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जगत जननी के दर्शन से निहाल हुए भक्तों ने लगाए जयकारे
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शारदीय नवरात्र के चौथे दिन रविवार को कड़ा स्थित मां शीतला धाम जयकारों से गूंज उठा। भक्तों ने जगतजननी मां शीतला के पांचवे स्वरूप स्कंद माता की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। धाम का चप्पा-चप्पा भक्तिभाव में लीन नजर आया। उधर, जिले के अन्य प्रमुख कस्बों, बाजारों में सजाए गए पूजा पंडालों, देवी मंदिरों में भी आस्थावानों की भीड़ जुटी।
शक्ति का पांचवां स्वरूप स्कंद माता माना गया है। नवरात्र के पांचवें दिन मां के इसी स्वरूप की उपासना की जाती है। लेकिन इस बार शारदीय नवरात्र में एक तिथि की हानि होने के कारण चौथे दिन रविवार को ही भक्तों ने देवी के स्कंदमाता स्वरूप की उपासना की।
इसके लिए शक्ति पीठ कड़ा धाम में स्थानीय भक्तों के साथ ही प्रदेश के कोने-कोने से आस्थावानों का सैलाब उमड़ पड़ा। मां का भव्य शृृंगार किया गया। गंगा स्नान करने के बाद आस्थावान माला-फूल, नारियल, चुनरी प्रसाद लेकर मंदिर पहुंचे और मां की झलक पाकर निहाल हो उठे।
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महिलाओं ने सुहाग की सामग्री अर्पित की तो पुरुषों ने प्रसाद चढ़ाकर सुख-समृद्धि की कामना की। चुनरी, फूल व रंग-बिरंगी झालरों से मंदिर की गई सजावट की गई। नवरात्र में भक्तों का उत्साह देखते ही बन रहा है। या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमो नम: मंत्रोच्चार और मां शीतला के जयकारे से समूचा धाम में गूंजता रहा।
सुबह मंगला आरती के बाद मां का कपाट भक्तों के दर्शन के लिए खोल दिया गया। मां का कपाट खुलते ही आदिशक्ति के जयघोष से समूचा परिसर गुंजायमान हो उठा।
शीतला धाम कड़ा के अलावा मुख्यालय मंझनपुर स्थित दुर्गा मंदिर, पश्चिमशरीरा स्थित झारखंडी मंदिर, अढ़ौली स्थित देवी मंदिर, किशुन अंबारी स्थित माता अंबारी समेत सभी कस्बों बाजारों के देवी मंदिरों में भक्तों की भीड़ रही। पूजा पंडालों में भी दिन भर पूजा-पाठ व रात में भजन-कीर्तन चलता रहा।
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शक्ति का पांचवां स्वरूप स्कंद माता माना गया है। नवरात्र के पांचवें दिन मां के इसी स्वरूप की उपासना की जाती है। लेकिन इस बार शारदीय नवरात्र में एक तिथि की हानि होने के कारण चौथे दिन रविवार को ही भक्तों ने देवी के स्कंदमाता स्वरूप की उपासना की।
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इसके लिए शक्ति पीठ कड़ा धाम में स्थानीय भक्तों के साथ ही प्रदेश के कोने-कोने से आस्थावानों का सैलाब उमड़ पड़ा। मां का भव्य शृृंगार किया गया। गंगा स्नान करने के बाद आस्थावान माला-फूल, नारियल, चुनरी प्रसाद लेकर मंदिर पहुंचे और मां की झलक पाकर निहाल हो उठे।
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महिलाओं ने सुहाग की सामग्री अर्पित की तो पुरुषों ने प्रसाद चढ़ाकर सुख-समृद्धि की कामना की। चुनरी, फूल व रंग-बिरंगी झालरों से मंदिर की गई सजावट की गई। नवरात्र में भक्तों का उत्साह देखते ही बन रहा है। या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमो नम: मंत्रोच्चार और मां शीतला के जयकारे से समूचा धाम में गूंजता रहा।
सुबह मंगला आरती के बाद मां का कपाट भक्तों के दर्शन के लिए खोल दिया गया। मां का कपाट खुलते ही आदिशक्ति के जयघोष से समूचा परिसर गुंजायमान हो उठा।
शीतला धाम कड़ा के अलावा मुख्यालय मंझनपुर स्थित दुर्गा मंदिर, पश्चिमशरीरा स्थित झारखंडी मंदिर, अढ़ौली स्थित देवी मंदिर, किशुन अंबारी स्थित माता अंबारी समेत सभी कस्बों बाजारों के देवी मंदिरों में भक्तों की भीड़ रही। पूजा पंडालों में भी दिन भर पूजा-पाठ व रात में भजन-कीर्तन चलता रहा।