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वेतन भुगतान मामले में फंस सकते हैं पूर्व एसडीएम
ब्यूरो/अमर उजाला कौशाम्बी
Updated Sat, 17 Jan 2015 12:45 AM IST
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मंझनपुर। सिराथू के पूर्व एसडीएम राम सिंह को नगर पंचायत सिराथू में प्रशासक रहने के दौरान विकास कार्यों में धांधली महंगी पड़ सकती है। आरोप है कि बगैर काम कराए ही भुगतान करा लिया गया है। कर्मचारियों को कई-कई महीनों के वेतन का दोहरा भुगतान करा लिया गया है। पूर्व चेयरमैन ने लोकायुक्त से मामले की शिकायत की थी। अफसरों की प्रारंभिक जांच में गड़बड़झाला सामने आया है। शासन ने मंडलायुक्त को जांच करने का निर्देश दिया है। कमिश्नर ने जिलाधिकारी को मामले की स्थलीय जांच करने को कहा है।
तत्कालीन उपजिलाधिकारी राम सिंह को वित्तीय वर्ष 2009 में नगर पंचायत सिराथू का प्रशासक बनाया गया था। विभागीय सूत्रों के मुताबिक प्रशासक रहने के दौरान पूर्व एसडीएम ने विकास कार्यों में जमकर घोटाला किया था। बगैर सत्यापन के विभिन्न विकास कार्यों का धड़ल्ले से भुगतान करके रकम उड़ाई गई थी। कर्मचारियों को कई-कई महीने के वेतन का दोहरा भुगतान किया गया था। ज्यादातर विकास कार्यों की कार्यपूर्ति कागज पर दर्ज करके रकम हड़पी गई थी।
पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष मुन्नालाल गुप्ता ने लोकायुक्त, नगर विकास मंत्री और मंडलायुक्त से शिकायत की थी। शासन ने टीम भेजकर मामले की जांच कराई थी। अफसरों की प्रारंभिक जांच में गड़बड़झाला सामने आया है। टीम ने अपनी जांच रिपोर्ट शासन को सौंप दी है। रिपोर्ट के आधार पर शासन ने मंडलायुक्त बीके सिंह को एक बार मामले की स्थलीय जांच करने का निर्देेश दिया है। कमिशभनर ने जिलाधिकारी को जांच करने को कहा है। मामले में डीएम राजमणि यादव का कहना है कि मामले की जांच की जाएगी। इसके बाद जांच रिपोर्ट मंडलायुक्त के माध्यम से शासन को भेजी जाएगी।
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तत्कालीन उपजिलाधिकारी राम सिंह को वित्तीय वर्ष 2009 में नगर पंचायत सिराथू का प्रशासक बनाया गया था। विभागीय सूत्रों के मुताबिक प्रशासक रहने के दौरान पूर्व एसडीएम ने विकास कार्यों में जमकर घोटाला किया था। बगैर सत्यापन के विभिन्न विकास कार्यों का धड़ल्ले से भुगतान करके रकम उड़ाई गई थी। कर्मचारियों को कई-कई महीने के वेतन का दोहरा भुगतान किया गया था। ज्यादातर विकास कार्यों की कार्यपूर्ति कागज पर दर्ज करके रकम हड़पी गई थी।
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पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष मुन्नालाल गुप्ता ने लोकायुक्त, नगर विकास मंत्री और मंडलायुक्त से शिकायत की थी। शासन ने टीम भेजकर मामले की जांच कराई थी। अफसरों की प्रारंभिक जांच में गड़बड़झाला सामने आया है। टीम ने अपनी जांच रिपोर्ट शासन को सौंप दी है। रिपोर्ट के आधार पर शासन ने मंडलायुक्त बीके सिंह को एक बार मामले की स्थलीय जांच करने का निर्देेश दिया है। कमिशभनर ने जिलाधिकारी को जांच करने को कहा है। मामले में डीएम राजमणि यादव का कहना है कि मामले की जांच की जाएगी। इसके बाद जांच रिपोर्ट मंडलायुक्त के माध्यम से शासन को भेजी जाएगी।
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