगा दिया है। माना जा रहा है कि एक ही दो दिन के भीतर अतिक्रमण हटाओ अभियान की शुरूआत कर दी जाएगी। इसे लेकर अतिक्रमणकारियों के होश उड़े हैं। भू माफियाओं ने राजस्व अधिकारियों से साठगांठ करनी शुरू कर दी है। गौरतलब है कि इससे पहले भी जिले में कई बार अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया गया लेकिन अफसरों की लापरवाही के चलते अभियान सिर्फ खानापूर्ति तक ही सिमटकर रह जाता है। एक-दो स्थानों से अतिक्रमण हटवाकर अफसर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर लेते हैं। देखना होगा कि इस बार अतिक्रमण हटाओ अभियान को अफसर कितनी गंभीरता से लेते हैं।
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