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जिला अस्पताल के डेंगू कक्ष में लटक रहा ताला
अमर उजाला ब्यूरो कौशाम्बी
Updated Fri, 23 Sep 2016 12:14 AM IST
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जनपद में डेंगू ने पूरी तरह से पांव पसार लिया है। इसकी चपेट में आकर अब तक तीन लोग बीमार हो चुके हैं। इसके बाद भी विभाग इससे निपटने के बजाय मरीजों को भगाने पर उतारू है। डेंगू वार्ड में ताला लटकता रहता है। मरीज आते हैं तो उनको इलाहाबाद एसआरएन भेजकर डॉक्टर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं।
बारिश का मौसम शुरू होते ही डेंगू फैलने की संभावना अधिक हो जाती है। ठीक से देखभाल नहीं होने पर बीमारी की जद में आने से लोग असमय काल के गाल में भी समा जाते हैं। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि जनपद में अब तक डेंगू के तीन मरीज मिले हैं। पहले से इनकी हालत अब बेहतर है। विभाग सिर्फ एसआरएन की माइक्रो बॉयोलॉजी विभाग की रिपोर्ट पर ही विश्वास करता है। अन्य जगहों की रिपोर्ट को वह खारिज कर देते हैं। जिला अस्पताल में डेंगू की जांच की कोई सुविधा नहीं है।
इसके चलते बहुत से लोगों को जानकारी ही नहीं हो पाती है। जिला अस्पताल में इस बीमारी से निपटने के लिए डेंगू वार्ड बनाया गया है, लेकिन यहां केवल बोर्ड ही लगा है। कभी इस वार्ड का दरवाजा नहीं खुलता। यहां अक्सर ताला लटकता रहता है। गंभीर मरीज आते हैं और वार्ड में लटक रहे ताले को देखकर वापस चले जाते हैं। सीएमओ डॉ. एसके उपाध्याय ने बताया कि सरसवां के सोनौली गांव के हेमंत कुमार, करारी की साधना देवी व चायल के चिल्लाशहबाजी के संतोष कुमार को डेंगू की पुष्टि हुई थी। अब तीनों ठीक हैं। कहीं शिकायत मिलने पर फागिंग कराई जाती है। इसके अलावा प्राइवेट अस्पतालों में भी उनकी निगाह रहती है। उन्होंने यह भी बताया कि डेंगू के मच्छर रात में नहीं बल्कि दिन में ही काटते हैं।
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बारिश का मौसम शुरू होते ही डेंगू फैलने की संभावना अधिक हो जाती है। ठीक से देखभाल नहीं होने पर बीमारी की जद में आने से लोग असमय काल के गाल में भी समा जाते हैं। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि जनपद में अब तक डेंगू के तीन मरीज मिले हैं। पहले से इनकी हालत अब बेहतर है। विभाग सिर्फ एसआरएन की माइक्रो बॉयोलॉजी विभाग की रिपोर्ट पर ही विश्वास करता है। अन्य जगहों की रिपोर्ट को वह खारिज कर देते हैं। जिला अस्पताल में डेंगू की जांच की कोई सुविधा नहीं है।
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इसके चलते बहुत से लोगों को जानकारी ही नहीं हो पाती है। जिला अस्पताल में इस बीमारी से निपटने के लिए डेंगू वार्ड बनाया गया है, लेकिन यहां केवल बोर्ड ही लगा है। कभी इस वार्ड का दरवाजा नहीं खुलता। यहां अक्सर ताला लटकता रहता है। गंभीर मरीज आते हैं और वार्ड में लटक रहे ताले को देखकर वापस चले जाते हैं। सीएमओ डॉ. एसके उपाध्याय ने बताया कि सरसवां के सोनौली गांव के हेमंत कुमार, करारी की साधना देवी व चायल के चिल्लाशहबाजी के संतोष कुमार को डेंगू की पुष्टि हुई थी। अब तीनों ठीक हैं। कहीं शिकायत मिलने पर फागिंग कराई जाती है। इसके अलावा प्राइवेट अस्पतालों में भी उनकी निगाह रहती है। उन्होंने यह भी बताया कि डेंगू के मच्छर रात में नहीं बल्कि दिन में ही काटते हैं।
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