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रो रहे किसान, कैसे रोपें धान
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Sun, 23 Jul 2017 02:06 AM IST
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कौशाम्बी
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किशनपुर पंप कैनाल की माइनरें किसानों को ऐन वक्त पर दगा दे रही हैं। उनमें पानी न होने से नहरी क्षेत्र के किसान धान की रोपाई नहीं कर पा रहे हैं। पिछले सप्ताह हुई झमाझम बारिश से कुछ किसानों ने धान की रोपाई तो कर ली थी पर पानी के अभाव में खर पतवार नाशक दवाओं का छिड़काव नहीं कर पा रहे हैं। रोपाई न कर पाने से किसान चिंतित हो उठे हैं।
किशनपुर पंप कैनाल व उसकी माइनरों का जाल जिले के आधे हिस्से में बिछा है। लगभग 76 किलोमीटर में फैली नहर से दस हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की खेती कराई जाती है। लगभग दस साल से इसकी माइनरें किसानों को खेती के ऐन वक्त पर दगा देती चली आ रही हैं। इस साल सूबे में योगी सरकार बनने के बाद किसानों में नहर में बराबर पानी आने की उम्मीद जगी थी। मगर किसानों की उम्मीदों पर पानी फिर रहा है। मौजूदा समय में धान रोपाई का जोरों पर है। माइनरों में पानी के अभाव में किसानों के खेत बंजर पड़े हैं। सबसे बुरा हाल तो घोसिया, म्योहर व बंधुरी रसूलीपुर माइनर के किसानों का है। इस क्षेत्र के कुछ किसानों ने पिछले सप्ताह हुई झमाझम बारिश के पानी से धान की रोपाई कर ली थी। मगर खेतों का पानी सूख जाने के बाद खेतों में खरपतवार नाशक दवाओं का छिड़काव नहीं हो पा रहा है। इसके अलावा पानी के अभाव में जिन किसानों के खेतों में धान की रोपाई नहीं हो सकी उनका हाल बेहाल है। विभागीय जिम्मेदार हैं कि माइनरों में पानी छोड़े जाने के नाम पर हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।
भाकियू और सकिपा की चेतावनी का भी नहीं है कोई असर
किसानों के हितों की लड़ाई लड़ने वाली भारतीय किसान यूनियन व समर्थ किसान पार्टी के कार्यकर्ता आए दिन नहरों में पानी छोड़े जाने की मांग को लेकर जिला स्तरीय अधिकारियों को अल्टीमेटम देते रहते हैं। उनके द्वारा नहरों में पानी न छोड़े जाने को लेकर आंदोलन की चेतावनी दी जाती है। मगर इसका कोई असर जिम्मेदारों पर पड़ता नहीं दिख रहा है। माइनरों में पानी न छोड़े जाने से किसान हैरान-परेशान है। किसानों में इस बात की चिंता है कि पानी आते-आते कहीं रोपाई का समय न निकल जाए।
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किशनपुर पंप कैनाल की प्रमुख नहर में माह भर से पानी चल रहा है। माइनरों में रोस्टर के हिसाब से पानी छोड़ा जाता है। जगह-जगह माइनरों में किसान खांदी काट ले रहे हैं। इसके चलते पानी आगे नहीं बढ़ पाता। कर्मचारियों की टीम लगाकर पानी आगे बढ़ाने का प्रयास जारी है।
आरके निरंजन
अधिशासी अभियंता सिंचाई
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किशनपुर पंप कैनाल व उसकी माइनरों का जाल जिले के आधे हिस्से में बिछा है। लगभग 76 किलोमीटर में फैली नहर से दस हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की खेती कराई जाती है। लगभग दस साल से इसकी माइनरें किसानों को खेती के ऐन वक्त पर दगा देती चली आ रही हैं। इस साल सूबे में योगी सरकार बनने के बाद किसानों में नहर में बराबर पानी आने की उम्मीद जगी थी। मगर किसानों की उम्मीदों पर पानी फिर रहा है। मौजूदा समय में धान रोपाई का जोरों पर है। माइनरों में पानी के अभाव में किसानों के खेत बंजर पड़े हैं। सबसे बुरा हाल तो घोसिया, म्योहर व बंधुरी रसूलीपुर माइनर के किसानों का है। इस क्षेत्र के कुछ किसानों ने पिछले सप्ताह हुई झमाझम बारिश के पानी से धान की रोपाई कर ली थी। मगर खेतों का पानी सूख जाने के बाद खेतों में खरपतवार नाशक दवाओं का छिड़काव नहीं हो पा रहा है। इसके अलावा पानी के अभाव में जिन किसानों के खेतों में धान की रोपाई नहीं हो सकी उनका हाल बेहाल है। विभागीय जिम्मेदार हैं कि माइनरों में पानी छोड़े जाने के नाम पर हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।
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भाकियू और सकिपा की चेतावनी का भी नहीं है कोई असर
किसानों के हितों की लड़ाई लड़ने वाली भारतीय किसान यूनियन व समर्थ किसान पार्टी के कार्यकर्ता आए दिन नहरों में पानी छोड़े जाने की मांग को लेकर जिला स्तरीय अधिकारियों को अल्टीमेटम देते रहते हैं। उनके द्वारा नहरों में पानी न छोड़े जाने को लेकर आंदोलन की चेतावनी दी जाती है। मगर इसका कोई असर जिम्मेदारों पर पड़ता नहीं दिख रहा है। माइनरों में पानी न छोड़े जाने से किसान हैरान-परेशान है। किसानों में इस बात की चिंता है कि पानी आते-आते कहीं रोपाई का समय न निकल जाए।
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किशनपुर पंप कैनाल की प्रमुख नहर में माह भर से पानी चल रहा है। माइनरों में रोस्टर के हिसाब से पानी छोड़ा जाता है। जगह-जगह माइनरों में किसान खांदी काट ले रहे हैं। इसके चलते पानी आगे नहीं बढ़ पाता। कर्मचारियों की टीम लगाकर पानी आगे बढ़ाने का प्रयास जारी है।
आरके निरंजन
अधिशासी अभियंता सिंचाई