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बर्खास्तगी के दस माह बाद जालसाज शिक्षिका पर एफआईआर दर्ज
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बर्खास्तगी के दस माह बाद जालसाज शिक्षिका पर एफआईआर दर्ज
भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा से बीएड की फेक डिग्री लगाकर नौकरी करने का आरोप
एसआईटी की जांच में पकड़े जाने पर तत्कालीन बीएसए ने अगस्त 2019 में कर दी थी सेवा समाप्त
संवाद न्यूज एजेंसी
मंझनपुर। बर्खास्तगी के दस माह बाद रविवार को नगर कोतवाली में एक जालसाज शिक्षिका के खिलाफ फ्राड का मुकदमा दर्ज किया गया। भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा से बीएड की फेक डिग्री लगाकर जिले के परिषदीय स्कूल में सहायक अध्यापिका रही इस महिला को एसआईटी की जांच के बाद अगस्त 2019 में तत्कालीन बीएसए ने बर्खास्त कर दिया था। रिपोर्ट दर्ज करने के बाद पुलिस ने मामले की पड़ताल शुरू कर दिया है।
बेसिक शिक्षा विभाग में फर्जीवाड़ा कर शिक्षक की नौकरी हासिल करने वालों की लंबी सूची है। सरकार ने वर्ष 2004-05 में डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय से जारी बीएड डिग्री के सहारे परिषदीय स्कूलों में नौकरी करने वालों की जांच कराई तो बड़े रैकेट का खुलासा हुआ। एसआईटी द्वारा प्रदेश भर के शिक्षकों की जांच में 4706 जालसाज पकड़े गए। इनमें से कुछ ने फेक तो कुछ ने टेंपर्ड डिग्री लगा रखी था। एसआईटी की जांच में जिले के परिषदीय स्कूलों में भी शिक्षक की नौकरी करने वाले 12 जालसाज पकड़े गए। इनमें से दस जालसाजों को तत्कालीन बीएसए स्वामी प्रसाद ने 22 अगस्त 2019 को ही बर्खास्त कर दिया था। साथ ही संबंधित खंड शिक्षाधिकारियों को आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराते हुए वेतन आदि रिकवरी कराने का निर्देश दिया था। सेवा समाप्ति के बावजूद जालसाज सेटिंग भिड़ा ले गए। नतीजतन उस दौरान केवल दो के खिलाफ ही रिपोर्ट दर्ज हो सकी थी। पिछले महीने हुई वीडियो कांफ्रेसिंग में अपर मुख्य सचिव ने बीएसए को फटकार लगाई तो एक बार फिर महकमा सक्रिय हो गया। बीएसए राजकुमार पंडित ने रिमाइंडर जारी कर अन्य जालसाजों के खिलाफ भी एफआईआर कराने का निर्देश दिया। नतीजतन एबीएसए सरसवां ने 30 जून को महेवाघाट कोतवाली में दो जालसाजों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी। इनके अलावा रविवार को खंड शिक्षाधिकारी मंझनपुर अवनीश सिंह की तहरीर पर नगर कोतवाली पुलिस ने अर्चना देवी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर लिया। एबीएसए ने बताया कि प्राइमरी स्कूल दीवर में सहायक अध्यापक के पद पर तैनात रही अर्चना देवी ने आगरा विश्विविद्यालय से संबद्घ एमयूटीटी कॉलेज एटा की फेक डिग्री लगाकर नौकरी कर रही थी। कोतवाल मनीष पांडेय का कहना है कि रिपोर्ट दर्ज कर मामले की छानबीन की जा रही है।
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अब तक पांच जालसाजों के खिलाफ हुई एफआईआर
मंझनपुर। भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा की डिग्री लगाकर जिले में नौकरी करने वाले 12 जालसाजों की सेवा समाप्त की जा चुकी है। मगर इनमें से अभी तक केवल सिराथू के डेबरामई प्राथमिक विद्यालय में तैनात रही शैलकुमारी खनवारी में तैनात रहे पुष्पराज सिंह, सरसवां के ननई का पूरा में सहायक अध्यापिका रही अर्चना सिंह, घोघ का पूरा के सहायक अध्यापक लवलेश द्विवेदी व दीवर में सहायक अध्यापिका रही अर्चना देवी के खिलाफ ही एफआईआर दर्ज कराई जा सकी है।
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इनके खिलाफ नहीं दर्ज कराई गई रिपोर्ट
मंझनपुर। चायल ब्लॉक के मीरपुर में सहायक अध्यापक रही सीमा यादव, कौशाम्बी के चक सतारगंज पूमावि के वृजेश्वर सिंह, प्राइमरी स्कूल सचवारा में तैनात रहे राजेश कुमार शुक्ला, सरसवां के बरौलहा प्राइमरी स्कूल के रावेंद्र सिंह, पूरबशरीरा के प्रधानाध्यापक रहे सुधीर कुमार, बाकरगंज स्कूल में सहायक अध्यापक रहे सुरजीत सिंह और मंझनपुर के गौसपुर टिकरी में शिक्षिका रही नूतन कुमारी की भी सेवा समाप्त की जा चुकी है। पर, बीएसए के निर्देश के बावजूद संबंधित खंड शिक्षाधिकारियों ने एफआईआर नहीं दर्ज कराई। विभागीय अफसरों के लचीलेपन का फायदा उठाकर इनमें से कुछ जालसाज अदालत चले गए हैं। बीएसए का कहना है कि इनमें से पांच लोगों का मामला कोर्ट में विचाराधीन है।
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भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा से बीएड की फेक डिग्री लगाकर नौकरी करने का आरोप
एसआईटी की जांच में पकड़े जाने पर तत्कालीन बीएसए ने अगस्त 2019 में कर दी थी सेवा समाप्त
संवाद न्यूज एजेंसी
मंझनपुर। बर्खास्तगी के दस माह बाद रविवार को नगर कोतवाली में एक जालसाज शिक्षिका के खिलाफ फ्राड का मुकदमा दर्ज किया गया। भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा से बीएड की फेक डिग्री लगाकर जिले के परिषदीय स्कूल में सहायक अध्यापिका रही इस महिला को एसआईटी की जांच के बाद अगस्त 2019 में तत्कालीन बीएसए ने बर्खास्त कर दिया था। रिपोर्ट दर्ज करने के बाद पुलिस ने मामले की पड़ताल शुरू कर दिया है।
बेसिक शिक्षा विभाग में फर्जीवाड़ा कर शिक्षक की नौकरी हासिल करने वालों की लंबी सूची है। सरकार ने वर्ष 2004-05 में डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय से जारी बीएड डिग्री के सहारे परिषदीय स्कूलों में नौकरी करने वालों की जांच कराई तो बड़े रैकेट का खुलासा हुआ। एसआईटी द्वारा प्रदेश भर के शिक्षकों की जांच में 4706 जालसाज पकड़े गए। इनमें से कुछ ने फेक तो कुछ ने टेंपर्ड डिग्री लगा रखी था। एसआईटी की जांच में जिले के परिषदीय स्कूलों में भी शिक्षक की नौकरी करने वाले 12 जालसाज पकड़े गए। इनमें से दस जालसाजों को तत्कालीन बीएसए स्वामी प्रसाद ने 22 अगस्त 2019 को ही बर्खास्त कर दिया था। साथ ही संबंधित खंड शिक्षाधिकारियों को आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराते हुए वेतन आदि रिकवरी कराने का निर्देश दिया था। सेवा समाप्ति के बावजूद जालसाज सेटिंग भिड़ा ले गए। नतीजतन उस दौरान केवल दो के खिलाफ ही रिपोर्ट दर्ज हो सकी थी। पिछले महीने हुई वीडियो कांफ्रेसिंग में अपर मुख्य सचिव ने बीएसए को फटकार लगाई तो एक बार फिर महकमा सक्रिय हो गया। बीएसए राजकुमार पंडित ने रिमाइंडर जारी कर अन्य जालसाजों के खिलाफ भी एफआईआर कराने का निर्देश दिया। नतीजतन एबीएसए सरसवां ने 30 जून को महेवाघाट कोतवाली में दो जालसाजों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी। इनके अलावा रविवार को खंड शिक्षाधिकारी मंझनपुर अवनीश सिंह की तहरीर पर नगर कोतवाली पुलिस ने अर्चना देवी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर लिया। एबीएसए ने बताया कि प्राइमरी स्कूल दीवर में सहायक अध्यापक के पद पर तैनात रही अर्चना देवी ने आगरा विश्विविद्यालय से संबद्घ एमयूटीटी कॉलेज एटा की फेक डिग्री लगाकर नौकरी कर रही थी। कोतवाल मनीष पांडेय का कहना है कि रिपोर्ट दर्ज कर मामले की छानबीन की जा रही है।
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अब तक पांच जालसाजों के खिलाफ हुई एफआईआर
मंझनपुर। भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा की डिग्री लगाकर जिले में नौकरी करने वाले 12 जालसाजों की सेवा समाप्त की जा चुकी है। मगर इनमें से अभी तक केवल सिराथू के डेबरामई प्राथमिक विद्यालय में तैनात रही शैलकुमारी खनवारी में तैनात रहे पुष्पराज सिंह, सरसवां के ननई का पूरा में सहायक अध्यापिका रही अर्चना सिंह, घोघ का पूरा के सहायक अध्यापक लवलेश द्विवेदी व दीवर में सहायक अध्यापिका रही अर्चना देवी के खिलाफ ही एफआईआर दर्ज कराई जा सकी है।
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इनके खिलाफ नहीं दर्ज कराई गई रिपोर्ट
मंझनपुर। चायल ब्लॉक के मीरपुर में सहायक अध्यापक रही सीमा यादव, कौशाम्बी के चक सतारगंज पूमावि के वृजेश्वर सिंह, प्राइमरी स्कूल सचवारा में तैनात रहे राजेश कुमार शुक्ला, सरसवां के बरौलहा प्राइमरी स्कूल के रावेंद्र सिंह, पूरबशरीरा के प्रधानाध्यापक रहे सुधीर कुमार, बाकरगंज स्कूल में सहायक अध्यापक रहे सुरजीत सिंह और मंझनपुर के गौसपुर टिकरी में शिक्षिका रही नूतन कुमारी की भी सेवा समाप्त की जा चुकी है। पर, बीएसए के निर्देश के बावजूद संबंधित खंड शिक्षाधिकारियों ने एफआईआर नहीं दर्ज कराई। विभागीय अफसरों के लचीलेपन का फायदा उठाकर इनमें से कुछ जालसाज अदालत चले गए हैं। बीएसए का कहना है कि इनमें से पांच लोगों का मामला कोर्ट में विचाराधीन है।