{"_id":"5793bd234f1c1b3c50c4ca7b","slug":"fever-virol","type":"story","status":"publish","title_hn":"वायरल फीवर का प्रकोप, 18 बीमार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
वायरल फीवर का प्रकोप, 18 बीमार
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Sun, 24 Jul 2016 12:30 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नेवादा पीएचसी के घूरी गांव में सप्ताह भर से वायरल फीवर का प्रकोप है। बीमारी की चपेट में गांव के 18 लोग आ चुके हैं। लेकिन स्वास्थ्य विभाग को बीमारी की खबर नहीं है। मजबूरन पीड़ितों को गांव के झोलाछाप चिकित्सकों से इलाज कराना पड़ रहा है। बीमारी है कि पीड़ितों का साथ छोड़ने का नाम नहीं ले रही है।
घूरी गांव में सप्ताह भर से वायरल फीवर ने अपना पांव पसार रखा है। बीमारी की जद में अब तक गांव के रामेंद्र यादव (42), धनंजय (07), कलावती (70), रमेश कुमार (36), रामचंद्र (46), रामकली (42), अर्चना (15), लालचंद्र (58) समेत 18 लोग आ चुके हैं। सप्ताह भर से बीमारी से जूझ रहे ग्रामीण नीम हकीमों से अपना इलाज करा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि नेवादा पीएचसी गांव से 12 किलोमीटर दूर है। निजी साधन न होने के चलते मरीजों को अस्पताल ले जाना मुश्किल का काम है।
ऐसे में मजबूरन ग्रामीणों को अपना इलाज झोलाछाप डॉक्टरों से कराना पड़ रहा है। उधर बीमारी है कि झोलाछाप चिकित्सकों के इलाज से ठीक होने का नाम ही नहीं ले रही है। मामले में जब पीएचसी नेवादा के प्रभारी डॉ. ललित सिंह से पूछा गया तो उन्होंने जानकारी से इनकार किया। लेकिन दावा किया कि यदि गांव में बीमारी का प्रकोप है तो रविवार को चिकित्सकों की टीम भेजकर पीड़ितों को हर संभव इलाज मुहैया कराया जाएगा। कुछ भी हो समय रहते चिकित्सकों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया तो वायरल फीवर की जद में गांव के और लोगों के आने का खतरा उत्पन्न हो गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
घूरी गांव में सप्ताह भर से वायरल फीवर ने अपना पांव पसार रखा है। बीमारी की जद में अब तक गांव के रामेंद्र यादव (42), धनंजय (07), कलावती (70), रमेश कुमार (36), रामचंद्र (46), रामकली (42), अर्चना (15), लालचंद्र (58) समेत 18 लोग आ चुके हैं। सप्ताह भर से बीमारी से जूझ रहे ग्रामीण नीम हकीमों से अपना इलाज करा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि नेवादा पीएचसी गांव से 12 किलोमीटर दूर है। निजी साधन न होने के चलते मरीजों को अस्पताल ले जाना मुश्किल का काम है।
विज्ञापन
ऐसे में मजबूरन ग्रामीणों को अपना इलाज झोलाछाप डॉक्टरों से कराना पड़ रहा है। उधर बीमारी है कि झोलाछाप चिकित्सकों के इलाज से ठीक होने का नाम ही नहीं ले रही है। मामले में जब पीएचसी नेवादा के प्रभारी डॉ. ललित सिंह से पूछा गया तो उन्होंने जानकारी से इनकार किया। लेकिन दावा किया कि यदि गांव में बीमारी का प्रकोप है तो रविवार को चिकित्सकों की टीम भेजकर पीड़ितों को हर संभव इलाज मुहैया कराया जाएगा। कुछ भी हो समय रहते चिकित्सकों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया तो वायरल फीवर की जद में गांव के और लोगों के आने का खतरा उत्पन्न हो गया है।
विज्ञापन