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Kaushambi News: पांच एंबुलेंस के भरोसे 6.45 लाख मवेशियों की सेहत, पशुपालक परेशान
Fri, 19 Jun 2026 11:51 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Fri, 19 Jun 2026 11:51 PM IST
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क्षेत्र में एंबुलेंस-1962 से पशुओं के इलाज के लिए पहुंची डॉक्टर की टीम। स्त्रोत: विभाग
6.45 लाख पशुओं की सेहत फिलहाल महज पांच एंबुलेंस के भरोसे है। यह सेवा भी सुबह नौ बजे से शाम पांच बजे तक ही मिलती है। शाम पांच बजे के बाद पशु के बीमार होने पर पशुपालकों को अगले दिन सुबह नौ बजे का इंतजार करना होगा।
हालांकि इन पांच एंबुलेंस सुविधा का लाभ लेने के लिए पशुपालक टोल फ्री नंबर 1962 का इस्तेमाल कर सकते हैं। एंबुलेंस के माध्यम से कृत्रिम गर्भाधान की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है।
डिप्टी मुख्य चिकित्सा अधिकारी राकेश कुमार ने बताया कि जिले को मंझनपुर, सिराथू, नेवादा, मूरतगंज और सरसवां जोन में बांटकर पांच एंबुलेंस तैनात की गई हैं। प्रत्येक एंबुलेंस में एक पशु चिकित्सक और एक सहायक मौजूद रहता है। चिकित्सक 15 दिन गांवों में भ्रमण कर सेवाएं देते हैं, जबकि शेष 15 दिन आकस्मिक सेवाओं के लिए तैनात रहते हैं।
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तीन वर्षों में एक भी नहीं शामिल हो सकीं नई एंबुलेंस
पिछले तीन वर्षों से संचालित इस व्यवस्था में अब तक एक भी नई एंबुलेंस शामिल नहीं हो सकी है। इससे बढ़ती जरूरतों के बीच सेवा पर दबाव बढ़ता जा रहा है। विभाग को उम्मीद है कि जल्द ही तीन और एंबुलेंस मिलने के बाद सभी आठ ब्लॉकों में एक-एक वाहन उपलब्ध कराया जा सकेगा।
सरकार की ओर से जिले में फिलहाल पांच पशु एंबुलेंस उपलब्ध कराई गई है। तीन और एंबुलेंस मिलने की प्रक्रिया चल रही है। इनके आने के बाद सभी ब्लॉकों में एक-एक एंबुलेंस तैनात कर पशुओं को बेहतर और समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। - डॉ. अशोक कुमार, जिला पशु चिकित्साधिकारी
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हालांकि इन पांच एंबुलेंस सुविधा का लाभ लेने के लिए पशुपालक टोल फ्री नंबर 1962 का इस्तेमाल कर सकते हैं। एंबुलेंस के माध्यम से कृत्रिम गर्भाधान की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है।
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डिप्टी मुख्य चिकित्सा अधिकारी राकेश कुमार ने बताया कि जिले को मंझनपुर, सिराथू, नेवादा, मूरतगंज और सरसवां जोन में बांटकर पांच एंबुलेंस तैनात की गई हैं। प्रत्येक एंबुलेंस में एक पशु चिकित्सक और एक सहायक मौजूद रहता है। चिकित्सक 15 दिन गांवों में भ्रमण कर सेवाएं देते हैं, जबकि शेष 15 दिन आकस्मिक सेवाओं के लिए तैनात रहते हैं।
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तीन वर्षों में एक भी नहीं शामिल हो सकीं नई एंबुलेंस
पिछले तीन वर्षों से संचालित इस व्यवस्था में अब तक एक भी नई एंबुलेंस शामिल नहीं हो सकी है। इससे बढ़ती जरूरतों के बीच सेवा पर दबाव बढ़ता जा रहा है। विभाग को उम्मीद है कि जल्द ही तीन और एंबुलेंस मिलने के बाद सभी आठ ब्लॉकों में एक-एक वाहन उपलब्ध कराया जा सकेगा।
सरकार की ओर से जिले में फिलहाल पांच पशु एंबुलेंस उपलब्ध कराई गई है। तीन और एंबुलेंस मिलने की प्रक्रिया चल रही है। इनके आने के बाद सभी ब्लॉकों में एक-एक एंबुलेंस तैनात कर पशुओं को बेहतर और समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। - डॉ. अशोक कुमार, जिला पशु चिकित्साधिकारी