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इंसाफ: असल कातिल को आजीवन कारावास, संदिग्ध बाइज्जत बरी
Thu, 02 Mar 2023 01:01 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Thu, 02 Mar 2023 01:01 AM IST
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इंसाफ: असल कातिल को आजीवन कारावास, संदिग्ध बाइज्जत बरी
- वर्ष 2004 में कौशाम्बी कोतवाली इलाके के गढ़वा गांव में हुई थी हत्या
- पुलिस ने नामजद को विवेचना में ही निकालकर दो लोगों के खिलाफ दाखिल किया था चार्जशीट
संवाद न्यूज एजेंसी
मंझनपुर। कानून के राज ने एक हत्या के मामले में असल इंसाफ किया। अदालत ने मुकदमें में गवाहों के बयान और साक्ष्य के आधार पर दोषी को न सिर्फ आजीवन कारावास की सजा सुनाई, बल्कि आरोप पत्र में सामने लाए गए आरोपी को बरी कर दिया। यह वह मामला है जिसमें मुकदमें के वादी ने ही एक कथित व्यक्ति पर हत्या का आरोप लगाते हुए नामजद हत्या का केस दर्ज कराया था।
कौशाम्बी कोतवाली के बड़ा गढ़वा गांव में चार जुलाई 2004 को रघु नाम के व्यक्ति की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में मृतक के पिता ने गांव के सुंदर लाल के खिलाफ हत्या का नामजद मुकदमा दर्ज कराया। आरोप लगाया कि संदर लाल से उसके बेटे की रंजिश थी, इसलिए हत्या कर दी गई। पुलिस ने विवेचना के दौरान पाया कि रघु की हत्या गांव के हरिमोहन व लालमन ने की है। उन लोगों के खिलाफ आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया। पुलिस ने घटना में आरोपित किए गए सुंदरलाल को पुलिस ने पहले ही निर्दोष साबित किया था। यह मामला अपर जिला जज कक्ष संख्या- 6 संजय कुमार मिश्र की अदालत में विचाराधीन था। अभियोजन की तरफ से मुकदमे की पैरवी अपर जिला शासकीय अधिकारी दिनेश चंद्र केसरवानी ने की। सरकारी वकील ने सात लोगों की गवाही कराई। कोर्ट ने सभी पक्ष को सुनने के बाद लालमन को बरी कर दिया। दोषी पाए गए हरिमोहन को आजीवन कारावास व 20 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया गया है। सजा सुनाए जाने के बाद कोर्ट मोहर्रिर ने हरिमोहन को कस्ट़डी में लेकर सजा भुगतने के लिए जेल भेज दिया।
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- वर्ष 2004 में कौशाम्बी कोतवाली इलाके के गढ़वा गांव में हुई थी हत्या
- पुलिस ने नामजद को विवेचना में ही निकालकर दो लोगों के खिलाफ दाखिल किया था चार्जशीट
संवाद न्यूज एजेंसी
मंझनपुर। कानून के राज ने एक हत्या के मामले में असल इंसाफ किया। अदालत ने मुकदमें में गवाहों के बयान और साक्ष्य के आधार पर दोषी को न सिर्फ आजीवन कारावास की सजा सुनाई, बल्कि आरोप पत्र में सामने लाए गए आरोपी को बरी कर दिया। यह वह मामला है जिसमें मुकदमें के वादी ने ही एक कथित व्यक्ति पर हत्या का आरोप लगाते हुए नामजद हत्या का केस दर्ज कराया था।
कौशाम्बी कोतवाली के बड़ा गढ़वा गांव में चार जुलाई 2004 को रघु नाम के व्यक्ति की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में मृतक के पिता ने गांव के सुंदर लाल के खिलाफ हत्या का नामजद मुकदमा दर्ज कराया। आरोप लगाया कि संदर लाल से उसके बेटे की रंजिश थी, इसलिए हत्या कर दी गई। पुलिस ने विवेचना के दौरान पाया कि रघु की हत्या गांव के हरिमोहन व लालमन ने की है। उन लोगों के खिलाफ आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया। पुलिस ने घटना में आरोपित किए गए सुंदरलाल को पुलिस ने पहले ही निर्दोष साबित किया था। यह मामला अपर जिला जज कक्ष संख्या- 6 संजय कुमार मिश्र की अदालत में विचाराधीन था। अभियोजन की तरफ से मुकदमे की पैरवी अपर जिला शासकीय अधिकारी दिनेश चंद्र केसरवानी ने की। सरकारी वकील ने सात लोगों की गवाही कराई। कोर्ट ने सभी पक्ष को सुनने के बाद लालमन को बरी कर दिया। दोषी पाए गए हरिमोहन को आजीवन कारावास व 20 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया गया है। सजा सुनाए जाने के बाद कोर्ट मोहर्रिर ने हरिमोहन को कस्ट़डी में लेकर सजा भुगतने के लिए जेल भेज दिया।
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