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नाम की हैं नगर पंचायत अध्यक्ष
ब्यूरो/अमर उजाला कौशाम्बी
Updated Fri, 20 Feb 2015 12:44 AM IST
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अजुहा। नगर पंचायत अजुहा की अध्यक्ष सीट पिछड़ी जाति महिला के लिए आरक्षित थी। इससे अध्यक्ष पद पर शांति कुशवाहा निर्वाचित हुई हैं। पर, वे सिर्फ नाम की ही अध्यक्ष हैं। अध्यक्ष का सारा कामकाज उनके पति ओम प्रकाश कुशवाहा ही संभालते हैं। नगर की अध्यक्ष होने के बाद भी कस्बे में घूमकर लोगों की समस्याएं जानना, उनके दूर करना कतई गंवारा नहीं है। आलम यह है कि नगर के विकास के लिए भी बतौर अध्यक्ष सारे फैसले उनके पति ही खुद-ब-खुद लेते हैं।
नगर के सभासद भी इन बातों से वाकिफ हैं। पर, वे भी कभी इसका विरोध नहीं करते हैं। वहीं स्थानीय लोग बताते हैं कि अध्यक्ष कभी कभार यानि खास मौके जैसे सदन की बैठक या राष्ट्रीय पर्वों पर ही कार्यालय जाती हैं। खुद अध्यक्ष बताती हैं कि महिला सीट पर पति ने उनके नाम पर चुनाव लड़ा है। अब उन्हें राजनीति की बावत ज्यादा जानकारी नहीं है। ऐसे में यदि उनके पति कामकाज संभालते हैं, तो इसमें गलत क्या है।
अध्यक्ष जैसा ही नगर की चार महिला सभासदोें का भी हाल है। वार्ड नंबर तीन से सभासद चुनी गईं छेद्दी देवी पत्नी अशोक गौतम, वार्ड नंबर छह कृष्णानगर से जीती मीना यादव पत्नी मनोज यादव, वार्ड नंबर आठ गांधी नगर से जीती शांति गुप्ता पत्नी नंद किशोर, वार्ड नंबर नौ से जीती शांति सिंह पत्नी राम किंकर सिंह भी पूरी तरह से रबर स्टैंप ही बनी हुई हैं। ये महिला सभासद तो कभी बैठक तक में शामिल नहीं होती हैं। वार्ड नंबर नौ की सभासद शांति सिंह के बेटे पीयूष सिंह अपनी मां का कामकाज संभालते हैं। जबकि अन्य तीन महिला सभासदों का कामकाज उनके पति देखते हैं।
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नगर पंचायत अजुहा की अध्यक्ष शांति कुशवाहा कहती हैं कि महिला होने के नाते वे उतनी दौड़-धूप नहीं कर सकती हैं, जितना एक अध्यक्ष से जनता अपेक्षा करती है। ऐसे में वे और उनके पति दोनोें मिलकर जनता की सेवा करते हैं। साथ ही वह भी जोड़ती हैं कि जनता ने उन्हें नहीं बल्कि उनके पति के नाम पर ही उन्हें वोट दिया है। चुनाव से पहले तक तो कस्बे के लोग उन्हें देखे और जानते तक नहीं थे।
नगर पंचायत अध्यक्ष और सभासदों की अनदेखी से अजुहा कस्बे में सफाई, जलनिकासी, रास्ते जैसी समस्याएं भी बनी हुई हैं। कस्बे के वार्ड नंबर 11 की तो स्थिति सबसे ज्यादा बदहाल है। यहां कई साल से नाली क्षतिग्रस्त पड़ी है। इससे लोगों के घरों से निकलने वाला पानी रास्ते में ही बहता रहता है। इससे लोगों को कीचड़-पानी से भरे रास्ते से आने-जाने की मजबूरी झेलनी पड़ती है। वहीं गंदगी के कारण जाड़े की मौसम में भी मच्छरों की भरमार हैं। लोग बताते हैं कि शिकायत के बाद भी समस्या का समाधान नहीं किया जा रहा है। इससे गर्मी के मौसम में तो लोग संक्रामक बीमारी फैलने की आशंका से भयभीत रहते हैं।
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नगर के सभासद भी इन बातों से वाकिफ हैं। पर, वे भी कभी इसका विरोध नहीं करते हैं। वहीं स्थानीय लोग बताते हैं कि अध्यक्ष कभी कभार यानि खास मौके जैसे सदन की बैठक या राष्ट्रीय पर्वों पर ही कार्यालय जाती हैं। खुद अध्यक्ष बताती हैं कि महिला सीट पर पति ने उनके नाम पर चुनाव लड़ा है। अब उन्हें राजनीति की बावत ज्यादा जानकारी नहीं है। ऐसे में यदि उनके पति कामकाज संभालते हैं, तो इसमें गलत क्या है।
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अध्यक्ष जैसा ही नगर की चार महिला सभासदोें का भी हाल है। वार्ड नंबर तीन से सभासद चुनी गईं छेद्दी देवी पत्नी अशोक गौतम, वार्ड नंबर छह कृष्णानगर से जीती मीना यादव पत्नी मनोज यादव, वार्ड नंबर आठ गांधी नगर से जीती शांति गुप्ता पत्नी नंद किशोर, वार्ड नंबर नौ से जीती शांति सिंह पत्नी राम किंकर सिंह भी पूरी तरह से रबर स्टैंप ही बनी हुई हैं। ये महिला सभासद तो कभी बैठक तक में शामिल नहीं होती हैं। वार्ड नंबर नौ की सभासद शांति सिंह के बेटे पीयूष सिंह अपनी मां का कामकाज संभालते हैं। जबकि अन्य तीन महिला सभासदों का कामकाज उनके पति देखते हैं।
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नगर पंचायत अजुहा की अध्यक्ष शांति कुशवाहा कहती हैं कि महिला होने के नाते वे उतनी दौड़-धूप नहीं कर सकती हैं, जितना एक अध्यक्ष से जनता अपेक्षा करती है। ऐसे में वे और उनके पति दोनोें मिलकर जनता की सेवा करते हैं। साथ ही वह भी जोड़ती हैं कि जनता ने उन्हें नहीं बल्कि उनके पति के नाम पर ही उन्हें वोट दिया है। चुनाव से पहले तक तो कस्बे के लोग उन्हें देखे और जानते तक नहीं थे।
नगर पंचायत अध्यक्ष और सभासदों की अनदेखी से अजुहा कस्बे में सफाई, जलनिकासी, रास्ते जैसी समस्याएं भी बनी हुई हैं। कस्बे के वार्ड नंबर 11 की तो स्थिति सबसे ज्यादा बदहाल है। यहां कई साल से नाली क्षतिग्रस्त पड़ी है। इससे लोगों के घरों से निकलने वाला पानी रास्ते में ही बहता रहता है। इससे लोगों को कीचड़-पानी से भरे रास्ते से आने-जाने की मजबूरी झेलनी पड़ती है। वहीं गंदगी के कारण जाड़े की मौसम में भी मच्छरों की भरमार हैं। लोग बताते हैं कि शिकायत के बाद भी समस्या का समाधान नहीं किया जा रहा है। इससे गर्मी के मौसम में तो लोग संक्रामक बीमारी फैलने की आशंका से भयभीत रहते हैं।