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देवीगंज हादसा: मृतकों के परिजनों को मुआवजे पर कानूनी अड़चन

Sat, 05 Dec 2020 12:26 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 05 Dec 2020 12:26 AM IST
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Deviganj accident: legal hurdle on compensation to the kin of the deceased
Deviganj accident: legal hurdle on compensation to the kin of the deceased - फोटो : KAUSHAMBI
देवीगंज हादसे में मृत आठ लोगों की मौत के बाद परिवारिक लाभ योजना के तहत मुआवजा मिलने में कानूनी पेंच फंस सकता है। दूल्हे की बहन शशि व चाचा बसंत लाल की पत्नी प्रकाशनी के पास ही कृषि योग्य जमीन पर है। लेकिन, दोनों की आर्थिक स्थित बेहतर होने से योजना का लाभ मिलने में दिक्कत आ रही है।
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राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना के तहत हादसे के शिकार मृतक के आश्रितों को तत्काल 30 हजार रुपये का मुआवजा दिया जाता है। इसमें मृतक अगर किसान है तो उसे वरीयता दी जाती है। इसके अलावा परिवार के मुखिया की मौत हो जाने पर (किसान) को योजना का लाभ दिया जा सकता है। नियमानुसार मुआवजे पाने के हकदार परिजनों की आर्थिक स्थिति भी देखी जाती है। बताया जा रहा है कि घटना में मृत दूल्हे की बहन शशि के नाम अंदावा में कृषि योग्य जमीन पर है, लेकिन उसके पति रमेश गुप्ता कारोबारी हैं।
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शशि के साथ ही उसके आठ वर्षीय बेटे ओम की भी मौत हो चुकी है। इसी तरह दूल्हे पंकज के चाचा बसंत लाल की पत्नी प्रकाशनी व बेटी नेहा की मौत हुई है। प्रकाशनी के नाम पर भी जमीन पर है, लेकिन पति बसंत लाल लेखपाल हैं। मामा हनुमान प्रसाद की पत्नी व बेटी की मौत हुई। दोनों मृतकों के नाम खेती नहीं है, लेकिन हनुमान प्रसाद कारोबारी हैं। स्कार्पियो चालक शिवराम के पिता के पास खेती तो है लेकिन उसके नाम पर कृषि योग्य जमीन नहीं है। शहजादपुर गांव के ही सोनू तिवारी की बेटी सीमा भी घटना में मारी गई।
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लेकिन उसे भी पारिवारिक लाभ योजना का लाभ मिलने पर अड़चन है। ग्राम प्रधान कौशिल्या देवी के प्रतिनिधि दिलीप तिवारी की मांग पर प्रशासन अब मुआवजा दिलाने के लिए रास्ता तलाश रहा है। एसडीएम राकेश कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि पारिवारिक लाभ योजना का लाभ दिलाए जाने के लिए तमाम मानक है। पीड़ित परिवारों को मुआवजा दिलाए जाने में काफी कानूनी अड़चन आ रही है। जिलाधिकारी ने प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर पीड़ित परिवार को सरकारी मदद दिए जाने की मांग की है।
आंगन में नहीं पड़े नई बहू के कदम, मजबूरी में मंडप का किया गया विसर्जन
कोखराज कोतवाली क्षेत्र के शहजादपुर निवासी एक परिवार के छह करीबी सदस्यों सहित आठ लोगों की हादसे में मौत के बाद परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। परिवार के लिए शायद पहला मौका था कि बिना बहू के घर में कदम रखे विवाह की सबसे अहम रश्म फर्ज अदायगी के बीच निपटाई गई। इस बीच बृहस्पतिवार शाम मंडप विसर्जन किया गया।
शहजादपुर गांव निवासी मोहन लाल के बेटे पंकज अग्रहरि की मंगलवार को बरात देवीगंज गई थी। बरात में शामिल दूल्हे की बहन शशि, भांजा ओम, चाची प्रकाशनी, चचेरी बहन ऋचा, मामी पूनम व ममेरी बहन मुस्कान सहित आठ लोग स्कार्पियो से घर लौट रहे थे। देवीगंज के समीप बुधवार भोर में स्कार्पियो के ऊपर गिट्टी का चूरा लदा ओवरलोड ट्रक पलट गया था। बुधवार शाम को ही सभी शवों का अंतिम संस्कार किया गया गया। शशि के पति रमेश गुप्ता ने अपनी पत्नी व बेटी का दाग प्रयागराज स्थित आवाज में दे रखा है।
शहजादपुर गांव में चाचा बसंत लाल ने अपनी पत्नी प्रकाशनी व बेटी नेहा व मामा हनुमान प्रसाद ने अपनी पत्नी पूनम व बेटी मुस्कान का दाग दिया है। पंकज के पड़ोस में रहने वाली सोनू तिवारी की बेटी सीमा भी हादसे में मौत का शिकार हुई है। शहजादपुर गांव में ही एक साथ पांच लोगों के शव को जलाया गया। इसी कारण पंकज की पत्नी विमला को डोली ससुराल नहीं आ सकी। गेस्ट हाउस से ही उसके घरवाले विमला को अपने साथ मायके ले गए हैं।
वैदिक रीति के अनुसार दुल्हन का पहली बार ससुराल में कदम पड़ने के बाद ही मंडप में पूजा, परिवार के साथ भोजन और अन्य रस्मों के साथ ही दुल्हन का गृह प्रवेश शुभ माना जाता है। लेकिन, हादसे के बाद मजबूरी में परिवार की महिलाओं ने बृहस्पतिवार को बिना दुल्हन के आए ही मंडप का विर्सजन कर दिया।

विधायक सिराथू ने सीएम को लिखा पत्र, मुआवजा दिलाने की मांग
मंझनपुर (संवाद)। देवीगंज हादसे में मारे गए शहजादपुर गांव निवासी लोगों के परिजनों को मुआवजा दिलाने के लिए सिराथू विधायक शीतला प्रसाद पटेल उर्फ पप्पू सामने आए हैं। विधायक ने मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में पीड़ित परिवार को हर संभव दिलाए जाने की सिफारिश की है। घटना की जानकारी होने के बाद ही विधायक मौके पर पहुंचे और मृतकों के अंतिम संस्कार तक पीड़ित परिवार के साथ रहे।
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