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Kaushambi News: गराैली... तीन पीढ़ियों ने पीटा लोहा, तब निखरी गांव की किस्मत

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 22 May 2025 12:37 AM IST
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Garaoli... Three generations beat iron, then the fortunes of the village improved
गरौली गांव में कारीगरों के द्वारा बनाई गई कढ़ाई। संवाद
राम वनगमन मार्ग पर बसे गरौली गांव में घर-घर लोहे के बर्तन बनाने का कारखाना चलता है। यहां 25 परिवार तीन पीढ़ियों से लोहे को पीटकर गांव की किस्मत बदल रहे हैं। यहां बनी कड़ाही और खुरपी समेत लोहे के अन्य सामानों की कई जिलों में मांग है। महाकुंभ में भी बर्तनों की पूर्ति का बड़ा हिस्सा यहीं से भेजा गया था।
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सरसवां ब्लॉक मुख्यालय से सटे गरौली में लोग बर्तन बनाने के कुटीर उद्योग संग खेती-किसानी और पशुपालन भी करते हैं। इस गांव के करीब 25 परिवार कानपुर से इस्पात लाकर भट्टी में गलाते हैं। इसके बाद इन्हें हाथों से पीटकर कड़ाही, फावड़ा, चिमटा, कड़ाहा, तवा, हंसिया व खुरपी समेत अन्य सामान बनाते हैं। काम करने वाले लोगों का कहना है कि लोहे को पीटा है तब जाकर गांव की किस्मत बदली है। इस व्यवसाय से ठीकठाक आमदनी हो जाती है।
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गांव में बने लोहे के बर्तनों की चित्रकूट, बांदा, महोबा, प्रतापगढ़ और प्रयागराज समेत कई जिलों में मांग है। साथ ही राम वनगमन मार्ग से गुजरने वाले राहगीर भी गांव के लोगों से खरीदारी करते हैं।
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यहां के शारदा प्रसाद, सुरेंद्र कुमार व नोखेलाल ने बताया कि बर्तन बनाने का काम वह तीन पीढ़ियों से कर रहे हैं। इस साल महाकुंभ में अच्छी खासी बिक्री हुई थी। लेकिन, राम वनगमन मार्ग की जद में आने से कई कारीगरों के घर और दुकानें उजड़ गई हैं। इससे व्यापार में गिरावट आई है।

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गांव की समस्याएं
जल निकासी- सड़क निर्माण होने से घरों का पानी नहीं निकल पा रहा है।
जलभराव- गांव में जलभराव की समस्या बनी रहती है।
सड़क- गांव के मुख्य मार्ग से प्राइमरी स्कूल तक जाने वाली सड़क बदहाल है।
बरात घर- गांव में शादी-ब्याह सहित अन्य आयोजनों के लिए बरात घर नहीं है।
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कुल आबादी - 1300
महिला - 520
पुरुष - 780
स्नातक - 20
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जल निकासी की गंभीर समस्या है। जल जीवन मिशन के तहत पाइप लाइन के लिए खोदी गईं सड़कें दुरुस्त नहीं कराई गईं, आए दिन लोग गिरकर चोटिल होते रहते हैं। --धीर सिंह यादव, ग्राम प्रधान

गरौली गांव में कारीगरों के द्वारा बनाई गई कढ़ाई।  संवाद

गरौली गांव में कारीगरों के द्वारा बनाई गई कढ़ाई। संवाद

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