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कोहरा और सर्द हवाओं ने किया बेहाल
कौशाम्बी ब्यूरो
Updated Sat, 30 Dec 2017 11:52 PM IST
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तीन दिन से पड़ रहे कोहरे की धुंध व सर्द हवाओं के चलते जिले के लोगों का हाल बेहाल हो गया है। शनिवार को दिन भर भगवान भाष्कर के दर्शन नहीं होने से लोग घरो में अलाव व दफ्तरों में हीटर से बदन सेंकते रहे। दिन भर कोहरा छाए रहने से लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त रहा। अधिकतर लोग ठंड से बचने के लिए दिन भर घरों में दुबके नजर आए।
जिले में तीन दिन से कड़ाके की ठंड पड़ रही। शुक्रवार दोपहर धूप निकलने से कुछ देर के लिए मौसम सामान्य हुआ पर तीन बजे के बाद जिला कोहरे की चादर में ढंका नजर आने लगा। शाम के छह बजते ही सड़कों पर पूरी तरह से सन्नाटा छा गया। शनिवार को तो बुरा हाल रहा। सुबह घना कोहरा होने के चलते लोगों को पता ही नहीं चल रहा था कि सुबह हुई कि नहीं। देर-सवेर उठे लोग कंपकंपाते हुए अपने कामों में लग गए। दिन भर सूर्यदेव के दर्शन नहीं होने से पूरा जिला ठंड से कांपता नजर आया। सबसे अधिक परेशानी सरकारी कार्यालयों में नौकरी करने वालों को हुई। वे एक से डेढ़ घंटे लेट अपने कार्यालय पहुंच सके। इसके बाद उन्हें घर लौटते वक्त भी कठिनाई का सामना करना पड़ा। शाम को घड़ी के चार बजते ही लोग अपने घरों में दुबक गए।
सड़कें पर दिखा अघोषित कर्फ्यू
हाड़कंपाऊ ठंड के कारण बहुत आवश्यक होने पर ही लोग घरों से निकले। इसके चलते सड़कें सूनी रहीं। दोपहर में एक से चार बजे के बीच महज तीन घंटे ही यदा-कदा लोग रोड पर दिखे। इस बीच मौसम को देखते हुए लोगों को घर जाने की जल्दी दिखी। इस वजह से बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा।
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दफ्तरों में पसरा रहा सन्नाटा
मौसम के खराब मिजाज के साथ ही साल, महीना और हफ्ते का आखिरी दिन होने के कारण दफ्तरों में सन्नाटा पसरा रहा। गैर जनपदों से आवागमन करने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों की उपस्थिति नाम-मात्र की ही रही। मुख्यालय के अधिकतर दफ्तरों में लिपिक अथवा चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ही दिखे। वह भी ठंड से ठिठुरते हुए घर जाने की जल्दी में रहे। मौसम की बेरुखी के कारण फरियादी भी नहीं दिखे।
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जिले में तीन दिन से कड़ाके की ठंड पड़ रही। शुक्रवार दोपहर धूप निकलने से कुछ देर के लिए मौसम सामान्य हुआ पर तीन बजे के बाद जिला कोहरे की चादर में ढंका नजर आने लगा। शाम के छह बजते ही सड़कों पर पूरी तरह से सन्नाटा छा गया। शनिवार को तो बुरा हाल रहा। सुबह घना कोहरा होने के चलते लोगों को पता ही नहीं चल रहा था कि सुबह हुई कि नहीं। देर-सवेर उठे लोग कंपकंपाते हुए अपने कामों में लग गए। दिन भर सूर्यदेव के दर्शन नहीं होने से पूरा जिला ठंड से कांपता नजर आया। सबसे अधिक परेशानी सरकारी कार्यालयों में नौकरी करने वालों को हुई। वे एक से डेढ़ घंटे लेट अपने कार्यालय पहुंच सके। इसके बाद उन्हें घर लौटते वक्त भी कठिनाई का सामना करना पड़ा। शाम को घड़ी के चार बजते ही लोग अपने घरों में दुबक गए।
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सड़कें पर दिखा अघोषित कर्फ्यू
हाड़कंपाऊ ठंड के कारण बहुत आवश्यक होने पर ही लोग घरों से निकले। इसके चलते सड़कें सूनी रहीं। दोपहर में एक से चार बजे के बीच महज तीन घंटे ही यदा-कदा लोग रोड पर दिखे। इस बीच मौसम को देखते हुए लोगों को घर जाने की जल्दी दिखी। इस वजह से बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा।
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दफ्तरों में पसरा रहा सन्नाटा
मौसम के खराब मिजाज के साथ ही साल, महीना और हफ्ते का आखिरी दिन होने के कारण दफ्तरों में सन्नाटा पसरा रहा। गैर जनपदों से आवागमन करने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों की उपस्थिति नाम-मात्र की ही रही। मुख्यालय के अधिकतर दफ्तरों में लिपिक अथवा चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ही दिखे। वह भी ठंड से ठिठुरते हुए घर जाने की जल्दी में रहे। मौसम की बेरुखी के कारण फरियादी भी नहीं दिखे।