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कौशांबी : उमेश की हत्या से जेहन में ताजा हो गई 18 साल पहले हुई घटना, केशव ने ग्रहण कराई थी भाजपा की सदस्यता

Sat, 25 Feb 2023 12:31 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, कौशांबी
अमर उजाला नेटवर्क, कौशांबी Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 25 Feb 2023 12:31 AM IST
सार

प्रयागराज के सुलेम सराय में शुक्रवार की शाम हुई उमेश पाल की हत्या को लेकर उनके समर्थक अक्रोशित हैं। इस वारदात ने एक बार फिर से 18 साल पहले हुई पूर्व विधायक राजू पाल की हत्या की घटना को ताजा कर दिया है।

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incident of 18 years ago became fresh in the mind after the murder of Umesh, Keshav had accepted the membershi
Kaushambi : उमेश पाल ने डिप्टी सीएम केशव के समक्ष ग्रहण की थी भाजपा की सदस्यता। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

प्रयागराज के सुलेम सराय में शुक्रवार की शाम हुई उमेश पाल की हत्या को लेकर उनके समर्थक अक्रोशित हैं। इस वारदात ने एक बार फिर से 18 साल पहले हुई पूर्व विधायक राजू पाल की हत्या की घटना को ताजा कर दिया है। उमेश पाल के समर्थक उन्हें समाज के नजरिए से दूसरा राजू पाल मानते थे। जैसे ही उनके समर्थकों को इस सनसनीखेज वारदात की जानकारी हुई सभी स्तब्ध और आक्रोशित हैं। नाराज समर्थकों ने 24 घंटे के भीतर हत्यारोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।

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सुलेम सराय निवासी अधिवक्ता उमेश पाल शहर पश्चिमी के पूर्व विधायक राजू पाल के मौसेरे भाई थे। वर्ष 2005 में बहुचर्चित राजू पाल हत्याकांड में वह मुख्य गवाह थे। वर्तमान समय में वह भारतीय जनता पार्टी की राजनीति करते थे। पिछले वर्ष डिप्टी सीएम केशव मौर्य ने सिराथू स्थित अपने चुनाव कार्योलय में उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई थी। शुक्रवार की शाम जैसे ही उनकी हत्या किए जाने की सूचना मिली सनसनी फैल गई। उनके समर्थक अक्रोशित हो गए।

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कौशाम्बी के चायल इलाके में रहने वाले सैकड़ों समर्थक घटना को लेकर बाहुबली अतीक अहमद और अशरफ पर हत्या का आरोप लगाना शुरू कर दिया। होल्कर सेना के प्रदेश अध्यक्ष एवं साथी अधिवक्ता विवेक पाल टाइगर, सचिव सुग्गन पाल, जिलाध्यक्ष शिवब्रत पाल, रामसागर पाल आदि समर्थकों ने सोशल मीडिया पर चेतावनी भी दिया कि 24 घंटे के अंदर उमेश पाल के हत्यारों को गिरफ्तार किया जाए। ऐसा नहीं होने पर समर्थकों ने एक बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है। समर्थकों का कहना है कि उमेश पाल इस समय समाज के लिए दूसरे राजू पाल के रूप में थे। इस घटना ने 18 साल पहले हुई राजू पाल की हत्या को ताजा कर दिया है।

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