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कोरोना संक्रमण से मुक्त हुआ जिला कारागार, डीजीपी ने की सराहना
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जिला कारागार के बंदी व स्टाफ पूरी तरह से कोरोना संक्रमण से मुक्त हैं। बुधवार को डीजीपी जेल आनंद कुमार ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए कोविड-19 को लेकर कराई जाने वाली जांच की समीक्षा की तो कौशांबी का कारागार मंडल में पहले स्थान पर आया। यहां बंद व स्टाफ की सौ फीसदी जांच हो चुकी है।
जेल अधीक्षक बीएस मुकुंद ने बताया कि बुधवार को सूबे के सभी जनपदों की समीक्षा की गई थी। जिसमें कई जनपदों में बंदी व स्टाफ की कोविड-19 की जांच काफी कम पाई गई। इस पर डीजीपी ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि कम से कम 50 फीसदी जांच हर जेल में होनी चाहिए। इसके बाद कौशाम्बी में इसका पूरी तरह अमल किया गया।
इस बाबत जेल अधीक्षक का कहना है कि कौशांबी कारागार कोरोना टेस्ट के मामले में पहले स्थान पर रहा। बताया कि जिला कारागार में आठ सौ बंदी और 66 स्टाफ हैं। सभी की लगभग दो बार जांच हो चुकी है। सभी की रिपोर्ट निगेटिव है। इसके अलावा नए बंदियों को जेल के सामने बने अस्थाई जेल आईटीआई में रखा जाता है। वहां आने वाले बंदी की एंटीजन किट से जांच कराई जाती है।
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इसके बाद उसे वहीं पर 14 दिन तक क्वारंटीन रखा जाता है। 14 दिन की अवधि पूरी होने पर स्वॉब सैंपल की जांच कराने के बाद ही नए बंदी को जिला कारागार में भेजा जाता है। अस्थाई कारागार के अंदर की व्यवस्था जेल प्रशासन की होती है। बाहरी व्यवस्था पुलिस करती है। यही कारण है कि 14 अगस्त के बाद से लेकर अब तक कारागार के बंदी व स्टाफ संक्रमित नहीं हुए। इससे पहले जो 14 लोग संक्रमित मिले थे, वह भी इलाज के बाद अब पूरी तरह से स्वस्थ होकर कारागार आ गए हैं।
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जेल अधीक्षक बीएस मुकुंद ने बताया कि बुधवार को सूबे के सभी जनपदों की समीक्षा की गई थी। जिसमें कई जनपदों में बंदी व स्टाफ की कोविड-19 की जांच काफी कम पाई गई। इस पर डीजीपी ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि कम से कम 50 फीसदी जांच हर जेल में होनी चाहिए। इसके बाद कौशाम्बी में इसका पूरी तरह अमल किया गया।
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इस बाबत जेल अधीक्षक का कहना है कि कौशांबी कारागार कोरोना टेस्ट के मामले में पहले स्थान पर रहा। बताया कि जिला कारागार में आठ सौ बंदी और 66 स्टाफ हैं। सभी की लगभग दो बार जांच हो चुकी है। सभी की रिपोर्ट निगेटिव है। इसके अलावा नए बंदियों को जेल के सामने बने अस्थाई जेल आईटीआई में रखा जाता है। वहां आने वाले बंदी की एंटीजन किट से जांच कराई जाती है।
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इसके बाद उसे वहीं पर 14 दिन तक क्वारंटीन रखा जाता है। 14 दिन की अवधि पूरी होने पर स्वॉब सैंपल की जांच कराने के बाद ही नए बंदी को जिला कारागार में भेजा जाता है। अस्थाई कारागार के अंदर की व्यवस्था जेल प्रशासन की होती है। बाहरी व्यवस्था पुलिस करती है। यही कारण है कि 14 अगस्त के बाद से लेकर अब तक कारागार के बंदी व स्टाफ संक्रमित नहीं हुए। इससे पहले जो 14 लोग संक्रमित मिले थे, वह भी इलाज के बाद अब पूरी तरह से स्वस्थ होकर कारागार आ गए हैं।