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सरकारी कर्मचारी बनाने को गरजे कोटेदार
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 19 Feb 2016 11:29 PM IST
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मानदेय नहीं वेतन चाहिए, कोटेदार को सरकारी कर्मचारी बनाइए। इस नारे के साथ शुक्रवार को जिलेभर के कोटेदारों ने कलेक्ट्रेट में हुंकार भरी। शासन-प्रशासन पर सस्तेदर की दुकान संचालकों के साथ सौतेला व्यवहार किए जाने का इल्जाम लगाते हुए कोटेदारों ने प्रधानमंत्री को संबोधित 9 सूत्रीय ज्ञापन जिलाधिकारी को दिया। जल्द मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी।
सस्तेदर पर गरीबों को खाद्यान्न, चीनी और मिट्टी का तेल वितरित करने वाले कोटेदारों ने अब खुद को सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिए जाने और माहवार वेतन की मांग शुरू कर दी है। अपनी इसी मांग को लेकर शुक्रवार को जिलेभर के कोटेदार कलेक्ट्रेट में एकजुट हुए। जिलाधिकारी कार्यालय के सामने नारेबाजी करते हुए हुंकार भरी। कोटेदार संघ वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष राजीव पासवान ने कहा कि सूबे में 45 साल से सस्तेदर की दुकानों का संचालन किया जा रहा है। इस समय प्रदेश में 75 हजार से अधिक दुकानें हैं। पर, इनका संचालन करने वालों की समस्याओं पर कभी भी शासन-प्रशासन की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जाता है।
बताया कि 45 साल से उन्हें 6 फीसदी कमीशन पर काम करना पड़ रहा है। जबकि दिहाड़ी बढ़ने के कारण आज गोदाम से दुकान तक राशन ले जाने में अधिक रुपये खर्च हो रहा है। घंटेभर तक कलेक्ट्रेट में हुंकार भरने वाले कोटेदारों ने प्रधानमंत्री को संबोधित 9 सूत्रीय ज्ञापन डीएम को दिया। राशन वितरण प्रणाली में बदलाव, सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने, वेतन दिए जाने, 5 लाख रुपये दुर्घटना बीमा का लाभ मिलने, कोटेदारों की असामयिक मौत पर पत्नी और अन्य आश्रितों को दुकान आवंटित करने, पल्लेदारी का खर्च मिलने आदि मांगें शामिल रहीं। मौके पर रामचंद्र, दिनेश कुमार, मेवालाल, सतीश कुमार, सुरेश कुमार, शिवलाल, अरविंद कुमार, महेंद्र प्रसाद, रामदीन मौर्य, प्रहलाद कुमार, लोक नारायण आदि मौजूद रहे।
सस्तेदर पर गरीबों को खाद्यान्न, चीनी और मिट्टी का तेल वितरित करने वाले कोटेदारों ने अब खुद को सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिए जाने और माहवार वेतन की मांग शुरू कर दी है। अपनी इसी मांग को लेकर शुक्रवार को जिलेभर के कोटेदार कलेक्ट्रेट में एकजुट हुए। जिलाधिकारी कार्यालय के सामने नारेबाजी करते हुए हुंकार भरी। कोटेदार संघ वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष राजीव पासवान ने कहा कि सूबे में 45 साल से सस्तेदर की दुकानों का संचालन किया जा रहा है। इस समय प्रदेश में 75 हजार से अधिक दुकानें हैं। पर, इनका संचालन करने वालों की समस्याओं पर कभी भी शासन-प्रशासन की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जाता है।
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बताया कि 45 साल से उन्हें 6 फीसदी कमीशन पर काम करना पड़ रहा है। जबकि दिहाड़ी बढ़ने के कारण आज गोदाम से दुकान तक राशन ले जाने में अधिक रुपये खर्च हो रहा है। घंटेभर तक कलेक्ट्रेट में हुंकार भरने वाले कोटेदारों ने प्रधानमंत्री को संबोधित 9 सूत्रीय ज्ञापन डीएम को दिया। राशन वितरण प्रणाली में बदलाव, सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने, वेतन दिए जाने, 5 लाख रुपये दुर्घटना बीमा का लाभ मिलने, कोटेदारों की असामयिक मौत पर पत्नी और अन्य आश्रितों को दुकान आवंटित करने, पल्लेदारी का खर्च मिलने आदि मांगें शामिल रहीं। मौके पर रामचंद्र, दिनेश कुमार, मेवालाल, सतीश कुमार, सुरेश कुमार, शिवलाल, अरविंद कुमार, महेंद्र प्रसाद, रामदीन मौर्य, प्रहलाद कुमार, लोक नारायण आदि मौजूद रहे।
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