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जांच में फेल हो गया संकर धान, सरकारी केंद्रों पर नहीं होगी खरीद
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Hybrid paddy failed in investigation, will not buy at government centers
- फोटो : KAUSHAMBI
प्रशासन ने किसानों को प्रोत्साहन देकर पहले तो संकर धान की खेती कराई, अब मानकों का हवाला देकर खरीद से हाथ खडे़ कर दिए। दरअसल यह धान मानक पर खरा नहीं उतर रहा है। निर्धारित मानक 67 किलो के मुकाबले इस धान में प्रति क्विंटल 58 किग्रा ही चावल निकल रहा है। इसके चलते सरकार ने समर्थन मूल्य पर इस धान को खरीदने से इनकार कर दिया है। जिले के किसानों ने 35 फीसदी रकबे में इसी धान की बुवाई की थी। इस वजह से परेशानी बढ़ गई है। अब उपज बेचने के लिए किसान इधर-उधर भटक रहे हैं।
जिले में इस बार 46 हजार हेक्टयेर क्षेत्रफल में धान की खेती की गई थी। बुवाई के समय सरकार ने किसानों को सब्सिडी देकर शंकर बीज 6444 (हाइब्रिड) की बुवाई लिए प्रोत्साहित किया। इसके बाद जिले के 17 हजार हेक्टयेर क्षेत्रफल (कुल क्षेत्रफल का करीब 35 फीसदी रकबा) में किसानों ने संकर धान ही बो दिया। अब फैसल तैयार होकर कटने लगी तो इस धान के खरीददार नहीं मिल रहे हैं।
सरकार की ओर से धान खरीद के लिए खोले गए 31 केंद्रों पर उपज लेकर पहुंचने वाले किसानों को धान को मानक पर खरा नहीं उतरने का हवाला देकर प्रभारी लौटा दे रहे हैं। दरअसल सरकार ने प्रति क्विंटल 67 किलो चावल निकलने वाले धान को ही खरीदने की अनुमति दी है। समस्या को देखते हुए डीएम अमित कुमार सिंह ने चार दिन पहले सिराथू और मंझनपुर तहसील क्षेत्र के केंद्रों में टीम भेजकर संकर धान की टेस्टिंग कराई। सिराथू क्षेत्र के शंकर धान में प्रति कुंतल 58.40 किलो और मंझनपुर इलाके में 57.40 किलो चावल निकला। डीएम ने वीडियो कांफ्रेंसिंग में प्रमुख सचिव को समस्या से अवगत कराया। इसके बाद भी किसानों की समस्या का समाधान नहीं हो सका।
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15 दिन में सिर्फ 1.1 फीसदी हुई धान खरीद
मंझनपुर। शासन ने इस बार पखवाड़े भर पहले ही 15 अक्तूबर से धान खरीद शुरू करा दी। 15 दिन गुजरने के बावजूद अभी तक केवल 700 एमटी ही धान की खरीद हो सकी है। जो निर्धारित लक्ष्य 55 हजार एमटी के सापेक्ष सिर्फ 1.1 फीसदी है।
शासन ने खरीद के लिए 67 किलो प्रति कुंतल चावल निकलने वाले धान का मानक तय किया है। जबकि टेस्टिंग में हाइब्रिड धान 6444 में प्रति क्विंटल औसतन 58 किलो ही चावल निकल रहा है। किसानों की समस्या को देखते हुए शासन को पत्राचार किया गया है।
अमित कुमार सिंह-डीएम
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जिले में इस बार 46 हजार हेक्टयेर क्षेत्रफल में धान की खेती की गई थी। बुवाई के समय सरकार ने किसानों को सब्सिडी देकर शंकर बीज 6444 (हाइब्रिड) की बुवाई लिए प्रोत्साहित किया। इसके बाद जिले के 17 हजार हेक्टयेर क्षेत्रफल (कुल क्षेत्रफल का करीब 35 फीसदी रकबा) में किसानों ने संकर धान ही बो दिया। अब फैसल तैयार होकर कटने लगी तो इस धान के खरीददार नहीं मिल रहे हैं।
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सरकार की ओर से धान खरीद के लिए खोले गए 31 केंद्रों पर उपज लेकर पहुंचने वाले किसानों को धान को मानक पर खरा नहीं उतरने का हवाला देकर प्रभारी लौटा दे रहे हैं। दरअसल सरकार ने प्रति क्विंटल 67 किलो चावल निकलने वाले धान को ही खरीदने की अनुमति दी है। समस्या को देखते हुए डीएम अमित कुमार सिंह ने चार दिन पहले सिराथू और मंझनपुर तहसील क्षेत्र के केंद्रों में टीम भेजकर संकर धान की टेस्टिंग कराई। सिराथू क्षेत्र के शंकर धान में प्रति कुंतल 58.40 किलो और मंझनपुर इलाके में 57.40 किलो चावल निकला। डीएम ने वीडियो कांफ्रेंसिंग में प्रमुख सचिव को समस्या से अवगत कराया। इसके बाद भी किसानों की समस्या का समाधान नहीं हो सका।
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15 दिन में सिर्फ 1.1 फीसदी हुई धान खरीद
मंझनपुर। शासन ने इस बार पखवाड़े भर पहले ही 15 अक्तूबर से धान खरीद शुरू करा दी। 15 दिन गुजरने के बावजूद अभी तक केवल 700 एमटी ही धान की खरीद हो सकी है। जो निर्धारित लक्ष्य 55 हजार एमटी के सापेक्ष सिर्फ 1.1 फीसदी है।
शासन ने खरीद के लिए 67 किलो प्रति कुंतल चावल निकलने वाले धान का मानक तय किया है। जबकि टेस्टिंग में हाइब्रिड धान 6444 में प्रति क्विंटल औसतन 58 किलो ही चावल निकल रहा है। किसानों की समस्या को देखते हुए शासन को पत्राचार किया गया है।
अमित कुमार सिंह-डीएम
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