{"_id":"5e5976fc8ebc3ef3c13d8f7c","slug":"gangabhakt-serving-piligrim-kaushambi-news-ald269789163","type":"story","status":"publish","title_hn":"अकीदतमंदों को शर्बत पिला रहा गंगा भक्त","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अकीदतमंदों को शर्बत पिला रहा गंगा भक्त
विज्ञापन
कड़ा। देश में नागरिकता कानून को लेकर हिंदू-मुस्लिम एकता भंग करने वालों के लिए कड़ा निवासी विनय पंडा मिसाल हैं। मां गंगा के परम भक्त होकर वह ख्वाजा कड़क शाह के उर्स में पहुंचने वाले मुस्लिमों को सर्बत, पानी और चाय पिला रहे हैं। इस काम में कई और हिंदू धर्म के लोग भी उनके साथ रहते हैं। दोनों समाज के लोग हिंदू-मुस्लिम एकता की मिशाल पेश करने वाले इन समाजसेवकों की सराहना कर रहे हैं।
सीएए (नागरिकता संशोधन कानून) का देश भर में विरोध हो रहा है। राजधानी दिल्ली सहित कई राज्यों में उपद्रवी दंगे भड़काकर हिंदू-मुस्लिम एकता भंग करने की कोशिश कर रहे हैं। इन सबके बीच कड़ा निवासी विनय पंडा स्थानीय गांव स्थित ख्वाजा कड़क शाह के उर्स में इन दिनों प्रतिदिन कैंप लगाकर जायरीनों को सर्बत, पानी और चाय पिला रहे हैं। तीन दिवसीय उर्स का शुक्रवार को आखिरी दिन था। विनय ने तीनों दिन कैंप लगाया। उनके साथ हंस पांडेय, विनोद कसेरा, गिरि गोसाई व विजय कुमार भी रहते हैं। गंगा-गोमती संस्थान के अध्यक्ष विनय ने बताया कि दोआबा की धरती सौहार्द का संगम है। मां शीतला दरबार, संत मलूकदास की गद्दी, पतित पावनीं गंगा एवं ख्वाजा कड़क शाह की मजार में पूर्वज भी सदियों से एक-दूसरे का सहयोग करते चले आए हैं। रामलीला, दशहरा, दीपावली, होली हो या ईद-बकरीद, सभी धर्म के लोग मिलकर मनाते हैं। आने वाली पीढिय़ां भी इस रश्म को बरकरार रखें, इसीलिए ऐसा किया जा रहा है। दरगाह के मुतवल्ली वाली असरफ सहित अन्य सामाजिक लोगों ने विनय व उनके सहयोगियों को सराहा है।
विज्ञापन
सीएए (नागरिकता संशोधन कानून) का देश भर में विरोध हो रहा है। राजधानी दिल्ली सहित कई राज्यों में उपद्रवी दंगे भड़काकर हिंदू-मुस्लिम एकता भंग करने की कोशिश कर रहे हैं। इन सबके बीच कड़ा निवासी विनय पंडा स्थानीय गांव स्थित ख्वाजा कड़क शाह के उर्स में इन दिनों प्रतिदिन कैंप लगाकर जायरीनों को सर्बत, पानी और चाय पिला रहे हैं। तीन दिवसीय उर्स का शुक्रवार को आखिरी दिन था। विनय ने तीनों दिन कैंप लगाया। उनके साथ हंस पांडेय, विनोद कसेरा, गिरि गोसाई व विजय कुमार भी रहते हैं। गंगा-गोमती संस्थान के अध्यक्ष विनय ने बताया कि दोआबा की धरती सौहार्द का संगम है। मां शीतला दरबार, संत मलूकदास की गद्दी, पतित पावनीं गंगा एवं ख्वाजा कड़क शाह की मजार में पूर्वज भी सदियों से एक-दूसरे का सहयोग करते चले आए हैं। रामलीला, दशहरा, दीपावली, होली हो या ईद-बकरीद, सभी धर्म के लोग मिलकर मनाते हैं। आने वाली पीढिय़ां भी इस रश्म को बरकरार रखें, इसीलिए ऐसा किया जा रहा है। दरगाह के मुतवल्ली वाली असरफ सहित अन्य सामाजिक लोगों ने विनय व उनके सहयोगियों को सराहा है।
विज्ञापन