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Kaushambi News: गंगा कछार की फसल चौपट... बाजार से तरबूज खरीदकर बेचने को मजबूर किसान
Fri, 01 May 2026 12:13 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Fri, 01 May 2026 12:13 AM IST
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गंगा नदी की बाढ़ ने इस बार कड़ा क्षेत्र के कछारी इलाकों में तरबूज की खेती करने वाले किसानों की पूरी मेहनत पर पानी फेर दिया है। किसान बाजार से तरबूज लाकर बेचने को मजबूर हैं।
सिराथू ब्लॉक के तरसौरा और शहजादपुर गांवों में जिन किसानों ने उम्मीद के साथ तरबूज की फसल तैयार की थी, वह पानी में पूरी तरह खराब हो गई। किसान ज्ञान चंद्र ने बताया कि उन्होंने करीब छह बीघा जमीन में तरबूज की खेती की थी, जिसमें लगभग एक लाख रुपये की लागत लगी थी, लेकिन बाढ़ ने सब खत्म कर दिया। इसलिए बाजार से तरबूज लाकर बेचने को मजबूर हैं।
इसी तरह किसान गोविंद पटेल ने कहा कि उन्होंने चार बीघा में तरबूज की खेती की थी, जिसमें करीब सत्तर हजार रुपये खर्च हुए थे। उन्होंने बताया कि जब फसल अच्छी होती थी तो दो से तीन लाख रुपये तक की बचत हो जाती थी, लेकिन अब घाटा हो रहा है।
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किसान रामप्रकाश ने बताया कि दो बीघा में उन्होंने तरबूज लगाया था, जिसमें लगभग तीस हजार रुपये की लागत आई थी, लेकिन बाढ़ के कारण पूरी फसल खराब हो गई। ग्रामीणों ने प्रशासन से मुआवजे की मांग की है, ताकि उनके नुकसान की भरपाई हो सके।
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सिराथू ब्लॉक के तरसौरा और शहजादपुर गांवों में जिन किसानों ने उम्मीद के साथ तरबूज की फसल तैयार की थी, वह पानी में पूरी तरह खराब हो गई। किसान ज्ञान चंद्र ने बताया कि उन्होंने करीब छह बीघा जमीन में तरबूज की खेती की थी, जिसमें लगभग एक लाख रुपये की लागत लगी थी, लेकिन बाढ़ ने सब खत्म कर दिया। इसलिए बाजार से तरबूज लाकर बेचने को मजबूर हैं।
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इसी तरह किसान गोविंद पटेल ने कहा कि उन्होंने चार बीघा में तरबूज की खेती की थी, जिसमें करीब सत्तर हजार रुपये खर्च हुए थे। उन्होंने बताया कि जब फसल अच्छी होती थी तो दो से तीन लाख रुपये तक की बचत हो जाती थी, लेकिन अब घाटा हो रहा है।
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किसान रामप्रकाश ने बताया कि दो बीघा में उन्होंने तरबूज लगाया था, जिसमें लगभग तीस हजार रुपये की लागत आई थी, लेकिन बाढ़ के कारण पूरी फसल खराब हो गई। ग्रामीणों ने प्रशासन से मुआवजे की मांग की है, ताकि उनके नुकसान की भरपाई हो सके।