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चुनाव ड्यूटी लगते ही बीमार होने लगे कर्मी
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Wed, 01 Feb 2017 12:27 AM IST
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विधान सभा चुनाव में ड्यूटी लगते ही कर्मचारी बीमार होने लगे। परिवार में शादी, बीमारी की आड़ लेकर मतदान कार्मिक अधिकारी के यहां फरियाद करने लगे हैं। अफसर हैं कि वह किसी भी कीमत पर ड्यूटी नहीं काटेंगे, उन्हीं लोगों की ड्यूटी काटी जाएगी, जिनके घरों में शादी है। वह भी जांच कराने के बाद।
विधान सभा चुनाव सकुशल संपन्न कराने के लिए डीईओ के निर्देश पर मतदान कार्मिक अधिकारी ने 1147 बूथों पर कर्मचारियों की चुनाव ड्यूटी लगा दी है। इसमें 1434 पीठासीन अधिकारियों के अलावा इतने ही पोलिंग अधिकारी प्रथम, द्वितीय व तृतीय बनाए गए हैं। इसमें से दस फीसदी मतदान कर्मी रिजर्व रहेंगे तो 1147 पोलिंग पार्टियां मतदान केंद्रों पर पहुंचकर मतदान कराएंगी। मतदान अधिकारी प्रथम, द्वितीय व तृतीय के लिए तो जिले में कर्मचारी हैं पर पीठासीन की संख्या 734 ही उपलब्ध है। ऐसे में पीठासीन अधिकारी बनाने के लिए सात सौ कर्मचारियों को बाहर से मंगाना पड़ रहा है। उधर ड्यूटी लगाए जाने के बाद प्रशिक्षण कार्यक्रम का डाटा कर्मचारियों को मिलना शुरू हो गया है।
ड्यूटी का पत्र मिलने के बाद शिक्षकों के सहित अन्य विभागों के कर्मचारी नाम कटवाने की फिराक में जुट गए हैं। विभागीय अफसरों से बात न बनने के बाद वह मतदान अधिकारी कार्मिक के यहां भाई के बेटा-बेटी की शादी, बहन या भांजी की शादी का कार्ड लगाकर नाम कटवाना चाह रहे हैं। कुछ लोग तो बगैर बीमारी के फर्जी चिकित्सकीय सर्टिफिकेट बनवाकर चुनाव ड्यूटी करने से कन्नी काटने की कोशिश कर रहे हैं। आंकड़ों पर जाएं तो मतदान कार्मिक अधिकारी के यहां अब तक दर्जन भर कर्मी आवेदन लेकर पहुंच चुके हैं। मतदान कार्मिक अधिकारी हैं कि वह वास्तविकता को परखते हुए आवेदन ही वापस कर दे रहे हैं।
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लोकतंत्र के महापर्व को सकुशल संपन्न कराना सबसे बड़ा काम है। यदि किसी कर्मचारी की वास्तविक समस्या है तो उसे दरकिनार नहीं किया जाएगा। बहाने से ड्यूटी कटवाने वालों के लिए कोई गुंजाइश नहीं है।
डॉ. दिनेश कुमार सिंह, मतदान अधिकारी कार्मिक
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विधान सभा चुनाव सकुशल संपन्न कराने के लिए डीईओ के निर्देश पर मतदान कार्मिक अधिकारी ने 1147 बूथों पर कर्मचारियों की चुनाव ड्यूटी लगा दी है। इसमें 1434 पीठासीन अधिकारियों के अलावा इतने ही पोलिंग अधिकारी प्रथम, द्वितीय व तृतीय बनाए गए हैं। इसमें से दस फीसदी मतदान कर्मी रिजर्व रहेंगे तो 1147 पोलिंग पार्टियां मतदान केंद्रों पर पहुंचकर मतदान कराएंगी। मतदान अधिकारी प्रथम, द्वितीय व तृतीय के लिए तो जिले में कर्मचारी हैं पर पीठासीन की संख्या 734 ही उपलब्ध है। ऐसे में पीठासीन अधिकारी बनाने के लिए सात सौ कर्मचारियों को बाहर से मंगाना पड़ रहा है। उधर ड्यूटी लगाए जाने के बाद प्रशिक्षण कार्यक्रम का डाटा कर्मचारियों को मिलना शुरू हो गया है।
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ड्यूटी का पत्र मिलने के बाद शिक्षकों के सहित अन्य विभागों के कर्मचारी नाम कटवाने की फिराक में जुट गए हैं। विभागीय अफसरों से बात न बनने के बाद वह मतदान अधिकारी कार्मिक के यहां भाई के बेटा-बेटी की शादी, बहन या भांजी की शादी का कार्ड लगाकर नाम कटवाना चाह रहे हैं। कुछ लोग तो बगैर बीमारी के फर्जी चिकित्सकीय सर्टिफिकेट बनवाकर चुनाव ड्यूटी करने से कन्नी काटने की कोशिश कर रहे हैं। आंकड़ों पर जाएं तो मतदान कार्मिक अधिकारी के यहां अब तक दर्जन भर कर्मी आवेदन लेकर पहुंच चुके हैं। मतदान कार्मिक अधिकारी हैं कि वह वास्तविकता को परखते हुए आवेदन ही वापस कर दे रहे हैं।
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लोकतंत्र के महापर्व को सकुशल संपन्न कराना सबसे बड़ा काम है। यदि किसी कर्मचारी की वास्तविक समस्या है तो उसे दरकिनार नहीं किया जाएगा। बहाने से ड्यूटी कटवाने वालों के लिए कोई गुंजाइश नहीं है।
डॉ. दिनेश कुमार सिंह, मतदान अधिकारी कार्मिक