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पहली बार बनी करारी सीट पर बनते-बनते रह गया था कांग्रेस का विधायक
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विधानसभा चुनावों के इतिहास में ऐसा पांच बार हुआ कि प्रत्याशी विधायक बनते-बनते रह गए। वह भी चंद वोटों के अंतर से। 1962 के विधानसभा चुनाव में पहली बार बनी करारी सीट पर कांग्रेस को मामूली अंतर से हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद 1969 में चायल, 1974 में सिराथू व मंझनपुर सीट पर, 1980 में मंझनपुर व 2002 सिराथू और मंझनपुर में तथा 2012 में चायल सीट पर कांटे की टक्कर देखने को मिली।
1962 का विस चुनाव सीट मंझनपुर
आंकड़ों पर गौर करें तो इन चुनावों में अब तक सबसे नजदीकी और कांटे की टक्कर करारी सीट पर देखने को मिली है। जनसंघ के प्रत्याशी नाथू राम शिक्षक ने कांग्रेस प्रत्याशी डॉ. जवाहर लाल को हराया था। चुनाव में नाथू राम शिक्षक को 8796 वोट मिले थे। जबकि डॉ. जवाहर लाल को 8632 मतों से संतोष करना पड़ा था। हार का अंतर सिर्फ 164 वोट का था।
1969 का विस चुनाव सीट चायल
बीजेएस प्रत्याशी रहे कन्हैया लाल सोनकर को चुनाव में 12,236 वोट मिले थे। जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंदी रहे कांग्रेस प्रत्याशी जवाहर लाल को सिर्फ 11,301 मत मिले। जवाहर लाल सिर्फ 1035 मतों के अंतर से चुनाव हार गए।
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1974 का विस चुनाव सीट सिराथू
भारत क्रांति दल के प्रत्याशी बैजनाथ कुशवाहा को चुनाव में 11,557 मत मिले थे। उनके निकटतम प्रतिद्वंदी कांग्रेस उम्मीदवार रामचंद्र त्रिपाठी को मात्र 10,478 वोट से संतोष करना पड़ा था। चुनाव में हार का अंतर केवल 921 मतों का रहा।
1974 का विस चुनाव सीट मंझनपुर
-कांग्रेस प्रत्याशी धर्मवीर भारती और जनसंघ पार्टी के नाथू राम शिक्षक के बीच रोचक मुकाबला हुआ। चुनाव में कांग्रेस प्रत्यशी को 22,183 व जनसंघ उम्मीदवार को 20,212 वोट मिले। जनसंघ प्रत्याशी 1971 मतों के अंतर से चुनाव हार गए थे।
2012 का विस चुनाव सीट चायल
सूबे में सपा की आंधी के बीच चायल सीट पर मुकाबला कांटे का रहा। चुनाव में बसपा प्रत्याशी आशिफ जाफरी को 54,758 वोट मिले थे। वहीं सपा प्रत्याशी चंद्रबली पटेल को 53,431 मत मिले। रोमांचक मुकाबले में मात्र 1327 मतों के अंतर से सपा प्रत्याशी चुनाव हार गए।
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1962 का विस चुनाव सीट मंझनपुर
आंकड़ों पर गौर करें तो इन चुनावों में अब तक सबसे नजदीकी और कांटे की टक्कर करारी सीट पर देखने को मिली है। जनसंघ के प्रत्याशी नाथू राम शिक्षक ने कांग्रेस प्रत्याशी डॉ. जवाहर लाल को हराया था। चुनाव में नाथू राम शिक्षक को 8796 वोट मिले थे। जबकि डॉ. जवाहर लाल को 8632 मतों से संतोष करना पड़ा था। हार का अंतर सिर्फ 164 वोट का था।
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1969 का विस चुनाव सीट चायल
बीजेएस प्रत्याशी रहे कन्हैया लाल सोनकर को चुनाव में 12,236 वोट मिले थे। जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंदी रहे कांग्रेस प्रत्याशी जवाहर लाल को सिर्फ 11,301 मत मिले। जवाहर लाल सिर्फ 1035 मतों के अंतर से चुनाव हार गए।
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1974 का विस चुनाव सीट सिराथू
भारत क्रांति दल के प्रत्याशी बैजनाथ कुशवाहा को चुनाव में 11,557 मत मिले थे। उनके निकटतम प्रतिद्वंदी कांग्रेस उम्मीदवार रामचंद्र त्रिपाठी को मात्र 10,478 वोट से संतोष करना पड़ा था। चुनाव में हार का अंतर केवल 921 मतों का रहा।
1974 का विस चुनाव सीट मंझनपुर
-कांग्रेस प्रत्याशी धर्मवीर भारती और जनसंघ पार्टी के नाथू राम शिक्षक के बीच रोचक मुकाबला हुआ। चुनाव में कांग्रेस प्रत्यशी को 22,183 व जनसंघ उम्मीदवार को 20,212 वोट मिले। जनसंघ प्रत्याशी 1971 मतों के अंतर से चुनाव हार गए थे।
2012 का विस चुनाव सीट चायल
सूबे में सपा की आंधी के बीच चायल सीट पर मुकाबला कांटे का रहा। चुनाव में बसपा प्रत्याशी आशिफ जाफरी को 54,758 वोट मिले थे। वहीं सपा प्रत्याशी चंद्रबली पटेल को 53,431 मत मिले। रोमांचक मुकाबले में मात्र 1327 मतों के अंतर से सपा प्रत्याशी चुनाव हार गए।