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कर्तव्य के प्रति समर्पण के चलते मिला इनाम
ब्यूरो/अमर उजाला कौशाम्बी
Updated Tue, 31 Mar 2015 12:04 AM IST
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मंझनपुर। मुख्यमंत्री के हाथों लक्ष्मीबाई पुरस्कार हासिल करने वाली कौशाम्बी का आशा कार्यकत्री संतरा देवी के उपलब्धि पर जनपदवासी गदगद हैं। वहीं विभागीय अफसर और कर्मचारियों ने भी उनके जज्बे को सराहते हुए खुशी जाहिर की है। सीएमओ डॉ. आरके मिश्रा ने कहा कि संतरा को कर्तव्य के प्रति समर्पण का ईनाम मिला है। उसका यह पुरस्कार जिले की महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनेगा।
बता दें कि मंझनपुर तहसील के बरलहा गांव की रहने वाली संतरा देवी मंझनपुर पीएचसी में आशा कार्यकत्री हैं। घर की माली हालत में सुधार के उद्देश्य से वर्ष 2006 में वह आशा कार्यकत्री बनीं। पति देवतादीन भी संविदा पर ही ग्राम रोजगार सेवक हैं। उधर, कार्यकत्री बनकर प्रशिक्षण लेने के बाद से ही संतरा देवी अपनी ड्यूटी को पूरी ईमानदारी से निभा रही हैं। इस दौरान जहां गांव-गांव घूमकर वह महिलाओं को स्वच्छता की सीख देती हैं, वहीं प्रसूताओं, छोटे बच्चों को बीमारियों से बचाने का टीका लगाने, प्रसूताओं को सुरक्षित प्रसव के लिए पंजीकृत कराने, ग्रामीणों को स्वच्छता, स्वच्छ पेयजल, परिवार कल्याण आदि के लिए भी जागरूक बना रही हैं।
खुद संतरा देवी का मानना है कि जब गांव की एक-एक महिला और व्यक्ति जागरूक हो जाएगा, तभी बीमारियां मिटेंगी। मातृ-शिशु मृत्युदर में कमी आएगी। जनसंख्या वृद्धि भी काबू में आ जाएगी। काम के प्रति उसके इसी समर्पण को पहचानते हुए विभागीय अधिकारियों ने उसके साथ ही दो अन्य आशा कार्यकत्री आशा देवी और कांति देवी का नाम प्रस्तावित करके यहां से भेजा था। पर, लक्ष्मीबाई पुरस्कार संतरा के काम को उसकी लगन को हासिल हुआ।
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बता दें कि मंझनपुर तहसील के बरलहा गांव की रहने वाली संतरा देवी मंझनपुर पीएचसी में आशा कार्यकत्री हैं। घर की माली हालत में सुधार के उद्देश्य से वर्ष 2006 में वह आशा कार्यकत्री बनीं। पति देवतादीन भी संविदा पर ही ग्राम रोजगार सेवक हैं। उधर, कार्यकत्री बनकर प्रशिक्षण लेने के बाद से ही संतरा देवी अपनी ड्यूटी को पूरी ईमानदारी से निभा रही हैं। इस दौरान जहां गांव-गांव घूमकर वह महिलाओं को स्वच्छता की सीख देती हैं, वहीं प्रसूताओं, छोटे बच्चों को बीमारियों से बचाने का टीका लगाने, प्रसूताओं को सुरक्षित प्रसव के लिए पंजीकृत कराने, ग्रामीणों को स्वच्छता, स्वच्छ पेयजल, परिवार कल्याण आदि के लिए भी जागरूक बना रही हैं।
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खुद संतरा देवी का मानना है कि जब गांव की एक-एक महिला और व्यक्ति जागरूक हो जाएगा, तभी बीमारियां मिटेंगी। मातृ-शिशु मृत्युदर में कमी आएगी। जनसंख्या वृद्धि भी काबू में आ जाएगी। काम के प्रति उसके इसी समर्पण को पहचानते हुए विभागीय अधिकारियों ने उसके साथ ही दो अन्य आशा कार्यकत्री आशा देवी और कांति देवी का नाम प्रस्तावित करके यहां से भेजा था। पर, लक्ष्मीबाई पुरस्कार संतरा के काम को उसकी लगन को हासिल हुआ।
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